सार
राजस्थान की शीर्ष सहकारी संस्थाओं (RSCB व RSLDB) ने वर्ष 2025-26 के लिए अधिकतम ₹12,500 बोनस/एक्सग्रेशिया (Ex-gratia) देने के आदेश दिए हैं। हालांकि, शुद्ध लाभ (Net Profit), लाभांश कैपिंग (Capping) और कर्मचारियों से अंडरटेकिंग (Undertaking) जैसी वित्तीय शर्तों के कारण निचले स्तर की घाटे वाली संस्थाओं के कर्मचारियों को पूरा लाभ मिलने पर संशय बना हुआ है।
विस्तार

जयपुर/जालौर | प्रदेश डेस्क रिपोर्ट्स 5 नवम्बर|राज्य की सहकारी संस्थाओं में त्योहारों के सीजन में कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलने वाले बोनस व एक्सग्रेशिया (Ex-gratia) को लेकर विभाग के नियम और शीर्ष संस्थाओं के आदेश एक बार फिर चर्चा में हैं। राजस्थान स्टेट को ऑपरेटिव बैंक लि. (RSCB) तथा राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लि. (RSLDB) ने वर्ष 2025-26 के लिए अपने कर्मचारियों को अधिकतम ₹12,500 बोनस/एक्सग्रेशिया देने के आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि, रजिस्ट्रार (Registrar) कार्यालय के मूल परिपत्रों और संशोधित आदेशों के सूक्ष्म विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सहकारी क्षेत्र में बोनस का वितरण केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संस्थाओं के लाभ और कड़े वित्तीय मानदण्डों पर टिका हुआ है।
सहकारिता विभाग द्वारा राजस्थान सहकारी सोसाइटी नियम, 2003 के नियम 39 के तहत 15 अक्टूबर 2008 को जारी मूल परिपत्र में बोनस और उपहार वितरण की व्यवस्था तय की गई थी। उस समय अधिकतम सीमा ₹8,400 निर्धारित थी। बाद में 26 अक्टूबर 2016 को डॉ. रेखा गुप्ता (तत्कालीन रजिस्ट्रार) के कार्यकाल में इसमें संशोधन कर अधिकतम राशि ₹11,000 की गई। इसके बाद 29 अक्टूबर 2021 को मुक्तानन्द अग्रवाल (तत्कालीन रजिस्ट्रार) द्वारा जारी संशोधन आदेश के तहत यह कैपिंग (Capping) बढ़ाकर ₹12,500 की गई, जो वर्तमान में भी लागू है।
हाल ही में 4 नवंबर 2026 को दि राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लि. के प्रबंध निदेशक (Managing Director) रणजीत सिंह चूंडावत द्वारा प्रशासकीय प्रस्ताव संख्या 01 के अनुसरण में आदेश जारी किया गया। इसके तहत बोनस अधिनियम (Bonus Act) के तहत पात्र कार्मिकों को 20 प्रतिशत (अधिकतम ₹12,500) बोनस तथा अपात्र या कम राशि पाने वाले कार्मिकों को अंतर राशि एक्सग्रेशिया (Ex-gratia) के रूप में देने की स्वीकृति दी गई है। इसी क्रम में 29 अक्टूबर 2026 को राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लि. की महाप्रबंधक (General Manager) उषा कपूर सतसंगी द्वारा भी वर्ष 2025-26 के लिए प्रशासनिक प्रस्ताव संख्यात्मक के आधार पर अधिकतम ₹12,500 के बोनस/उपहार वितरण के आदेश जारी किए गए हैं।विभाग के नियमों के अनुसार, बोनस या एक्सग्रेशिया का भुगतान उन्हीं कार्मिकों को देय होता है जिन्होंने आलोच्य वर्ष में न्यूनतम 90 दिवस कार्य किया हो। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शीर्ष संस्थाएं जहां आसानी से ₹12,500 की अधिकतम सीमा पर भुगतान कर देती हैं, वहीं प्राथमिक और मध्यवर्ती स्तर की कई संस्थाएं बजट (Budget) और लाभांश (Dividend) प्रावधानों के अभाव में कार्मिकों को पूरा लाभ देने से वंचित रह जाती हैं।
लाभ और लाभांश की शर्त: 30 फीसदी के दायरे में ही संभव है एक्सग्रेशिया का गणित

सहकारिता विभाग के 15 अक्टूबर 2008 के मूल आदेश के बिन्दु संख्या 2 और 6 में स्पष्ट प्रावधान है कि जो संस्थाएं या कार्मिक बोनस अधिनियम के सीधे क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं, उन्हें एक्सग्रेशिया या उपहार का भुगतान केवल शुद्ध लाभ (Net Profit) में से ही किया जा सकता है। नियम 39 के तहत संस्था द्वारा संबंधित वर्ष के शुद्ध लाभ में से लाभांश वितरण तथा अधिनियम व उपविधियों के तहत गठित आवश्यक निधियों में अंशदान (विनिधान) करने के बाद बचे ‘वितरण योग्य लाभ’ (Distributable Profit) से ही यह राशि दी जा सकती है।इसके अलावा, नियम में यह स्पष्ट पाबंदी है कि संस्था द्वारा सदस्यों को वितरित किए गए कुल लाभांश की राशि के 30 प्रतिशत से अधिक राशि कर्मचारियों को एक्सग्रेशिया या बोनस के रूप में नहीं दी जा सकती। साथ ही, सदस्यों को लाभांश का भुगतान या उसके लिए समुचित बजट प्रावधान करने के बाद ही कर्मचारियों के एक्सग्रेशिया का रास्ता साफ होता है। यही कारण है कि घाटे में चल रही या कम लाभ कमाने वाली सहकारी समितियां अक्सर अपने कर्मचारियों को पूरा बोनस देने में असमर्थ रहते हैं।शीर्ष बैंकों द्वारा जारी ताजा आदेशों में विशेष बात यह है कि राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लि. ने अपने ताजा आदेश मे एक शर्त जोड़ी है। इसके तहत कर्मचारियों से ‘अंडरटेकिंग’ (Undertaking) (वचन पत्र) लिया जा रहा है। यदि भविष्य में रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा बोनस या एक्सग्रेशिया के नियमों में कोई संशोधन या परिवर्तन किया जाता है, या वितरण में कोई आपत्ति सामने आती है, तो अंतर राशि की वसूली संबंधित कर्मचारी से की जा सकेगी। इससे स्पष्ट है कि शीर्ष प्रबंधन भी प्रशासनिक संशोधनों को लेकर सतर्कता बरत रहा है।


