सार
Jaipur : राजस्थान के सहकारिता विभाग में हालिया प्रशासनिक फेरबदल : जोधपुर राजफैड क्षेत्रीय अधिकारी के महत्वपूर्ण पद से सीनियर को हटाकर जूनियर को जिम्मेदारी देना विभाग की कार्यशैली और मॉनिटरिंग की गंभीरता पर सवाल उठाता है।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 28 मार्च | राजस्थान के सहकारिता विभाग में इन दिनों आदेशों की आपाधापी और पदों के गणित ने एक अजीब स्थिति पैदा कर दी है। दरअसल, जोधपुर में राजफैड के क्षेत्रीय अधिकारी का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि संभाग के आठ जिलों की 41 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों की खंड स्तर पर सुचारू मॉनिटरिंग की कमान इसी पद के पास होती है। लेकिन पिछले एक सप्ताह में हुए घटनाक्रम ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला 23 मार्च को शुरू हुआ जब अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां खंड जोधपुर ने एक आदेश जारी किया। इसमें बताया गया कि राजस्थान सहकारिता सेवा के सहायक रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी दलपतदान चारण, जो जोधपुर स्थित राजफैड के क्षेत्रीय अधिकारी हैं, चिकित्सीय अवकाश पर जा रहे हैं। उनके लौटने तक इस पद का अतिरिक्त कार्यभार उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां जोधपुर में पदस्थ हेमेन्द्र सिंह आशिया को सौंप दिया गया। अभी इस आदेश की स्याही सूखी भी नहीं थी कि अगले ही दिन सहकारिता विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने एक नया आदेश जारी कर दिया। इस नए आदेश में न केवल दलपतदान बल्कि अजमेर के क्षेत्रीय अधिकारी गौरव सेन को भी एपीओ (पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा) कर दिया गया।
अब पेच यह है कि जिस क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर राजस्थान सहकारिता सेवा के संयुक्त रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए, वहां विभाग ने निरीक्षक स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी है। सहायक रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारियों को हटाकर अपेक्षाकृत जूनियर यानी निरीक्षक को इतना बड़ा अतिरिक्त चार्ज देना विभाग के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह भी है कि एक तरफ महत्वपूर्ण पदों पर जूनियर अधिकारियों को लगाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ जोधपुर खंड में ही कई अहम पद अतिरिक्त कार्यभार के सहारे चल रहें हैं । इनमें अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां खंड जोधपुर, बाड़मेर केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंध निदेशक और अधिशासी अधिकारी जैसे बड़े पद अतिरिक्त कार्यभार के सहारे चल रहे हैं। ऐसे में सहकारिता के सुचारू कामकाज और मॉनिटरिंग को लेकर विभाग की गंभीरता पर सवाल उठना लाजमी है।


