वार्ड पंचों पर भारी सरपंचाई

  • महज उपस्थिती पंजिका में दस्तखत करने तक सीमित हुए वार्डपंच
  • अधिकाशं ग्राम पंचायतों में नहीं ली जाती राय
  • योजनाओं के बारे में भी नहीं दी जाती जानकारी
File Photo - ग्राम पंचायत किलवा
File Photo – ग्राम पंचायत किलवा

जालोर । डिजिटल डेस्क I 22 जनवरी I पंचायतीराज संस्थाओं की महत्वपूर्ण कड़ी वार्ड पंच महज नाम के ही होकर रह गए है। जिले की चितलवाना, सांचौर, सरनाऊ पंचायत समिति अंतर्गत अधिकाशं ग्राम पंचायतों में वार्ड पंचों की राय को महत्व देने की बजाय सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी ही अपनी मनमर्जी से प्रस्ताव ले रहे है। कई स्थानों पर तो ग्राम पंचायत की ओर से संचालित योजनाओं की पंचों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही हैं । हालांकि उच्च स्तर पर ऐसा आदेश है, मगर ग्राम पंचायतों के लिए इसका मायना नहीं है। इससे पंचायतीराज का सबसे निचला जनप्रतिनिधि अपने अधिकारों का संरक्षण नहीं कर पा रहा हैं ।

रजिस्टर में दस्तखत करने तक ही सीमित

विकास कार्या में कभी भी ग्राम पंचायत पंचो को विश्वास में नहीं लेती । पंचों को न तो बैठकों की सूचना दी जाती है और न बैठकों में होने वाली कार्रवाई की जानकारी दी जाती । इससे वार्ड पंच केवल खाली कागजों एवं खाली हस्ताक्षर करने से इंकार करने पर उसे अनुपस्थित दिखा दिया जाता है। इस डर से वार्ड पंचों को रजिस्टर में हस्ताक्षर करना पड़ता है।

अधिकार तो है, मगर अनुपयोगी

वार्डपंच ग्राम पंचायत का सदस्य होता है। वह प्रत्येक बैठक में भाग लेकर अपने विचार रख सकता है। अपने वार्ड में हो रहे विकास कार्य की गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी होता है। इसके अलावा वार्डपंच ग्राम पंचायत स्तर पर गठित करीब एक दर्जन विभिन्न समितियां का सदस्य भी होता है। जबकि यहां सब कुछ उल्टा है। अधिकाशं वार्डपंचों को जानकारी ही नहीं कि वह किसी समिति का सदस्य या अध्यक्ष भी है।

मात्र बैठक का ही मिलता है मानदेय

ग्राम पंचायत की सबसे निचली कड़ी को राज्य सरकार कोई मानदेय नहीं देती । हालांकि ग्राम पंचायत की बैठकों के लिए प्रति बैठक 200 रुपए बैठक भत्ता के रुप में वार्डपंचों को मिलता है। कई वार्ड पंच तो बैठकों में आने के बावजूद मानदेय भी नहीं लेते है।

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