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‘नो वर्क नो पे’ नोटिस पर घमासान, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघर्ष समिति ने संभाला मोर्चा

सार 

Jaipur : सहकारी संघर्ष समिति ने विभाग के ‘नो वर्क नो पे’ नोटिस का विरोध करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है। समिति ने लंबित वेतन और रिक्त पदों का हवाला देकर कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी…!

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विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 11 अप्रैल | राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर द्वारा प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कार्मिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक सूचना जारी की है, जो वर्तमान में विभाग द्वारा दिए गए ‘नो वर्क नो पे’ के नोटिस की समस्या पर केंद्रित है। राजस्थान के सहकारिता विभाग द्वारा हाल ही में एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें कार्य में सहयोग नहीं कर रहे व्यवस्थापकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और उनके विरुद्ध ‘नो वर्क नो पे’ के कड़े निर्देश दिए गए थे । इस नीति के जवाब में संघर्ष समिति ने प्रदेश के समस्त व्यवस्थापकों और कार्मिकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि उन्हें विभाग के इन नोटिसों से घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि समिति प्रशासनिक और विधिक दोनों स्तरों पर उनके पक्ष को मजबूती से रखने के लिए पूरी तरह तैयार है ।

संघर्ष समिति ने कार्मिकों को मार्गदर्शित करते हुए सलाह दी है कि जिन व्यवस्थापकों को ये नोटिस प्राप्त हुए हैं, वे तत्काल प्रभाव से अपनी संबंधित समिति के संचालक मंडल की बैठक बुलाएं और एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करवाकर विभाग को विधिवत जवाब प्रेषित करें ।

समिति के अनुसार, राज्य के 13 केंद्रीय सहकारी बैंकों के अंतर्गत आने वाली 1117 समितियों में कार्यरत लगभग 1483 कार्मिकों को लंबे समय से वेतन प्राप्त नहीं हुआ है । कई क्षेत्रों में तो स्थिति इतनी विकट है कि पिछले दो वर्षों से वेतन लंबित पड़ा है । इसके अतिरिक्त, प्रदेश की 8,000 समितियों में व्यवस्थापकों के 4,017 पद रिक्त होने के कारण वर्तमान में कार्यरत कार्मिक दोहरी संस्थाओं का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं ।संघर्ष समिति का तर्क है कि सहकारिता विभाग द्वारा लागू किया जा रहा ‘नो वर्क नो पे’ का सिद्धांत वर्तमान विषम परिस्थितियों में किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है ।

‘नो वर्क नो पे’ के जवाब में ‘नो पे, नो सर्वाइवल’

समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कार्मिकों द्वारा किया जा रहा कार्य बहिष्कार ‘कार्य की अनिच्छा’ के कारण नहीं है, बल्कि ‘वेतन के अभाव में उत्पन्न जीवन निर्वाह के संकट’ का सीधा परिणाम है । इसलिए विभाग को ‘नो वर्क नो पे’ लागू करने से पहले ‘नो पे, नो सर्वाइवल’ की उस वास्तविक स्थिति पर विचार करना चाहिए जिसमें प्रदेश के कार्मिक वर्तमान में जी रहे हैं, और उन्हें लंबित वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए । संघर्ष समिति ने ‘नो वर्क नो पे’ की इस दोषपूर्ण व्याख्या का कड़ा विरोध किया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे अंतिम विकल्प के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण लेंगे । समिति के संयोजकों हनुमान सिंह राजावत, मदन मेनारिया और कुलदीप जंगम सहित अन्य सदस्यों ने सभी कार्मिकों को एकजुट रहने और विचलित न होने का संदेश दिया है ।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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