सार
जालोर जिले में प्रशासनिक स्वीकृति के तहत कुल 29 कस्टम हायरिंग केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 20 केंद्र 30.00 लाख रुपये की लागत वाले तथा 9 केंद्र 10.00 लाख रुपये की लागत वाले हैं।
विस्तार

जालोर. |जिला ङेस्क 7अगस्त |कृषि प्रधान जिले जालोर के किसानों के लिए एक बड़ी सौगात आई है। राज्य सरकार के कृषि विभाग ने जिले में कृषि के आधुनिकीकरण और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जिले की 29 ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) को ‘कस्टम हायरिंग केंद्र’ स्थापित करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। यह पहल न केवल कृषि की लागत को कम करेगी, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों की पहुंच भी आधुनिक कृषि उपकरणों तक सुनिश्चित करेगी।जालोर का अतीत हमेशा से कृषि और पशुपालन पर आधारित रहा है। जहां पहले किसान पारंपरिक साधनों और उपकरणों पर निर्भर थे, वहीं बदलते दौर में अब तकनीकी का समावेश आवश्यक हो गया है। कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना इस बदलाव की कड़ी है। इन केंद्रों के जरिए किसान अब महंगे कृषि यंत्र जैसे ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर और सीड ड्रिल किराए पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें खेती की मशीनीकरण में आने वाली भारी लागत से मुक्ति मिलेगी।
सहकारी आंदोलन: भरोसे का प्रतीक
सहकारी समितियों का राजस्थान के विकास में हमेशा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ‘एक सबके लिए, सब एक के लिए’ के मंत्र पर आधारित हमारा सहकारी आंदोलन आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये ग्राम सेवा सहकारी समितियां अब तक वित्तीय ऋण और खाद-बीज उपलब्ध कराने तक सीमित थीं, लेकिन अब ये कृषि यंत्रों के प्रबंधन की नई जिम्मेदारी संभालकर किसानों का संबल बनी हैं। इन समितियों के माध्यम से पारदर्शी और भरोसेमंद वित्तीय सेवाओं का लाभ सीधे किसानों को मिल रहा है, जिससे उन्हें साहूकारों के चंगुल से दूर रहकर खेती में नवाचार करने का मौका मिल रहा है।
क्या है परियोजना?
कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत इन केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इसमें 30 लाख रुपये और 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं। स्वीकृत केंद्रों को तीन माह के भीतर इन यंत्रों की खरीद कर प्रभावी संचालन शुरू करना अनिवार्य होगा।
29 ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर खुलेंगे कृषि मशीनरी केंद्र
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन केंद्रों से खेती की लागत में कमी आएगी। जालोर की मिट्टी की उर्वरता और किसानों के परिश्रम को आधुनिक मशीनों का साथ मिलने से जिले के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि की संभावना है, और यह कदम ‘स्मार्ट खेती’ की दिशा को एक नई पहचान दिलाएगा। इस पहल का मुख्य लक्ष्य कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना और लागत में कमी लाना है, जिसके तहत जिले की 29 ग्राम सेवा सहकारी समितियों का चयन किया गया है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के तीन माह के भीतर इन केंद्रों का संचालन अनिवार्य किया गया है, जिससे भविष्य में सहकारी समितियों की भूमिका और अधिक मजबूत होगी और वित्तीय व तकनीकी सहायता का समावेश हो सकेगा। इस निर्णय से जालोर के कृषि बाहुल्य क्षेत्रों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, जो भविष्य में जिले को उन्नत कृषि के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।


