Home राष्ट्रीय सहकारी साख संस्थाओं (Cooperative Credit Institutions) को सुदृढ़ करने के लिए नाबार्ड (NABARD) ने जारी किए नए परिचालन दिशा निर्देश, राज्यों को मिलेंगे मीयादी ऋण (Term Loans)

सहकारी साख संस्थाओं (Cooperative Credit Institutions) को सुदृढ़ करने के लिए नाबार्ड (NABARD) ने जारी किए नए परिचालन दिशा निर्देश, राज्यों को मिलेंगे मीयादी ऋण (Term Loans)

सार

NABARD-:-नाबार्ड ने सहकारी साख संस्थाओं की शेयर पूंजी में अंशदान और उनकी उधार क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों को मीयादी ऋण देने हेतु वर्ष 2026-27 के नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।

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​नई दिल्ली/मुंबई | विशेष रिपोर्ट, 17 सितंबर|देश की ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सहकारी साख संस्थाओं (Cooperative Credit Institutions) को वित्तीय रूप से और अधिक सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड/NABARD) ने वर्ष 2026-27 के लिए नए परिचालन दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 27 के अंतर्गत राज्य सरकारों को सहकारी साख संस्थाओं की शेयर पूंजी (Share Capital) में अंशदान करने के लिए पुनर्वित्त (Reimbursement) के रूप में दीर्घकालिक मीयादी ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य इन वित्तीय संस्थानों की ‘अधिकतम उधार लेने की क्षमता’ (Maximum Borrowing Power – MBP) को बढ़ाना है, जिससे वे कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऋण कार्यक्रम संचालित कर सकें। नाबार्ड (NABARD) द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, इस ऋण सुविधा का लाभ राज्य सहकारी बैंक (StCBs), जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs), प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS), किसान सेवा समितियां (FSS), वृहद आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियां (LAMPS), और कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (SCARDBs/PCARDBs) को मिलेगा। इन संस्थाओं को पूंजीगत सहायता मिलने से वे विनियामक पूंजी पर्याप्तता (CRAR) के मानदंडों को सहजता से पूरा कर सकेंगी। साथ ही, विशेष राज्यों जैसे कि पूर्वोत्तर क्षेत्र (North Eastern Region – NER), जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के बैंकों के लिए एनपीए (NPA) और शेयर पूंजी के नियमों में विशेष छूट का प्रावधान भी किया गया है। योजना के तहत राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय वर्ष में किए गए सभी संवितरण (Disbursements) प्रतिपूर्ति के पात्र होंगे, जिन्हें 12 वर्ष की अवधि में चुकाना होगा। मूलधन की चुकौती आहरण (Drawal) के तीसरे वर्ष से दस समान वार्षिक किस्तों में देय होगी। हालांकि, ऋण चुकौती या ब्याज भुगतान में किसी भी प्रकार की चूक (Default) होने पर राज्य सरकारों को 10.25% प्रति वर्ष की दर से दंडात्मक शुल्क (Penal Charge) चुकाना होगा। नाबार्ड (NABARD) ने सभी राज्यों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए समय पर अपने आवेदन संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रस्तुत करने का आह्वान किया है।

​संकटग्रस्त सहकारी बैंकों (RCB) के कायाकल्प और ‘टर्नअराउंड योजना’ (Turn Around Plan) पर विशेष जोर

नाबार्ड (NABARD) के नए दिशानिर्देशों में उन सहकारी बैंकों (RCBs) के पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है जो नियामक सीआरएआर (CRAR) मानदंडों को पूरा करने में असमर्थ हैं या जिन्हें ‘टर्नअराउंड एक्शन प्लान’ (Turn Around Action Plan) के तहत पहचाना गया है। ऐसे बैंकों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले शेयर पूंजी अंशदान पर सहायता का दायरा बढ़ाया गया है।दिशानिर्देशों के तहत, यदि राज्य सरकार द्वारा कुल चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Capital) के 25% से अधिक का पूंजी निवेश (Capital Infusion) किया जाता है, तो उस अतिरिक्त राशि को अनुदान के रूप में “कैपिटल कन्वर्टिबल डिपॉजिट अकाउंट” (Capital Convertible Deposit Account) में रखा जाएगा। यह विशेष प्रावधान बैंकों की टियर-I पूंजी (Tier-I Capital) को मजबूत करने में मदद करेगा। इसके अलावा, बैंकिंग विनियमन अधिनियम (B.R. Act), 1949 की धारा 11(1) के अनुपालन के लिए विशेष मामलों में पूर्वोत्तर राज्यों (NER) और अन्य पात्र क्षेत्रों को अतिरिक्त छूट प्रदान करने का अधिकार नाबार्ड (NABARD) की उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति (CHSC) को दिया गया है। इससे कमजोर और गैर-लाइसेंस प्राप्त बैंकों को भी मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलेगा।

​ PACS, FSS और LAMPS के लिए कड़े ऑडिट नियम (Audit Rules) और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था

प्राथमिक स्तर की सहकारी संस्थाओं जैसे प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS), किसान सेवा समितियां (FSS) और आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों (LAMPS) को वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कड़े पात्रता मानदंडों (Eligibility Criteria) का पालन करना होगा। नियमों के मुताबिक, इन संस्थाओं का अतिदेय (Overdues) निर्धारित मांग सीमा (PACS के लिए 60%, LAMPS के लिए 75%) से अधिक नहीं होना चाहिए।इसके साथ ही, ऑडिट प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि संबंधित संस्थाओं का लेखा-परीक्षण (Audit) समय पर पूरा हो। यदि ऑडिट में कोई बकाया या देरी पाई जाती है, तो संबंधित राज्य सरकार को इसे दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना (Time-bound Action Plan) प्रस्तुत करनी होगी। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए नाबार्ड (NABARD) और क्षेत्रीय कार्यालय (RO) त्रैमासिक ‘ENSURE’ रिटर्न के माध्यम से इन ऋणों के उपयोग और टर्नअराउंड योजनाओं (TAP) की प्रगति की निरंतर निगरानी और समीक्षा करेंगे।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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