| 58 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में से 25 समितियों में व्यवस्थापक नही होने से समितियों में अधिकांश समय ताला लगा रहता है। किसानों को समिति स्तर पर न तो जीएसएस काउंटर का लाभ मिल रहा है और ना ही ई-मित्र सेवाओं का। समय पर खाद बीज के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। |

जालोर । डिजिटल डेस्क I 8 अक्टूबर I राजस्थान सरकार के राज्य श्रम मंत्री सुखराम विश्नोई के विधानसभा क्षेत्र सांचौर की पुरानी और नई सहकारी समितियों में पिछले कई सालों से व्यवस्थापक के पद रिक्त चल रहे हैं। केन्द्रीय सहकारी बैंक की सांचौर, अरणाय, चितलवाना शाखा कार्यक्षेत्र में 58 ग्राम सेवा सहकारी समितियां में से 33 समितियों में ही व्यवस्थापक कार्यरत हैं। ऐसे में 25 सहकारी समितियां अतिरिक्त चार्ज के भरोसे संचालित हो रही हैं। जबकि सांचौर विधानसभा क्षेत्र की इन समितियों में करीबन 10 हजार से ज्यादा किसान ऋणी सदस्य के तौर पर जुड़े हुए है।
सहकारी साख आंदोलन से जुड़े सुत्रो का कहना है कि नई बनाई गई समितियों का काम भी पास की जीएसएस के व्यवस्थापकों को देने से किसानों को पंचायत मुख्यालय पर जीएसएस होने के बावजुद कामकाज के लिए भटकना पड़ रहा हैं । विभाग द्वारा पद रिक्त वाली ग्राम सेवा सहकारी समिति के संचालन के लिए कार्यभार दूसरी समितियों के व्यवस्थापक को दिया जाकर संचालन किया जा रहा है। गौरतलब हैं कि टांपी व्यवस्थापक हनुमानसिंह जाट के पास चितलवाना शाखा के कार्य. ऋण पर्यवेक्षक के चार्ज के साथ-साथ सुराचंद, केरिया समितियों का अतिरिक्त कार्यभार होने से किसानों को समय पर खाद-बीज, ऋण वितरण, ऋण वसुली समयाविधी में नहीं होने के मामले भी सामने आए हैं।
सांचौर की 25 सहकारी समितियों में व्यवस्थापक नहीं होने से किसानों को हो रही हैं परेशानी
स्थायी व्यवस्थापक नहीं हैं यहां
सांचौर शाखा की नेनोल, मेड़ाजागीर, प्रतापपुरा, सुरावा, किलवा, डबाल, दांतिया, बिछावाड़ी, धमाणा, वही, चितलवाना शाखा की गुड़ाहेमा, केरिया, सुराचंद, रणोदर, काछेला, जानवी, हाडेचा, तथा अरणाय शाखा की भादरुणा, आकोली, चौरा, हरियाली, देवड़ा, जोधावास, राजीवनगर, पमाणा, मालवाड़ा ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पूर्णकालीक व्यवस्थापक नही होने से किसानों को सहकारिता विभाग की योजनाओं का समुचित लाभ नही मिल रहा हैं।
व्यवस्थापक नियुक्ति का यह था नियम
16 अगस्त 2017 से पहले ग्राम सेवा सहकारी समितियों के संचालन के लिए संचालक मंडल सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पारित कर निर्धारित योग्यता रखने वाले को समिति स्तर से ही व्यवस्थापक लगाया जाता था। हालांकि राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की नई धारा 29 (ख) के अनुसार राज्य की सहकारी सोसायटियों के कर्मचारियों की चयन व भर्ती की सिफारिश के लिए सहकारी भर्ती बोर्ड का गठन होने के पश्चात समिति में कार्मिकों की नियक्ति नहीं होने से यह समस्या उत्पन्न हो रहीं है।
6 व्यवस्थापक संभाल रहे हैं 22 समितियां
सहकारिता विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सांचौर विधानसभा क्षेत्र में कुल 58 ग्राम सेवा सहकारी समितियां संचालित हैं, लेकिन इनमें से अरणाय व्यवस्थापक के पास राजीवनगर, भादरुणा, जोधावास, वही, हाड़ेतर व्यवस्थापक के पास मेड़ा जागीर, नेनोल, डांगरा व्यवस्थापक के पास हरियाली, चौरा, बिजरोल व्यवस्थापक के पास देवड़ा, पमाणा, मालवाड़ा, एवं सरवाना व्यवस्थापक के पास दांतिया, काछेला, जानवी, हाडेचा और टांपी व्यवस्थापक के पास केरिया, सुराचंद समितियों का अतिरिक्त चार्ज हैं। खास बात यह है कि ये व्यवस्थापक इन समितियों का कैसे संचालन कर रहे हैं यह सवाल विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा हैं। सांचौर विधानसभा क्षेत्र की 58 समितियों में से करीब दर्जनभर से अधिक सहकारी समितियां तो ऐसी हैं जिनमें एक व्यवस्थापक के पास तीन से पांच सहकारी समितियों का अतिरिक्त चार्ज है। ऐसे में उन व्यवस्थापकों का प्रतिदिन सहकारी समितियों पर बैठना तक मुश्किल हो जाता है। कभी आधा घण्टे किस सहकारी समिति में तो आधे घण्टे किस समिति में जाकर काम संभालना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ समितियां तो काम का बोझ अधिक होने से पटरी से उतरती तक दिखाई दे रही हैं।


