Home राज्य राजस्थान सहकारी महकमे में फर्जी डिग्रियों का खेल: एपेक्स बैंक से लेकर जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों तक फैला भ्रष्टाचार, मास्टरमाइंड कर्मचारियों ने डकारा लाखों का एरियर

सहकारी महकमे में फर्जी डिग्रियों का खेल: एपेक्स बैंक से लेकर जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों तक फैला भ्रष्टाचार, मास्टरमाइंड कर्मचारियों ने डकारा लाखों का एरियर

सार 

#Rajasthan फर्जी एमएससी/एमएसएस आईटी डिग्रियों के सहारे एपेक्स और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में एरियर का लाभ उठाने का हुआ खुलासा ।

विस्तार

​जयपुर |प्रदेश डेस्क 17 अगस्त |सहकारी बैंक में फर्जीवाड़े और नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय लाभ उठाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। एमएससी/एमएसएस आईटी (MSc/MSS IT) की फर्जी डिग्रियों के सहारे एपेक्स बैंक और विभिन्न जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाईं और बैको के खजाने को चूना लगाया।16वीं विधानसभा के पंचम सत्र के दौरान विधायक चेतन पटेल कोलाना द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में सहकारिता विभाग ने कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सदन की मेज पर रखे गए इन आधिकारिक दस्तावेजों से साफ हो गया है कि किस प्रकार नियमों को ताक पर रखकर सहकारी बैंको की तिजोरी से राशि निकाली गई ​। इस पूरे फर्जीवाड़े के केंद्र में राज्य का शीर्ष बैंक यानी एपेक्स बैंक और कई जिला केंद्रीय सहकारी बैंक रहे हैं, जहां कर्मचारियों ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि और भारी-भरकम एरियर का अवैध लाभ उठाया। दस्तावेजों के मुताबिक, अकेले एपेक्स बैंक में इस फर्जीवाड़े का दायरा सबसे बड़ा है। एक ओर जहां कई कार्मिकों की डिग्रियों की वैधता संदिग्ध मिलने पर 107.42 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है, वहीं अन्य मामलों में 51,00,247 रुपये की राशि वसूल की गई है। हालांकि, कई प्रकरणों में न्यायालय के स्थगन आदेशों (स्टे) के चलते जांच और रिकवरी की प्रक्रिया अभी भी कानूनी दांवपेंच में उलझी हुई है।

विभाग ने मानी गड़बड़ी, ब्याज सहित हो रही है वसूली

विधानसभा में उठाए गए इस अहम सवाल के जवाब में विभाग ने लिखित रूप से स्वीकार किया है कि प्रदेश के राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों के कर्मचारियों द्वारा एमएससी/एमएसएस आईटी हेतु अतिरिक्त वेतन वृद्धि वर्तमान में देय नहीं है। जांच के दौरान कतिपय डिग्रियां विधिसम्मत नहीं पाए जाने पर, पूर्व में जारी की गई वेतन वृद्धियों के पेटे भुगतान की गई राशि मय ब्याज वसूल की जा चुकी है।सदन में पेश दस्तावेजों के अनुसार, जिन कर्मचारियों ने 14वें वेतन समझौते के दौरान फर्जी या नियम विरुद्ध डिग्रियों के आधार पर अनुचित लाभ लिया था, उनसे सख्ती से रिकवरी की गई है। कुछ स्थानों पर कर्मचारियों द्वारा कोर्ट से स्टे लाने के बावजूद अधिकांश जिलों में विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए रिकवरी पूरी कर ली है

जिलेवार खुलासे और रिकवरी का हिसाब

​विधानसभा में प्रस्तुत लिखित जवाब के अनुसार प्रदेश के सहकारी बैंकों की स्थिति इस प्रकार है:

  • ​बड़े खुलासे वाले बैंक: अपेक्स बैंक, अजमेर, कोटा, पाली, हनुमानगढ़, जयपुर, झालावाड़ जोधपुर और श्रीगंगानगर जैसे केंद्रीय सहकारी बैंकों में फर्जीवाड़े की लंबी फेहरिस्त सामने आई है, जहां से लाखों रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
  • ​निर्दोष या प्रकरण मुक्त जिले: बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, जैसलमेर, जालौर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही और टोंक सीसीबी में इस तरह का कोई प्रकरण न होने या पूर्व में ही निस्तारण होने की बात कही गई है।

बिना जांच के लाभ देने पर विभाग का कड़ा रुख

​सहकारिता विभाग ने साफ किया है कि कई जगहों पर कर्मचारियों को वेतन वृद्धि और एरियर देने से पूर्व डिग्रियों की विधिवत जांच नहीं कराई गई थी, जिसका फायदा उठाकर लोगों ने गलत तरीके से वित्तीय लाभ हासिल किया।​अब विभाग ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस तरह की अनियमितताओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन मामलों में डिग्रियां अवैध पाई गई हैं, वहां न केवल वेतन का पुननिर्धारण किया जा रहा है, बल्कि एरियर की एक-एक पाई ब्याज सहित वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराई जा रही है।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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