Home जयपुर डिफॉल्टर होने की कगार पर 7.50 लाख अन्नदाता : क्या सरकार देगी 3 महीने की राहत?

डिफॉल्टर होने की कगार पर 7.50 लाख अन्नदाता : क्या सरकार देगी 3 महीने की राहत?

सार 

Jaipur : सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने खरीफ 2025 फसली ऋणों की वसूली तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून करने की मांग की है, ताकि 7.50 लाख किसानों को डिफॉल्टर होने से बचाया जा सके।

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 27 मार्च | प्रदेश में खरीफ 2025 के तहत करीब 12,750 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया था, जिसमें से अभी भी 3,035 करोड़ रुपये की वसूली बकाया है। दरअसल, खरीफ 2025 के फसली ऋणों का चुकारा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 है, यदि समय रहते यह वसूली तिथि नहीं बढ़ाई जाती है, तो प्रदेश के लगभग 7.50 लाख किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में ये किसान ’अवधिपार’ और ’डिफॉल्टर’ की श्रेणी में आ जाएंगे। इसका सबसे घातक परिणाम यह होगा कि जो राज्य सरकार की ब्याज मुक्त योजना के तहत ऋण अभी ’शून्य ब्याज दर’ पर मिल रहा है, उस पर तत्काल 9 प्रतिशत की दर से ब्याज लगना शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, डिफॉल्टर होने के कारण ये किसान अगले फसल चक्र में नया ऋण लेने के लिए भी अपात्र हो जाएंगे, जिससे उनकी खेती-बाड़ी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है । इस स्थिती को मध्यनजर रखते हुए ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि खरीफ 2025 के फसली ऋणों को चुकाने की अंतिम तिथि को 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 30 जून 2026 किया जाए। उन्होने सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक सहित सहकारिता विभाग शासन सचिव और पंजीयक को पत्र लिखकर आगाह किया है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश का ‘पैक्स से अपैक्स’ तक का पूरा सहकारी ढांचा चरमरा सकता है।

हड़ताल और भौगोलिक परिस्थितियां बनीं वसूली में बाधा

सहकार नेता आमेरा ने वसूली कार्य प्रभावित होने के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं। उनके मुताबिक पिछले एक महीने से पैक्स व्यवस्थापकों की हड़ताल और उनके द्वारा वसूली कार्य के बहिष्कार के कारण जमीनी स्तर पर काम बाधित हुआ है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जोधपुर और जैसलमेर जैसे जिलों में केवल एक ही फसल चक्र होने के कारण भी किसान समय पर पैसा जमा नहीं करा पा रहे हैं। वर्तमान में बैंक शाखाओं में भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ रही है; सहकार नेता ने बताया कि हाल ही में जोधपुर की सोजती गेट शाखा में भीड़ का फायदा उठाकर एक किसान की 50 हजार रुपए की जेब कटने की घटना भी सामने आई है।

केंद्रीय सहकारी बैंकों की डगमगाती वित्तीय स्थिति

सहकार नेता आमेरा ने अपने पत्र में रेखांकित किया है कि राज्य के 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पहले से ही गहरे वित्तीय संकट में हैं। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत लंबित क्लेम राशि, जिसमें ब्याज माफी और अनुदान शामिल है, लगभग 1,525.67 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। फंड की कमी के कारण नाबार्ड ने कई बैंकों की पुनर्वित्त सुविधा भी बंद कर दी है। ऐसे में यदि खरीफ ऋणों की वसूली नहीं हुई, तो सीसीबी बैंकों का घाटा और बढ़ जाएगा, जिससे प्रदेश की सहकारी साख व्यवस्था पूरी तरह संकटपूर्ण स्थिति में आ जाएगी।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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