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सहकारिता में मिसाल: प्रदेश में घाटे और एनपीए की मार, मारवाड़ में जोधपुर सीसीबी ने घोषित किया लाभांश

सारांश:

जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक ने मजबूत वित्तीय प्रबंधन और अनुशासित ऋण वसूली के बल पर 2025-26 के लिए 2% लाभांश वितरण की घोषणा की है। बैंक के 209.47 लाख रुपये के शुद्ध लाभ से पृथक फलोदी जिले में नया केंद्रीय सहकारी बैंक खोलने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
विस्तृत:

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जोधपुर/जयपुर | सहकारी जगत की ग्राउंड रिपोर्ट 27 अक्टूबर:|प्रदेश के सहकारी आंदोलन में जहाँ एक ओर अधिकांश केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ ( Primary Agricultural Credit Societies ) करोड़ों रुपये के वित्तीय असंतुलन, अवधिपार (ओवरड्यू – Overdue) ऋणों और बढ़ते एन.पी.ए. (Non-Performing Assets) के गंभीर संकट से जूझ रही हैं, वहीं मारवाड़ अंचल से सहकारिता जगत के लिए एक बेहद सुकून देने वाली और प्रेरणादायी खबर सामने आई है। मारवाड़ क्षेत्र में संचालित 6 केंद्रीय सहकारी बैंकों के बीच जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (Jodhpur Central Cooperative Bank Limited) ने वित्तीय वर्ष की आयोजित वार्षिक साधारण सभा के दौरान अपनी मजबूत प्रबंधकीय क्षमता, पारदर्शी कार्यप्रणाली, समयबद्ध ऋण वसूली और पैक्स से जुड़े अंशधारकों के सहयोग की बदौलत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लाभांश (Dividend) वितरण की घोषणा की है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब सहकारिता का त्रि-स्तरीय ढांचा वित्तीय मोर्चे पर तमाम ढांचागत चुनौतियों का सामना कर रहा है।विभागीय स्तर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयकर प्रावधान (Income Tax Provision) के पश्चात जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक का शुद्ध लाभ (Net Profit) 209.47 लाख रुपये तथा कुल संग्रहित लाभ (Accumulated Profit) बढ़कर 2208.90 लाख (लगभग 22.08 करोड़) रुपये हो गया है।

जोधपुर सीसीबी की वित्तीय मजबूती का असर: पृथक फलोदी जिले में नया केंद्रीय सहकारी बैंक खोलने का रास्ता साफ

प्रदेश के सहकारिता परिदृश्य में जहाँ वित्तीय असंतुलन के कारण नए संस्थानों के गठन पर रोक जैसी स्थिति बनी रहती है, वहीं जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक की मजबूत वित्तीय सेहत ने एक नए जिले में सहकारिता के विस्तार की राह आसान कर दी है। अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग) सहकारिता विभाग जयपुर को प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट (Survey Report) और प्रस्ताव के अनुसार, जोधपुर सीसीबी की वित्तीय सुदृढ़ता के आधार पर अब पृथक फलोदी जिले में एक स्वतंत्र केंद्रीय सहकारी बैंक की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्तमान में जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक के अंतर्गत कुल 308 पैक्स और 18 शाखाएँ (Branches) कार्यरत हैं, जिनमें से अकेले फलोदी जिले के क्षेत्र में 102 पैक्स और 5 शाखाएँ आती हैं।फलोदी जिले के अंतर्गत कार्यरत इन समितियों की कुल हिस्सा राशि (Share Capital) 1749.23 लाख रुपये है। वर्ष 2023-24 के दौरान फलोदी क्षेत्र में अल्पकालीन फसली ऋण (Short-term Crop Loan) के रूप में 15240.50 लाख, मध्यकालीन ऋण (Medium-term Loan) के रूप में 52.10 लाख तथा दीर्घकालीन ऋण (Long-term Loan) के रूप में 504.88 लाख रुपये का कुल ऋण वितरण किया गया था, जबकि इसी अवधि में 12296.19 लाख रुपये की कुल अमानतें (जमा राशि – Total Deposits) दर्ज की गईं। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्ष 2023-24 में फलोदी क्षेत्र की सभी 5 शाखाएँ मुनाफे में रहीं और इन शाखाओं का कुल शुद्ध लाभ 296.27 लाख रुपये रहा।सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, जोधपुर बैंक से आनुपातिक रूप से 1749.23 लाख रुपये की शेयर कैपिटल और 1908.19 लाख रुपये की संचयी लागत नवगठित फलोदी बैंक को स्थानांतरित की जा सकती है। सहकारिता विभाग की अनुशंसा के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा फलोदी बैंक को 500.00 लाख रुपये की राजकीय हिस्सा राशि (State Share Capital) उपलब्ध करवाई जाएगी तथा मुख्यालय हेतु निःशुल्क भूमि व भवन निर्माण, फर्नीचर व कंप्यूटर उपकरणों के लिए 350.00 लाख रुपये की सहायता (Non-Refundable Grant-in-aid) स्वीकृत  की इस तैयारी से स्पष्ट है कि जोधपुर सीसीबी एक नए स्वतंत्र बैंक को आत्मनिर्भर बनाने में पूरी तरह सक्षम है।

बैंक की इस वित्तीय सुदृढ़ता के पीछे पैक्स स्तर पर समयबद्ध ऋण वितरण और अंशधारकों द्वारा मूलधन व ब्याज की नियमित वसूली का बड़ा योगदान रहा है। बैंक के उपनियमानुसार इस वर्ष अर्जित लाभ से आरक्षित निधि (Reserve Fund) में न्यूनतम 25 प्रतिशत, शिक्षा एवं विकास कोष (Education and Development Fund) में 1 प्रतिशत तथा टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड (Technology Adoption Fund) में 10 प्रतिशत राशि सुरक्षित रखने के साथ-साथ राज्य सरकार और सहकारी समितियों के अंशपूंजी (शेयर कैपिटल – Share Capital) धारकों को 2 प्रतिशत की दर से लाभांश वितरित किए जाने का अनुमोदन प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2026-27 के लिए बैंक की अधिकतम साख सीमा (क्रेडिट लिमिट – Credit Limit) भी 153630.84 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जो इसकी बढ़ती साख और वित्तीय क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।सहकारिता के त्रि-स्तरीय ढांचे में जोधपुर सीसीबी (Jodhpur CCB) की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि जमीनी स्तर पर वित्तीय अनुशासन, मजबूत मॉनिटरिंग (Monitoring) और पारदर्शी वसूली व्यवस्था अपनाई जाए, तो संकटग्रस्त संस्थानों को भी मुनाफे की पटरी पर लाया जा सकता है। इस सकारात्मक पहल ने न केवल मारवाड़ के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया विश्वास जगाया है, बल्कि सहकार आंदोलन को एक नई ऊर्जा भी प्रदान की है। बैंक की इसी वित्तीय क्षमता के आधार पर अब मारवाड़ में सहकारिता के नए विस्तार और पुनर्गठन का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

 पैक्स-लैम्प्स की अनुशासित कार्यप्रणाली और ऋण वसूली: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संवारता त्रि-स्तरीय सहकार ढांचा

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भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले सहकारिता के त्रि-स्तरीय ढांचे (राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक – Apex Bank, जिला स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक – Central Cooperative Bank, और ग्राम स्तर पर पैक्स-लैम्प्स – PACS/LAMPS) में आज जमीनी स्तर पर वित्तीय अनुशासन और कुशल प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। जहाँ एक ओर प्रदेश में मेवाड़ से लेकर मेवात और शेखावाटी के कई क्षेत्रों में पैक्स और केंद्रीय सहकारी बैंक बढ़ते एन.पी.ए. (Non-Performing Assets) और वित्तीय असंतुलन की मार झेल रहे हैं, वहीं जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक और उससे जुड़ी पैक्स समितियों ने यह साबित कर दिया है कि समयबद्ध ऋण वितरण और समय पर वसूली से व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। सहकार आंदोलन के इस सबसे पुराने और भरोसेमंद बैंकिंग माध्यम ने हमेशा से ग्रामीण अंचल और किसानों को आसान व सस्ती साख उपलब्ध कराकर स्वावलंबी बनाया है।वर्तमान परिदृश्य में पैक्स और लैम्प्स केवल उर्वरक व बीज वितरण केंद्र तक सीमित न रहकर बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों (Multi-Purpose Service Centers) के रूप में विकसित हो रहे हैं। जोधपुर सीसीबी के अंतर्गत आने वाली पैक्स समितियों ने जिस प्रकार से अपने कृषक सदस्यों के बीच ऋण वसूली और अंशपूंजी का सही प्रबंधन किया है, उसी का सुखद परिणाम है कि बैंक आज लाभांश (Dividend) घोषित करने की मजबूत स्थिति में आया है। जब ग्राम स्तर पर बकायेदारों की संख्या कम होती है और रिकवरी (Recovery) का ग्राफ सुधरता है, तो संपूर्ण त्रि-स्तरीय बैंकिंग ढांचा आर्थिक रूप से मजबूत हो जाता है।सहकारिता विशेषज्ञों का मानना है कि इस आंदोलन की वास्तविक ताकत ग्रामीण क्षेत्र की इन प्राथमिक इकाइयों में ही निहित है। यदि प्रदेश के अन्य केंद्रीय सहकारी बैंक और पैक्स समितियाँ जोधपुर सीसीबी के इस मॉडल का अनुसरण करते हुए वित्तीय पारदर्शिता, डिजिटलाइजेशन (Digitalization) और सख्त ऋण वसूली नीति को अपनाएँ, तो सहकारिता क्षेत्र में व्याप्त करोड़ों के असंतुलन और एन.पी.ए. के संकट से स्थाई रूप से पार पाया जा सकता है। यह मॉडल न केवल किसानों के आर्थिक उत्थान में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि ग्रामीण अंचल की वित्तीय संस्थाएँ पूरी मजबूती के साथ अपनी भूमिका का निर्वहन करती रहें।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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