सार
बाड़मेर में सहकारिता विभाग सख्त, जून माह के आदेश के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों के भौतिक निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू।
विस्तार 
बाड़मेर| जिला ङेस्क 22 अगस्त।| जिले में सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के लिए सहकारिता विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गत जून माह में जारी आदेश के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) के अनिवार्य भौतिक निरीक्षण को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कार्यालय उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, बाड़मेर के निर्देशों के क्रम में समितियों के विस्तृत निरीक्षण की प्रक्रिया ने स्थानीय सहकारी हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है।सहकारिता विभाग के निरीक्षक ईश्वर जाखड़ ने समितियों के व्यवस्थापकों को निर्देश दिए हैं कि वे समिति मुख्यालय पर उपस्थित रहकर निर्वाचित कार्यकारिणी के साथ समस्त रिकॉर्ड प्रस्तुत करें। विभाग का स्पष्ट रुख है कि निरीक्षण प्रपत्र से जुड़ी सभी सूचनाओं और वित्तीय दस्तावेजों को पूर्ण करना व्यवस्थापक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 की धारा 55(क) के तहत प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों का नियमित रूप से निरीक्षण किए जाने का विधिक प्रावधान है।विभाग की इस कार्रवाई से जिले की कुछेक समितियों के व्यवस्थापको में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस औचक और नियमित निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर संचालित इन समितियों में कामकाज की सुचारू व्यवस्था, प्रशासनिक कसावट और किसानों से जुड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता लाना है।
इन प्रमुख दस्तावेजों और अभिलेखों की होगी गहन जांच
सहकारिता विभाग ने निरीक्षण के लिए आवश्यक रिकॉर्ड की एक विस्तृत सूची तैयार की है, जिसके तहत निम्नलिखित दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी:
-
व्यवस्थापक एवं सहायक व्यवस्थापक की नियुक्ति और वेतन से जुड़ी फाइलें।
-
समिति की स्थायी संपत्ति के निर्माण, उसके रख-रखाव और उससे होने वाली आय की पत्रावलियां।
-
किसानों के हितों से जुड़े ऋण वितरण का भौतिक सत्यापन, बीमा प्रक्रिया और हिस्सा राशि का मिलान।
-
संस्था के पास उपलब्ध स्टॉक, स्टेशनरी और कार्यालयीन यात्राओं का भौतिक सत्यापन।
-
व्यवस्थापक की उपस्थिति पंजिका, यात्रा विवरण तथा कार्यालय के समय पर खुलने व बंद होने का रिकॉर्ड।
प्रशिक्षित निरीक्षकों द्वारा होती है सूक्ष्म पड़ताल
राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 की धारा 55(क) के प्रावधानों के अंतर्गत समितियों की वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए विभाग के निरीक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। निरीक्षकों को यह तकनीकी व व्यावहारिक प्रशिक्षण राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबंधन संस्थान (राइसेम) द्वारा प्रदान किया जाता है, ताकि वे समितियों की वित्तीय पत्रावलियों और लेखा-जोखा की सूक्ष्मता से जांच कर सकें।


