सार
सहकारिता विभाग ने सहकारी बैंकों के कर्मचारियों के 17वें वेतन समझौते और वित्तीय सुधारों के लिए शासन सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
विस्तार 
जयपुर: |सहकारी जगत से ग्राउंड रिपोर्ट — 3 सितंबर!|प्रदेश के सहकारी बैंकों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लंबे समय से प्रतीक्षित 17वें वेतन समझौते की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से तेज कर दी गई है। राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सहकारी बैंकों के वेतनमान और अन्य सेवा सुविधाओं में संशोधन के संबंध में सुझाव देने के लिए शासन सचिव सहकारिता विभाग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेष समिति का गठन किया है। इस निर्णय से राज्यभर के सहकारी संस्थानों के हजारों कर्मचारियों में नए वेतनमान को लेकर उम्मीदें जग गई हैं।
गठित की गई यह समिति, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (जयपुर) के साथ-साथ राज्य के सभी केंद्रीय सहकारी बैंकों, राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड (जयपुर) और राज्य के तमाम प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों में कार्यरत कर्मियों के वेतन ढांचे का गहन विश्लेषण करेगी। समिति का मुख्य दायित्व यह होगा कि वह विभिन्न बैंकों की वित्तीय सेहत और उनकी आर्थिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करे। इसके आधार पर यह उच्चस्तरीय निकाय अपने ठोस सुझाव और सिफारिशें शासन को सौंपेगा, जिसके बाद आगामी वेतन समझौते की रूपरेखा तय की जाएगी।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह समिति कर्मचारी संगठनों की ओर से समय-समय पर सौंपे गए ज्ञापनों और मांगपत्रों का भी विस्तार से परीक्षण करेगी। प्रक्रिया के तहत, समिति के सदस्य विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा और संवाद स्थापित करेंगे, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं और मांगों को समग्र रूप से समझा जा सके। माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद, राज्य के सहकारी क्षेत्र के कर्मियों के वेतनमान में संशोधन और अन्य वित्तीय लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे बैंकिंग कामकाज में और अधिक पारदर्शिता आएगी।
वित्तीय सुधार और वेतन संशोधन: समिति के समक्ष नई चुनौतियाँ
विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन संशोधन की इस प्रक्रिया के दौरान समिति के समक्ष कई वित्तीय चुनौतियाँ रहेंगी। इस विशेष समिति के विचारणीय बिंदुओं में बैंकों में वेतनमान समझौते को लागू करने के तार्किक आधार तय करना शामिल है। इसके अलावा, वेतन समझौतों की उचित आवृत्ति निर्धारित करने के साथ-साथ केंद्रीय सहकारी बैंकों की सी.आर.ए.आर. (CRAR) संधारण स्थिति का आकलन किया जाएगा।समिति रिजर्व बैंक के मानकों के अनुरूप बैंकों की एन.पी.ए. (NPA) स्थिति की गहराई से समीक्षा करेगी। साथ ही, केंद्रीय सहकारी बैंकों, ग्राम सेवा समितियों तथा भूमि विकास बैंकों के आपसी वित्तीय असंतुलन जैसे गंभीर मुद्दों पर मंथन होगा। इन तमाम आर्थिक संकेतकों का अध्ययन करने के उपरांत ही समिति अपनी अंतिम संस्तुतियाँ सरकार को सौंपेगी।


