सार
Rajasthan Assembly : सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई PACS में नियुक्तियों का अधिकार केवल संचालक मंडल के पास है। वहीं, व्यवस्थापक चयन में हुई धांधली की शिकायतों पर विभाग ने सख्त जांच व कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
File Photo – Rajasthan Assembly
विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 10 अप्रैल | प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS) की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। सहकारिता विभाग ने राजस्थान विधानसभा के पांचवें सत्र के दौरान सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल द्वारा पूछे गए अतारांकित सवाल के जवाब में बताया कि प्रदेश में नई ग्राम सेवा सहकारी समिति के गठन के समय आय का कोई निश्चित स्रोत न होने के कारण व्यवस्थापक की नियुक्ति के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाती है। वर्तमान नियमों के तहत, नई समिति में अलग से कर्मचारी तैनात करने के बजाय दूसरी ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक को ही अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर कार्य संपादित कराया जाता है। वही बाड़मेर और बालोतरा जिलों में सहकारी समितियों के संचालन को लेकर पूछे गए सवाल पर विभाग ने स्वीकार किया कि इन दोनों जिलों की समितियों का नियंत्रण वर्तमान में बाड़मेर केंद्रीय सहकारी बैंक के अधीन ही है। सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह सामने आया है कि पिछले समय में व्यवस्थापक और सहायक व्यवस्थापक की चयन प्रक्रिया में धांधली की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिस पर विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
नियुक्ति का पूर्ण अधिकार संचालक मंडल के पास
व्यवस्थापकों की नियुक्ति में अधिकारियों के हस्तक्षेप की आशंकाओं को खारिज करते हुए विभाग ने बताया कि प्राथमिक कृषि ऋणदात्री सहकारी समितियों के सेवा नियम-2022 के तहत नियुक्ति का अधिकार केवल संबंधित संस्था के संचालक मंडल के पास है। पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अब इन पदों पर सीधी भर्ती ’सहकारी भर्ती बोर्ड’ के माध्यम से किए जाने का प्रावधान किया गया है, जिसमें CCB प्रधान कार्यालय के अधिकारियों की कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं रहती है।


