सार
Jaipur : सहकारिता विभाग वर्ष 2022 की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर लगे कोर्ट के स्थगन (स्टे) को हटवाने के लिए सख्त…. इसके लिए प्रभारी अधिकारियों को 30 जून 2026 तक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम चेतावनी दी…

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 24 जून | प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में वर्ष 2022 के दौरान व्यवस्थापकों और सहायक व्यवस्थापकों की कथित विवादास्पद स्क्रीनिंग का ‘जिन्न’ एक बार फिर बाहर आ गया है। इस स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से हुए नियमितिकरण पर मची रार अब अपने चरम पर पहुंच गई है, जिसके बाद सहकारिता विभाग गड़बड़ियों की जांच का रास्ता साफ करने के लिए कोर्ट की शरण में पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि यह पूरी स्क्रीनिंग प्रक्रिया जुलाई 2022 में सहकारिता विभाग पंजीयक के उस आदेश के बाद शुरू हुई थी, जिसके तहत 10 जुलाई 2017 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को स्थाई किया जाना था। लेकिन दिसंबर 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद, साल 2024 के शुरुआती महीनों में इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे, जिसके बाद विभाग ने मई 2024 में राज्यभर में इस स्क्रीनिंग की गहन जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया था।
जैसे ही जिला स्तरीय स्क्रीनिंग चयन कमेटी के माध्यम से कथित अपात्रों के चयन के मामले में विभागीय जांच शुरू हुई, वैसे ही राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ ने न्यायालय की शरण लेकर इस पूरी प्रक्रिया पर स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त कर लिया था। अब इस स्थगन को हटवाने के लिए विभागीय गलियारों में मची दौड़-धूप ने यह साफ कर दिया है कि विभाग किसी भी कीमत पर पुरानी अनियमितताओं की परतें उधेड़ने को तैयार है। हालांकि, सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय की ओर से हाल ही में जारी कड़े आदेश ने विभाग की अपनी ही ढीली कार्यप्रणाली को उजागर किया है। आदेश में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि राजस्थान न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश को खारिज करवाने के लिए बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रभारी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, जिसे विभाग ने अत्यंत खेदजनक माना है।
शासन सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में सहकारिता विभाग शासन सचिव के सख्त तेवरों के बाद अब विभाग पूरी तरह एक्शन में आ गया है। संयुक्त रजिस्ट्रार (विधि) ने प्रभारी अधिकारी को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि वे 30 जून 2026 से पहले राजकीय अधिवक्ता से संपर्क कर संविधान के अनुच्छेद 226 (3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें, ताकि कोर्ट से मिले स्थगन को अपास्त (खारिज) करवाया जा सके। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में यह कार्यवाही नहीं की गई, तो संबंधित प्रभारी अधिकारी के विरुद्ध सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में ‘स्टेट ऑफ राजस्थान बनाम राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ’ के मामले में भी सुनवाई जारी है, जहां मई 2026 में हुई पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक मजबूत शपथ-पत्र पेश करने की बात कही गई थी। ऐसे में अब देखना यह होगा कि क्या विभाग की यह तात्कालिक सक्रियता इन विवादित नियुक्तियों की सच्चाई सामने ला पाएगी।


