सार
बाड़मेर में सहकारिता विभाग की उप रजिस्ट्रार शोभा ने कोटड़ा पैक्स समिति का औचक निरीक्षण कर पारदर्शिता और समय पर ऋण वितरण के निर्देश दिए।
विस्तार 
बाड़मेर | जिला डेस्क | 8 अक्टूबर: |राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले में सहकारी आंदोलन को गति देने के लिए विभाग ने एक बार फिर मैदानी स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। जिले में लगभग एक दशक के लंबे अंतराल के बाद सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार द्वारा सीधे पैक्स (PACS – प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति) का निरीक्षण किए जाने का यह एक बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।ऐतिहासिक रूप से बाड़मेर जिले में सहकारी आंदोलन ने हमेशा किसानों के आर्थिक संबल में रीढ़ की हड्डी का काम किया है।
जिले के दूरदराज इलाकों में पैक्स (PACS) और लैम्प्स (LAMPS) के माध्यम से किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन फसली ऋण सुलभ करवाए जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय उदासीनता के चलते यह व्यवस्था मात्र औपचारिकता बनकर रह गई थी।वर्तमान कार्य-परिदृश्य में सरकार की मंशा सहकारिता को पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल बनाने की है। इसी कड़ी में बाड़मेर जिले में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहां अधिकारी दफ्तरों से निकलकर सीधे धरातल पर उतर रहे हैं। एक दशक बाद उप रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी का समिति तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि अब विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नब्ज टटोलने के प्रति पूरी तरह गंभीर है।इसी बदलाव की कड़ी में सहकारिता विभाग बाड़मेर की उप रजिस्ट्रार शोभा ने कल शिव तहसील की बहुउद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समिति कोटड़ा का औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने विभागीय स्तर पर चल रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की।निरीक्षण के दौरान उप रजिस्ट्रार ने समिति व्यवस्थापक गोतम शर्मा को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को समय पर ऋण वितरित किया जाए तथा बकाया ऋणों की शत-प्रतिशत वसूली का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सहकारिता का मूल उद्देश्य जरूरतमंद किसानों को राहत पहुंचाना है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान सीसीबी (CCB – केंद्रीय सहकारी बैंक) अतिरिक्त अधिशाषी अधिकारी ज्योति राठौड़ तथा निरीक्षक भूरसिंह व बनेसिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे, जिन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया।


