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सहकारी बैंकों के अध्यक्ष और डायरेक्टरों को कर्ज देने के लिए नहीं बदली जाएगी व्यवस्था: राज्य सरकार

सार 

Jaipur : राजस्थान सरकार के अनुसार, केंद्रीय सहकारी बैंकों में बीआर एक्ट की धारा 20 (अध्यक्षों/डायरेक्टरों के लोन पर रोक) को बदलना केंद्र के अधिकार में है, राज्य के नहीं…। वर्तमान में इन पदाधिकारियों को सिर्फ 1100 रुपए सिटिंग फीस मिलती है और अधिकांश बैंकों में निर्वाचित बोर्ड की जगह प्रशासक कमान संभाल रहे हैं।

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विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 16 मई | राजस्थान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश के केंद्रीय सहकारी बैंकों में बैंकिंग रेगुलेशन (BR) एक्ट, 1949 की धारा 20 को बदलने या पुरानी व्यवस्था को पुनः लागू करने का सरकार का कोई विचार नहीं है। सरकार ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि इस अधिनियम की धारा को बदलने की कार्यवाही राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र (क्षेत्राधिकार) में नहीं आती है, जिसके चलते विभाग स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है यह जानकारी सहकारिता विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रहलाद सहाय नागा द्वारा विधानसभा सदस्य श्रीचन्द कृपलानी द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में दी गई है | विधायक श्रीचन्द कृपलानी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि प्रदेश के सभी केंद्रीय सहकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत कार्य करते हैं। इसी वजह से इन बैंकों में बीआर एक्ट, 1949 की धारा 20 को लागू किया गया है। गौरतलब है कि इस धारा के तहत सहकारी बैंकों के अध्यक्षों, डायरेक्टरों और उनके परिजनों को ऋण (लोन) सुविधा उपलब्ध कराने पर कड़े प्रतिबंध रहते हैं

केवल ‘सिटिंग फीस’ के हकदार हैं अध्यक्ष और डायरेक्टर

​सरकार द्वारा सदन की मेज दिए गए विवरण के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग केंद्रीय सहकारी बैंकों में निर्वाचित अध्यक्षों और डायरेक्टरों को केवल बोर्ड की बैठकों में शामिल होने के लिए निर्धारित ‘सिटिंग फीस’ (बैठक शुल्क) दी जाती है। कार्यालय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ राजस्थान के नियमों के मुताबिक यह सिटिंग फीस 1100 रुपए प्रति बैठक निर्धारित है। इसके अलावा इन्हें कोई मासिक वेतन या अन्य बड़े भत्ते देय नहीं हैं। जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक जैसे कुछ बैंकों में बैठक शुल्क के साथ-साथ यात्रा भत्ता (TA) भी दिया जाता रहा है

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अधिकांश बैंकों में निर्वाचित बोर्ड गायब, ‘प्रशासक’ संभाल रहे हैं कमान

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि राजस्थान के अधिकांश केंद्रीय सहकारी बैंकों में लंबे समय से निर्वाचित संचालक मंडल (बोर्ड) अस्तित्व में ही नहीं है। अलवर, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, दौसा, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, कोटा, नागौर, सीकर, श्रीगंगानगर, टोंक और उदयपुर जैसे जिलों के केंद्रीय सहकारी बैंकों में ‘प्रशासक’ (अक्सर जिला कलेक्टर या विभागीय अधिकारी) नियुक्त हैं | जबकि बांसवाड़ा, बारां, जयपुर, सीकर और जैसलमेर जैसे सीसीबी बैंकों में तो साल 2014 से ही निर्वाचित बोर्ड कार्यरत नहीं है और तब से ही प्रशासक व्यवस्था संभाल रहे हैं

 

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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