कुप्रबंधन के अंधेरे से सफलता के उजाले तक…..!
सरवाना समिति की यह सफलता की कहानी उन सभी सहकारी संस्थाओं के लिए एक सबक है जो घाटे में चल रही हैं। यह साबित करता है कि यदि नेतृत्व ईमानदार हो और विजन स्पष्ट हो, तो अपने गाँव में भी सहकारी समिति से वित्तीय भरोसा कायम किया जा सकता है

जालोर । 24 फरवरी | (प्रकाश वैष्णव) | संकल्प की शक्ति और नेतृत्व की दूरदर्शिता यदि सही दिशा में हो, तो धूल से भी सोना निकाला जा सकता है। जालोर जिला मुख्यालय से लगभग 250 किलोमीटर दूर नेहड़ क्षेत्र में स्थित सरवाना ग्राम सेवा सहकारी समिति की कहानी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब यह समिति कुप्रबंधन और संसाधनों के अभाव में दम तोड़ चुकी थी। ताले लटकने की नौबत आ गई थी और किसानों का विश्वास पूरी तरह उठ चुका था। लेकिन आज, समिति के आँकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इस समिति ने न केवल पुनर्जन्म लिया है, बल्कि अपनी सफलता की इबारत लिख रही है । समिति ने वैद्यनाथन समिति की सिफारिशों को लागू कर वित्तीय प्रावधानों को दुरुस्त किया। खराब पड़े कर्जों के लिए बाकायदा प्रावधान किए गए, ताकि भविष्य में समिति दोबारा संकट में न आए। एक समय था जब यह समिति बदहाली के आंसू रो रही थी। ताले लटक रहे थे, फाइलें धूल फांक रही थीं और किसानों का विश्वास डगमगा चुका था। लेकिन आज वह अपनी कार्यकुशलता और ईमानदारी के दम पर पूरे नेहड़ क्षेत्र के लिए सहकारी समितियां में एक मिसाल बन गई है। समिति का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से बेहद विषम है। केंद्रीय सहकारी बैंक और जिला प्रशासन से 250 किमी दूरी होने के कारण यहाँ सुविधाओं की पहुँच हमेशा से एक चुनौती रही है। समिति के वर्तमान नेतृत्व ने जब कार्यभार संभाला, तो उनके सामने खाली खजाना और टूटी हुई उम्मीदें थीं। लेकिन मजबूत इच्छा शक्ति के साथ, उन्होंने सबसे पहले किसानों के बीच जाकर उनका विश्वास बहाल किया।

वित्तीय पारदर्शिता और रिकॉर्ड प्रदर्शन
सहकारी समिति के वित्तीय विवरणों के अनुसार, समिति की प्रगति चकित करने वाली है । समिति का टर्नऑवर करीब 14 करोड़ के पार पहुंच चुका है और अमानत के आंकड़े ये दर्शाते है कि किसानों ने अब अपनी गाढ़ी कमाई समिति में जमा करना शुरू कर दिया है। साथ ही, कृषि आदान की बिक्री में समिति ने रिकॉर्ड स्थापित किया है। जहाँ एक समय घाटा ही घाटा था, आज उस ही समिति में लाखों रुपये का लाभ ही लाभ है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। समिति द्वारा उर्वरक का भंडारण कर समयाबद्धता से किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है । जिससे यहाँ के किसानों को कालाबाजारी का सामना नहीं करना पड़ता।
ऋण वितरण और वसूली : प्रबंधन की कुशलता
वैद्यनाथन समिति की सिफारिशों के अनुसार किए गए प्रावधानों को देखें, तो समिति ने ऋण वसूली में भी कड़ाई और पारदर्शिता बरती है। खरीफ और रबी फसलों के लिए दिए गए ऋणों का प्रबंधन अब डिजिटल और सुलभ हो गया है। समिति के पास वर्तमान में करोड़ों की चल-अचल संपत्तियां (गोदाम, मशीनरी, कम्प्यूटर आदि) मौजूद हैं, जो इसके आधुनिकीकरण का प्रमाण हैं। आज सरवाना ग्राम सेवा सहकारी समिति के पास अपना गोदाम है, आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं के लिए मिनी बैंक सहकारी हैं और सबसे बढ़कर किसानों का भरोसा है। समिति की हिस्सा पूंजी अब लाखों में पहुंच गई है, जो इसकी बढ़ती सदस्यता और मजबूती का प्रतीक है।


