सार
जालोर जिले में रबी सीजन हेतु डीएपी और यूरिया की मांग ‘राज सहकार पोर्टल’ पर ऑनलाइन दर्ज कर दी गई है। सहकारिता विभाग ने समितियों को प्राथमिकता से उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को खाद की किल्लत न हो।
विस्तार

जालोर।| जिला डेस्क रिपोर्ट 8 अक्टूबर 2026 |जिले में आगामी रबी सीजन (Rabi Season) के दौरान कृषकों को कृषि कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए सहकारिता विभाग (Cooperation Department) पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिले की क्रय-विक्रय सहकारी समितियों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) द्वारा किसानों को समयबद्ध और सुचारू रूप से रासायनिक उर्वरक, विशेष रूप से डीएपी (DAP) और यूरिया (Urea) उपलब्ध करवाने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से ‘राज सहकार पोर्टल’ (Raj Sahkar Portal) पर रबी सीजन के लिए आवश्यक उर्वरकों की मांग ऑनलाइन अपलोड कर दी गई है।दी जालोर सैण्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (The Jalore Central Co-operative Bank Ltd.) के नोडल अधिकारी (उर्वरक आपूर्ति) एवं अतिरिक्त अधिशाषी अधिकारी (Additional Executive Officer) सुभाष चंद्र ने जिला परिषद के कृषि (विस्तार) संयुक्त निदेशक को पत्र प्रेषित कर जिले की सहकारी समितियों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक का आवंटन सुनिश्चित करवाने का आग्रह किया है। सहकारिता विभाग का यह प्रयास है कि किसानों को ऐन वक्त पर खाद की किल्लत न झेलनी पड़े और बिचौलियों या कालाबाजारी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। इस व्यवस्था से जिले के सुदूर ग्रामीण अंचल तक के किसानों को सुगमता से खाद मिल सकेगी।
राज सहकार पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज हुई जिले की मांग, पारदर्शिता पर जोर
रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खेतों की जुताई और बुवाई का कार्य तेजी से शुरू हो जाता है। ऐसे में, यूरिया (Urea) और डीएपी (DAP) की मांग में अचानक भारी उछाल आना स्वाभाविक है। इस मांग को समय पर पूरा करने के लिए जालोर जिले की विभिन्न ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों ने एहतियातन कदम उठाते हुए अपनी मांग ‘राज सहकार पोर्टल’ (Raj Sahkar Portal) पर विधिवत रूप से अपलोड कर दी है।बैंक अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल प्रक्रिया (Digital Process) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किस समिति को कितनी मात्रा में और किस समयावधि में उर्वरक की आवश्यकता है, इसका सटीक डेटा (Data) प्रशासन के पास उपलब्ध रहे। पोर्टल पर मांग दर्ज होने से न केवल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पारदर्शी बनेगी, बल्कि आवंटन प्रक्रिया में भी पूरी पारदर्शिता बनी रहेगी। कृषि विभाग और सहकारिता विभाग के आपसी समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्टॉक गोदामों तक समय पर पहुंचे, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की कतारों में खड़ा न होना पड़े और वे अपनी फसलों के लिए समय पर खाद प्राप्त कर सकें।
सहकारिता और कृषि विभाग का संयुक्त प्रयास, किसानों को राहत देने की तैयारी

जिले के किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में किसी भी स्तर पर कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक मॉनिटरिंग (Administrative Monitoring) और समन्वय को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा जारी निर्देशों के तहत सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रमुख संस्थाओं को सक्रिय कर दिया गया है।इस पूरी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सहकारिता और कृषि विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड स्तर (Field Level) पर नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही, इफको (IFFCO) और कृभको (KRIBHCO) जैसी प्रमुख उर्वरक निर्माता संस्थाओं के क्षेत्रीय अधिकारियों को भी इस पूरी प्रक्रिया से जोड़ा गया है, ताकि मांग के अनुरूप आपूर्ति समय पर मिल सके। सहकारिता महकमे के इस कदम से जिले के अन्नदाताओं में यह विश्वास जगा है कि इस बार उन्हें रबी सीजन के दौरान यूरिया (Urea) और डीएपी (DAP) की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे सुगमता से अपना खेती का कार्य संपन्न कर सकेंगे।


