सार
Rajasthan -:-सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में केंद्रीय सहकारी बैंकों के बढ़ते एन.पी.ए. और सीआरएआर में सुधार पर जोर दिया गया। गोपाल क्रेडिट कार्ड के अवधिपार ऋणों की त्वरित वसूली और पैक्स में रिक्त पदों को भरकर प्रशासनिक व्यवस्थाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
विस्तार 
जयपुर। प्रदेश डेस्क 19 सितंबर | सहकारिता क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के केंद्रीय सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, ऋण वितरण और विभिन्न बजट घोषणाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने केंद्रीय सहकारी बैंकों (Central Cooperative Banks) में बढ़ते नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स पर गहरी चिंता व्यक्त की। अगस्त माह तक केंद्रीय सहकारी बैंकों का सकल एन.पी.ए. (Gross NPA) बढ़कर 2,369.12 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) द्वारा निर्धारित 5 प्रतिशत की सहनशील सीमा के भीतर रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मानक (Standard), उप-मानक (Sub-standard), संदिग्ध (Doubtful) और हानि वाली परिसंपत्तियों (Loss Assets) की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया।बैठक में वित्तीय स्वास्थ्य के पैमाना माने जाने वाले सीआरएआर (CRAR) की भी समीक्षा की गई। पाली, जैसलमेर, भरतपुर, बूंदी और चूरू सहित पांच केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा आरबीआई (RBI) के निर्धारित न्यूनतम 9 प्रतिशत स्तर को अर्जित न करने पर कड़ी नाराजगी जताई गई। इन बैंकों को ऋणों के अनुपात में वसूली बढ़ाने, अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण रखने और समय पर ब्याज अनुदान क्लेम (Interest Subsidy Claim) भेजने के उपचारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, पैक्स (Primary Agricultural Credit Societies – PACS) स्तर पर गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना (Gopal Credit Card Scheme) के तहत वितरित ऋणों की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान वितरित ऋणों के तहत जुलाई माह तक 1,236 खाते अवधिपार (Overdue) श्रेणी में पाए गए, जिनकी कुल राशि 9.32 करोड़ रुपये बकाया है। शासन सचिव ने इन अवधिपार ऋणों की त्वरित वसूली सुनिश्चित करने और पात्र किसानों को नए ऋण वितरित करने के निर्देश दिए हैं। फसली ऋणों की शत-प्रतिशत वसूली और पैक्स (PACS) में रिक्त चल रहे पदों व पैक्स में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर भी विशेष बल दिया गया। इस दौरान महत्वपूर्ण वीसी (VC ) बैठक में अतिरिक्त रजिस्ट्रार, केन्द्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक (Managing Directors ), वरिष्ठ अधिकारी, शाखा प्रबंधक और ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापक भी जुड़े।

गोपाल क्रेडिट कार्ड और फसली ऋणों की अवधिपार (Overdue) बकाया वसूली पर फोकस
सहकारी बैंकों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए वितरित किए जाने वाले ऋणों की वसूली को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। समीक्षा बैठक में गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना (Gopal Credit Card Scheme) के तहत वितरित ऋणों के बकाये पर गंभीर मंथन किया गया, जिसके तहत 1,236 खातों में 932 .20 लाख रुपये की राशि अवधिपार (Overdue) पाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन लंबित और अवधिपार मामलों की शीघ्र वसूली सुनिश्चित करें ताकि योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित न हो। इसके अलावा खरीफ (Kharif) और रबी (Rabi) सत्र के दौरान वितरित किए गए अल्पकालीन फसली ऋणों के विरुद्ध भी शत-प्रतिशत वसूली के लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं। पैक्स (PACS) स्तर पर ऋण विविधीकरण (Loan Diversification) को बढ़ावा देते हुए कृषि और अकृषि ऋणों का न्यूनतम 20 प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसानों को राज्य सरकार की 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना (Interest Subsidy Scheme) का पूरा लाभ मिल सके।
पैक्स (PACS) में रिक्त पदों और एन.पी.ए. (NPA) वृद्धि पर दो टूक
सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में पैक्स (PACS) के सुदृढ़ीकरण और बढ़ती वित्तीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। पैक्स (PACS) स्तर पर कामकाज को सुचारू चलाने के लिए रिक्त चल रहे पदों के संबंध में विभाग स्तर पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन पैक्स (PACS) में व्यवस्थापक नहीं हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर कार्य प्रभावित न होने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, सहकारी बैंकों में बढ़ते एन.पी.ए. (NPA) के ग्राफ को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने स्पष्ट किया कि परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification) के सभी मानकों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और विशेष तौर पर संदिग्ध संपत्तियों (Doubtful Assets) के मामलों पर पैनी नजर रखी जाए ताकि वित्तीय संस्थानों की साख और लाभप्रदता (Profitability) बनी रहे।


