Home राज्य नेहरू सहकार भवन की अनदेखी : रजिस्ट्रार की समीक्षा बैठक के लिए अपेक्स बैंक का रुख

नेहरू सहकार भवन की अनदेखी : रजिस्ट्रार की समीक्षा बैठक के लिए अपेक्स बैंक का रुख

सार 

Jaipur : सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय के पास स्वयं का विशाल नेहरू सहकार भवन होने के बावजूद, 12 मार्च की समीक्षा बैठक अपेक्स बैंक में आयोजित करना चर्चा का विषय है। बैठक में प्रमुख विभागीय लक्ष्यों पर चर्चा होगी।

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File Photo

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 7 मार्च | सहकारिता विभाग के पंजीयक कार्यालय की रीति, नीति और कार्यशैली भी कम दिलचस्प नहीं है। विभाग का अपना विशाल चार मंजिला ’नेहरू सहकार भवन’ है, जिसमें कॉन्फ्रेंस हॉल और दर्जनों कमरे मौजूद हैं। लेकिन विडंबना देखिए, विभाग के रजिस्ट्रार से लेकर तमाम अधिकारियों को अपने ही विभाग की समीक्षा के लिए अपने दफ्तर से निकलकर ’अपेक्स बैंक’ के कॉन्फ्रेंस हॉल की शरण लेनी पड़ती है। आलम यह है कि 12 मार्च को होने वाली महत्वपूर्ण विभागीय समीक्षा बैठक के लिए भी रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों सहित समस्त अतिरिक्त रजिस्ट्रार खण्ड एवं समस्त उप रजिस्ट्रार जिला इकाई को समीक्षा बैठक के लिए अपेक्स बैंक कॉन्फ्रेंस हॉल बुलाया गया है। विभाग की विस्तृत संगठनात्मक संरचना में रजिस्ट्रार के अधीन सैंकड़ों अधिकारी और पद हैं, जिनके लिए ’नेहरू सहकार भवन’ में मीटिंग हॉल जगह की कमी तो नहीं है, फिर भी सहकारी महकमे की यह ’स्थान’ को लेकर मोह और भाग-दौड़ समझ से परे है। क्या विभाग को अपने ही सहकार भवन के कांफ्रेंस हॉल कमरों पर भरोसा नहीं रहा, या फिर अपेक्स बैंक का भवन परिसर ही विभाग का असली ’रजिस्ट्रार ऑफिस’ बन चुका है? दरअसल, 12 मार्च को होने वाली विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होने वाले सभी अधिकारी रजिस्ट्रार कार्यालय के ही हैं, फिर भी बैठक का स्थान तय किया गया है राजस्थान राज्य सहकारी बैंक का कॉन्फ्रेंस हॉल…। दिलचस्प यह है कि अपेक्स बैंक भले ही राज्य स्तरीय सहकारी बैंक हो, लेकिन बैठक रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों की ही है।

समीक्षा बैठक में इन बिंदुओं पर रहेगा जोर

रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में होने वाली सहकारिता विभाग की आगामी बैठक में विभाग के कामकाज को गति देने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इस बैठक में रबी-खरीफ फसल खरीद केंद्रों, समितियों के गठन व पंजीकरण, लंबित कानूनी प्रकरणों (धारा 55 व 57), वार्षिक आमसभाओं और ऑडिट रिपोर्टों की गहन समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, बजट घोषणा 2025-26 के तहत गोदाम निर्माण, ’सहकार से समृद्धि’ योजना की अनुपालना, राष्ट्रीय डेटाबेस को अपडेट करने, ई-पैक्स सर्टिफिकेट जारी करने और मल्टी-स्टेट एक्ट के अंतर्गत समितियों के अवसायन से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता से चर्चा कर ठोस निर्णय लिए जाएंगे, जिनका बैंकिंग कारोबार से कोई सरोकार नहीं है ।

आरबीआई के दिशानिर्देशों पर उठते सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक के उपरोक्त बिंदु पूर्णतः प्रशासनिक और विभागीय प्रकृति के हैं, जिनका बैंकिंग कारोबार से सीधा सरोकार नहीं है। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने हाल ही में बैंकिंग संस्थानों को अपने मुख्य वित्तीय कारोबार—जैसे डिपॉजिट और ऋण वितरण—पर ध्यान केंद्रित करने और गैर-बैंकिंग गतिविधियों से दूर रहने का परामर्श दिया है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बैंकों को गैर-बैंकिंग उत्पादों (जैसे बीमा बिक्री) को लेकर सख्त निर्देश जारी कर चुका है। ऐसे में, एक अनुसूचित सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) का उपयोग केवल बैठकों और गैर-बैंकिंग प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाना, वित्तीय अनुशासन की दृष्टि से प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब ‘नेहरू सहकार भवन’ में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर अपेक्स बैंक के संसाधनों का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है?

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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