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लिखित आदेश मिलने तक पैक्स-लैम्पस कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी, मांगों पर अड़े कर्मचारी; जयपुर में महापड़ाव की चेतावनी

सार 

Jaipur : विशेषज्ञों के अनुसार संघर्ष समिति अपनी मांगों पर अड़ी है, वहीं कानूनी और वित्तीय पेच के कारण सरकार के लिए तत्काल निर्णय लेना मुश्किल नजर आ रहा है।

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विस्तार 

जयपुर | डिजिटल डेस्क | 8 अप्रैल | राजस्थान सहकारी समिति कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर के तत्वावधान में कल प्रदेश पदाधिकारियों और सभी जिलाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर के पैक्स-लैम्पस कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्री मांगों के निराकरण न होने तक वर्तमान में चल रहे कार्य बहिष्कार को यथावत रखने का संकल्प लिया । संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार और कमेटी के साथ हुई वार्ता में दो मांगों पर मौखिक सहमति तो बनी, लेकिन समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा बैंकिंग सहायक भर्ती और व्यवस्थापकों में से 100% ऋण पर्यवेक्षक चयन की मांगों पर चर्चा अधूरी रहने के कारण पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है।​ आज संघर्ष समिति के प्रतिनिधि रजिस्ट्रार सहकारिता से मिलकर पुनः अपनी मांगें रखेंगे । उसके पश्चात यदि वार्ता के अगले दौर में मांगों का ठोस निस्तारण नहीं होता है, तो प्रदेश के पैक्स-लैम्पस कर्मचारी जयपुर में महापड़ाव डालेंगे। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है। संघर्ष समिति ने सभी जिलों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को महापड़ाव की तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए हैं। हड़ताल के बावजूद, संघर्ष समिति के प्रतिनिधि सहकारिता मंत्री से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। कर्मचारियों का प्रयास है कि संवाद के जरिए जल्द से जल्द कोई ठोस रास्ता निकले।

धरातल पर मजबूती दिखाने की अपील ?

​संघर्ष समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने पिछली कमियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि फरवरी और मार्च में बहिष्कार के बावजूद बड़ी संख्या में DMR (Daily Monitoring Report) दर्ज हुई, जिससे सरकार के सामने कर्मचारियों की एकजुटता में कमी दिखी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार अप्रैल में बहिष्कार को ‘पिटवाने’ का काम न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो जिलाध्यक्ष अपने क्षेत्र में बहिष्कार को धरातल पर मजबूत नहीं रख सकते, उन्हें मंचों पर भाषण देने का कोई अधिकार नहीं है ।

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कानूनी और आर्थिक पेच में फंसी मांगें

राजस्थान में पैक्स-लैम्पस कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किया जा रहा कार्य बहिष्कार अब जटिल कानूनी मोड़ पर खड़ा है। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार पैक्स-लैम्पस कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर कानूनी अड़चनें और वित्तीय संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे गतिरोध जल्द समाप्त होने के आसार कम नजर आ रहे हैं, क्योंकि कर्मचारियों की प्रमुख मांग ‘कैडर अथॉरिटी’ का गठन है। हालांकि, विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि 1991 में राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इसे पहले ही अवैध घोषित कर भंग कर दिया था। ऐसे में पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू करना वैधानिक रूप से लगभग असंभव है। और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को लेकर राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 29 (ख) के तहत मामला कोर्ट में विचाराधीन है तथा वर्तमान में इस पूरी प्रक्रिया पर न्यायालय का ‘स्टे’ प्रभावी है, जिससे कोई भी नया कदम उठाना सरकार के लिए कानूनन मुमकिन नहीं है एवं ऋण पर्यवेक्षक और बैंकिंग सहायकों की नई भर्ती में संचित हानि (Accumulated Loss) सबसे बड़ी बाधा है। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जब तक केंद्रीय सहकारी बैंक अपनी वित्तीय स्थिति नहीं सुधार लेते, तब तक नई नियुक्तियों का आर्थिक बोझ उठाना उनके बस के बाहर है।

आदेश लागू न होने पर अवमानना याचिका की चेतावनी

एक तरफ आंदोलन चल रहा है, तो दूसरी तरफ कानूनी लड़ाई भी तेज है। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नंदलाल वैष्णव ने बताया कि भीलवाड़ा के दो व्यवस्थापकों द्वारा दायर याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने 17 अक्टूबर 2024 को निर्णय पारित किया था कि बैंकिंग सहायक पद पर व्यवस्थापकों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। हालांकि आदेश के महीनों बीत जाने के बाद भी विभाग ने अब तक विज्ञप्ति जारी नहीं की है। अब नंदलाल वैष्णव का कहना है कि यदि विभाग ने जल्द ही चयन प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं की तो मजबूर होकर विभाग के खिलाफ कोर्ट ऑफ कंटेंप्ट (न्यायालय की अवमानना) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

 

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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