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सहकारी बैंकों की स्थिरता के लिए RBI की दो टूक— अल्पकालिक नहीं, दीर्घकालिक रणनीति से हों शीर्ष नियुक्तियां..?

सारांश:

​आरटीआई (RTI) खुलासे के अनुसार, आरबीआई (RBI) ने ‘दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक’ को एक साल के बजाय MD/CEO का कार्यकाल न्यूनतम तीन वर्ष तय करने और नियुक्ति प्रक्रिया में देरी से बचने के लिए प्रस्ताव 4 महीने पहले भेजने के कड़े निर्देश दिए हैं।

विस्तृत:

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जयपुर/जालोर। सहकारी जगत ग्राउंड रिपोर्ट 23 अक्टूबर|सहकारी बैंकों की प्रशासनिक व्यवस्था और शीर्ष पदों पर नियुक्तियों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ((RBI)) ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना का अधिकार ((RTI)) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारियों से यह खुलासा हुआ है कि (RBI) ने दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ((MD)) के कार्यकाल और चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। (RBI) ने बैंक द्वारा (MD) को केवल एक वर्ष के लिए नियुक्त करने की रणनीति पर आपत्ति जताते हुए इसे बैंक के दीर्घकालिक हितों के प्रतिकूल बताया है।प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ख (1)(ख) के अंतर्गत श्री रणजीत सिंह चुंडावत को 31 अक्टूबर, 2028 तक की अवधि के लिए दी राजस्थान स्टेट को-ओपेरटिव (Bank) के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्ति की मंजूरी प्रदान की है। इससे पूर्व, इसी बैंक में श्री संजय कुमार पाठक को भी 31 अगस्त, 2025 तक के लिए इस पद पर मंजूरी दी गई थी।

एक वर्षीय कार्यकाल की नीति पर (RBI) की दो टूक, दीर्घकालिक हितों के लिए लंबी अवधि की नियुक्ति पर जोर

दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरटिव (Bank) लिमिटेड में प्रबंध निदेशक ((MD)) के कार्यकाल को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ((RBI)) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। (RTI) के माध्यम से सामने आए दस्तावेजों से पता चलता है कि बैंक द्वारा (MD) को केवल एक वर्ष के सीमित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जा रहा था। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह अल्पकालिक रणनीति बैंक के दीर्घकालिक और दूरगामी आर्थिक हितों के अनुकूल नहीं है।(RBI) ने बैंक प्रशासन को कड़ी सलाह दी है कि वे अपनी मौजूदा नियुक्ति नीति की तत्काल समीक्षा करें। केंद्रीय नियामक ने सुझाव दिया है कि बैंक की स्थिरता और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी ((CEO)) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां लगभग तीन वर्षों जैसी लंबी अवधि के लिए की जानी चाहिए। एक साल के छोटे कार्यकाल से बैंक की नीतियों में निरंतरता बनी रहती है और दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्देश दिया गया है। इस निर्देश के बाद से सहकारिता महकमे में प्रशासनिक बदलावों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि भविष्य में अब हर नियुक्ति को लंबी अवधि की योजनाओं के तहत ही आगे बढ़ाना होगा।

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने पूर्व में जारी अपने पत्रों में स्पष्ट किया था कि बार-बार एक साल के लिए (MD) की नियुक्ति करना एक आदर्श रणनीति नहीं है। (RBI) ने बैंक प्रबंधन को अपनी नीति की समीक्षा करने की सलाह देते हुए कहा कि (MD) या मुख्य कार्यकारी अधिकारी ((CEO)) की नियुक्ति कम से कम तीन साल जैसे लंबी अवधि के लिए की जानी चाहिए। इसके साथ ही, (RBI) ने भविष्य की नियुक्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी है। केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि (MD) या (CEO) के पद पर नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए प्रस्ताव प्रस्तावित तिथि से कम से कम चार महीने पहले अनिवार्य रूप से (RBI) के पास भेज दिए जाएं, ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार का विलंब न हो।

(MD) पद के लिए अब चार महीने पहले भेजना होगा आवेदन, (RBI) ने तय की समय सीमा

बैंकिंग और सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता तथा समयबद्धता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ((RBI)) ने नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। हाल ही में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, (RBI) ने दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरटिव (Bank) लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि बैंक में प्रबंध निदेशक ((MD)) या मुख्य कार्यकारी अधिकारी ((CEO)) के पद पर नई नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन अब पर्याप्त समय पूर्व प्रस्तुत किया जाए।बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35बी (1)(बी) के प्रावधानों का हवाला देते हुए केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए (RBI) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसे ध्यान में रखते हुए बैंक को यह सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है कि प्रस्तावित नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति की तिथि से कम से कम चार महीने (लगभग 120 दिन) पहले आवेदन हर हाल में रिजर्व बैंक के पास पहुंच जाना चाहिए। नियत समय से पहले पत्रावलियां मिलने पर उनका उचित परीक्षण किया जा सकेगा, जिससे अंतिम समय में प्रशासनिक कार्यों या नियुक्तियों में किसी तरह का गतिरोध पैदा न हो। (RBI) की इस स्पष्ट समयावधि की शर्त से सहकारिता क्षेत्र की संस्थाओं को अब अपनी चयन प्रक्रियाओं को और अधिक एडवांस और सुव्यवस्थित बनाना होगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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