Home राज्य राजस्थान विधानसभा में खुलासा: जोधपुर संभाग की जीएसएस में 2018 तक हुई थी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग, अब नए नियमों के तहत होगी सीधी भर्ती

विधानसभा में खुलासा: जोधपुर संभाग की जीएसएस में 2018 तक हुई थी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग, अब नए नियमों के तहत होगी सीधी भर्ती

सहकारिता विभाग का स्पष्टीकरण: जोधपुर संभाग में पूरी पारदर्शिता से हुआ था नियमितीकरण, फिलहाल स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर लगी है रोक

भोपालगढ़ विधायक के सवाल पर सहकारिता विभाग का जवाब: नियमों की पालना के साथ हुए था नियमितीकरण, किसी जांच की जरूरत नहीं

जयपुर / जोधपुर: |सभाग ङेस्क 19 अगस्त |जोधपुर संभाग की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कर्मचारियों के नियमितीकरण और स्क्रीनिंग चयन प्रक्रिया को लेकर राजस्थान विधानसभा में सहकारिता विभाग से जुड़े एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की गई है। विधायक श्रीमती गीता बरवड़  द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में विभाग ने बताया कि जोधपुर संभाग में कर्मचारियों के नियमितीकरण हेतु गठित जिला स्तरीय स्क्रीनिंग चयन समिति द्वारा पूरी पारदर्शिता बरती गई थी, लेकिन वर्तमान में यह स्क्रीनिंग प्रक्रिया बंद यानी इस पर रोक लगी हुई है।​विधानसभा में दिए गए जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि जोधपुर संभाग के तत्कालीन जिलों (जोधपुर, जालोर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर और सिरोही) की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में वर्ष 2018 तक स्क्रीनिंग प्रक्रिया के जरिए कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया था। विभाग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित शर्तों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की गई थी और अधिकारियों के स्तर पर नियमों में कोई शिथिलता नहीं दी गई है।

नियमों की पालना और उल्लंघन से इनकार

विधायक द्वारा यह सवाल उठाया गया था कि क्या जोधपुर जिले में सदस्यता अभियान के दौरान राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 की धारा 12 और 13 की पालना नहीं की गई और क्या इनकी अवहेलना कर समितियों का गठन किया गया? इस पर विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि जिले में अभियान के दौरान अधिनियम की सुसंगत धाराओं की पूर्ण पालना हुई है और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।

जिलेवार स्क्रीनिंग और नियमितीकरण का ब्यौरा

सदन की मेज पर रखे गए लिखित जवाब विवरण के अनुसार, वर्ष 2018 तक स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न जिलों की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जीएसएस) में इस प्रकार कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया था:
  • सिरोही जिला: वर्ष 2010 में 21 व्यवस्थापक व 8 सह-व्यवस्थापक और वर्ष 2013 में 7 व्यवस्थापक व 14 सह-व्यवस्थापकों का नियमितीकरण हुआ।
  • ​जोधपुर जिला: वर्ष 2010 में 19 और वर्ष 2011 में 22 कर्मचारियों का स्क्रीनिंग के जरिए नियमितीकरण किया गया।
  • ​जैसलमेर जिला: वर्ष 2018 में 16 व्यवस्थापक और 36 सह-व्यवस्थापकों को नियमित किया गया, जबकि इससे पूर्व के सभी व्यवस्थापक कैडर ऑथोरिटी के माध्यम से लगे थे जो वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
  • ​पाली जिला: वर्ष 2010 में 75 तथा वर्ष 2013 में 118 कर्मचारियों का स्क्रीनिंग के माध्यम से नियमितीकरण किया गया।
  • ​बाड़मेर जिला: वर्ष 2010 में 30 व्यवस्थापक व 56 सह-व्यवस्थापक, वर्ष 2012 में 10 व्यवस्थापक व 24 सह-व्यवस्थापक, वर्ष 2014 में 23 व्यवस्थापक व 25 सह-व्यवस्थापक तथा वर्ष 2016 में 11 व्यवस्थापक व 10 सह-व्यवस्थापकों को नियमित किया गया।
  • ​जालौर जिला: वर्ष 2010 में 20 व्यवस्थापक व 16 सह-व्यवस्थापक तथा वर्ष 2018 में 29 व्यवस्थापक व 17 सह-व्यवस्थापकों का नियमितीकरण किया गया।

वर्तमान में स्क्रीनिंग पर रोक और नई भर्ती का प्रावधान

विभाग ने जानकारी दी कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए गठित जिला स्तरीय स्क्रीनिंग चयन समिति द्वारा पूरी पारदर्शिता बरती गई थी, लेकिन वर्तमान में इस स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ग्राम सेवा सहकारी समितियों में रिक्त पदों की अभ्यर्थना प्राप्त होने पर अब सहकारी भर्ती बोर्ड के माध्यम से सीधी भर्ती किए जाने का प्रावधान है, और फिलहाल अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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