सार
JALORE -:-राजनीतिक संरक्षण, पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण जालोर सीसीबी की रानीवाड़ा शाखा की अधिकांश पैक्स अवधिपार/एनपीए के दलदल में धंस चुकी है। कड़ी प्रशासनिक सर्जरी के बिना सुधार असंभव है।
विस्तार

जालोर | सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट | 1 सितंबर | जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की रानीवाड़ा शाखा क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन किस हद तक दरक चुका है, इसकी बानगी ऑनलाइन डीएमआर (DMR) रिपोर्ट (वर्ष 2019 से अब तक) के आंकड़े चीख-चीखकर दे रहे हैं। पैक्स (PACS) स्तर पर वितरित अल्पकालीन फसली ऋणों की समय पर वसूली न होने के कारण यहां वित्तीय संकट इस कदर गहरा गया है कि कुल 2,819 खातों पर लगभग 11.97 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अवधिपार (Overdue) और एनपीए बकाया दर्ज हो चुका है। हालांकि सीसीबी प्रबंध निदेशक नारायण सिंह चारण ने नई एसओपी के तहत सुभाषचन्द्र को नया वसूली प्रभारी अधिकारी नियुक्त कर सघन फील्ड मॉनिटरिंग और साप्ताहिक समीक्षा के कड़े निर्देश दिए हैं, लेकिन महकमे के भीतर जड़ जमा चुकी प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण की दीमक इस पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर रही है।
स्वायत्तता का ढोंग और कैडर अनुभाग की ‘मलाईदार’ कार्यशैली
एक तरफ जहां बैंक एमडी कागजी और प्रशासनिक सख्ती के दावों के साथ 14-बिंदु वसूली रजिस्टर और साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के फरमान जारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीसीबी का कैडर अनुभाग अपने चहेतों को उपकृत करने में व्यस्त है।तथ्य यह है कि भाटीप, रोपसी और सूरजवाड़ा जैसी समितियां नवीन गठित पैक्स हैं, इसके बावजूद प्रशासनिक अराजकता देखिए कि सर्वाधिक अवधिपार और वित्तीय कुप्रबंधन के बोझ तले दबी करवाड़ा और गांग समिति का चार्ज एक ही व्यवस्थापक को नियम-विरुद्ध तरीके से थमा रखा है।यही नहीं, कुड़ा, सूरजवाड़ा, रोपसी, आलड़ी, करड़ा और भाटीप जैसी समितियों में कार्मिक चयन मे नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। सत्तारूढ़ संरक्षण और सीसीबी में ‘मलाईदार मवे’ (लाभ के पदों) की हवस पालने वाले कैडर अनुभाग ने पिछले कुछ सालों से अंधाधुंध अतिरिक्त कार्यभार देने की ऐसी तोड़फोड़ नीतियां बना रखी हैं, जिनका नतीजा यह है कि समितियों का एनपीए ग्राफ आसमान छू रहा है और डिफॉल्टरों के हौसले बुलंद हैं।
रानीवाड़ा शाखा: समितियों का पैक्स-वार बकाया विवरण
ऑनलाइन डीएमआर रिपोर्ट के अनुसार, रानीवाड़ा शाखा के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम सेवा सहकारी समितियों के बकाया खातों और राशियों का सच निम्नलिखित है:
- करवाड़ा समिति: 572 खातों पर सर्वाधिक लगभग 2 करोङ 29 लाख रुपये का अवधिपार बकाया।
- करङा समिति: 406 खातों पर लगभग 1.89 करोड़ रुपये का बकाया।
- कुडा समिति: 318 खातों पर लगभग 1.35 करोड़ रुपये का बकाया।
- वणधर समिति: 256 खातों पर लगभग 1.31 करोड़ रुपये का बकाया।
- मोखातरा समिति: 213 खातों पर लगभग 90.73 लाख रुपये का बकाया।
- भाटीप समिति: 157 खातों पर लगभग 72.09 लाख रुपये का बकाया।
- गांग समिति: 152 खातों पर लगभग 70.89 लाख रुपये का बकाया।
- रानीवाड़ा कलां समिति: 137 खातों पर लगभग 60.76 लाख रुपये का बकाया।
- मेङा समिति: 151 खातों पर लगभग 54.25 लाख रुपये का बकाया।
- आलङी समिति: 136 खातों पर लगभग 43.21 लाख रुपये का बकाया।
- रोपसी समिति: 97 खातों पर लगभग 35.90 लाख रुपये का बकाया।
- कल्याण मालवाङा समिति: 51 खातों पर लगभग 23.98 लाख रुपये का बकाया।
- आजोदर समिति: 51 खातों पर लगभग 18.73 लाख रुपये का बकाया।
- रतनपुर समिति: 40 खातों पर लगभग 16.70 लाख रुपये का बकाया।
- सूरजवाङा समिति: 8 खातों पर लगभग 1.86 लाख रुपये का बकाया।
(नोट: यह पैक्स स्तर का आंकड़ा अत्यधिक बड़ा प्रदर्शित है, जो क्षेत्र की सबसे गंभीर वित्तीय स्थिति को रेखांकित करता है)
इतिहास बनाम वर्तमान: कड़े फैसलों का अकाल
सहकारिता महकमे में आज भी उस दौर की मिसाल दी जाती है, जब जोधपुर खंड में अतिरिक्त रजिस्ट्रार के पद पर सहकारिता सेवा के वरिष्ठ अधिकारी धनसिंह देवल तैनात हुआ करते थे। वे सहकारी आंदोलन को समर्पित, कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदारी की मिसाल थे। उनके सेवाकाल में मुख्य फोकस बकाया वसूली पर केंद्रित रहता था। उनकी सख्त कार्यशैली का ही असर था कि जालोर सीसीबी (केंद्रीय सहकारी बैंक) के तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी मोहम्मद हारून ने एक साथ दस लापरवाह व्यवस्थापकों को निलंबित कर पूरे महकमे में एक कड़ा संदेश दिया था।इसके विपरीत, वर्तमान कार्य-परिदृश्य यह है कि महकमे की कथित ‘स्वायत्तता’ केवल कागजी और खानापूर्ति वाली विभागीय जांचों तक सिमटकर रह गई है। जहा धानोल, मालवाड़ा, मोखातरा और रतनपुर को छोड़कर अधिकांश समितियों का संचालन रानीवाड़ा शाखा मुख्यालय के इर्द-गिर्द होने से सुदूर ग्रामीण किसानों तक मॉनिटरिंग का अभाव है—और मिलीभगत के इस खेल ने संस्था के अहित की सारी हदें पार कर दी हैं।यदि उच्च स्तर पर इन चहेते व्यवस्थापकों और कैडर अनुभाग की साठगांठ पर प्रशासनिक सर्जरी नहीं की गई, तो यह 12 करोड़ के अलावा पूरे जिले का करीब 100 करोड़ का बकाया अवधिपार (ओवरड्यू) और एनपीए (NPA) का वित्तीय दलदल पूरे बैंक को रसातल में पहुँचाने में देर नहीं लगाएगा।


