सार
Jaipur : सहकारिता मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सहकारी बैंक ‘वाणिज्यिक संस्थान’ होने के कारण उन्हें निःशुल्क भूमि नहीं दी जाएगी। सरकार नए बैंकों की स्थापना और बीमा सेवाओं पर विचार कर रही है।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 10 मार्च | राज्य के 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) की कुल 304 शाखाएं (branches) वर्तमान में किराए के भवनों में चल रही हैं। इन शाखाओं के कार्यक्षेत्र में प्रदेश के 29,639 गांव आते हैं। यह जानकारी चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह चौहान (आक्या) द्वारा सोलहवीं विधानसभा के पांचवें सत्र के दौरान पूछे गए तारांकित सवाल के जवाब में सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने दी हैं । दरअसल, विधायक द्वारा ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS) की तर्ज पर इन CCBs को भी निशुल्क भूमि आवंटित करने का सवाल भी किया गया था । इस पर सहकारिता मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक RBI से लाइसेंस प्राप्त ’वाणिज्यिक संस्थान’ की श्रेणी में आते हैं और अपने खर्चों का वहन स्वयं के लाभ कोष से करते हैं। इसलिए, ग्रामीण क्षेत्रों में इनके लिए निशुल्क भूमि आवंटन का प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। हालांकि, चर्चा के दौरान सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने आश्वस्त किया कि यदि भविष्य में ऐसे प्रस्ताव प्राप्त होते हैं, तो सरकार उन पर विचार कर निर्णय ले सकती है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि वित्तीय और परिचालन लागत अधिक होने के कारण सहकारी बैंकों की शाखाओं में अलग से वित्तीय/बैंकिंग सेवा कियोस्क खोलने की योजना अभी विचाराधीन नहीं है। वर्तमान में पैक्स के माध्यम से सदस्यों को नकद जमा, निकासी और मिनी स्टेटमेंट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
नए केंद्रीय सहकारी बैंक खोलने की तैयारी : सर्वे के आधार पर होगा निर्णय
सहकारिता राज्य मंत्री गोतम कुमार ने विधानसभा में जानकारी दी कि जिन जिलों में केंद्रीय सहकारी बैंक नहीं हैं, वहां सर्वे के बाद सक्षमता के आधार पर नए बैंक स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, केंद्रीय सहकारी बैंकों के उप-नियमों में बदलाव कर बीमा व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया भी जारी है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्राम सेवा सहकारी समितियां सीमित संसाधनों वाली संस्थाएं हैं, जिन्हें सरकार आधारभूत ढांचे के लिए निःशुल्क भूमि और सहायता देती है। इसके विपरीत, जिला स्तरीय केंद्रीय सहकारी बैंकों के पास स्वयं की पूंजी और आय के स्रोत होने के कारण, उन्हें भूमि आवंटन नीति के तहत निःशुल्क भूमि देना संभव नहीं है।


