सार
# JALORE राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन जालोर ने पैक्स-लैम्पस की वित्तीय मजबूती के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने सिरोही बैंक की तर्ज पर जालोर में भी ब्याज मुक्त ऋण योजना के तहत ब्याज रिवर्सल, टीसीएस ऑटोमैटिक डेबिट पर रोक, 2% ब्याज सहायता समितियों के खातों में जमा करने और चक्रवृद्धि ब्याज वसूली रोकने की मांग की है।
विस्तार

जालोर।|जिला ङेस्क 7 अगस्त| जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) और लैम्पस (LAMPS) की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने तथा किसानों को राहत देने के लिए राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने रुख अपनाया है। यूनियन ने जिला प्रशासन और केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन से मांग की है कि दी सिरोही सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की तर्ज पर जालोर में भी ब्याज रिवर्सल और अन्य वित्तीय विसंगतियों को दूर करने के लिए तत्काल आदेश जारी किए जाएं।यूनियन द्वारा जिला कलेक्टर, सहकारिता विभाग के अधिकारियों और केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक को सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से ब्याज वसूली की विसंगतियों पर फोकस किया गया है। यूनियन का कहना है कि ब्याज मुक्त फसली ऋण योजना के तहत जिन सदस्यों के अल्पकालीन ऋणों की वसूली समय पर जमा हो जाती है, उन पर पैक्स/लैम्पस से कोई ब्याज नहीं लिया जाना चाहिए। यदि टीसीएस (TCS) पोर्टल के माध्यम से ऑटोमैटिक ब्याज डेविट कर लिया जाता है, तो उसे तुरंत रिवर्स किया जाए।
यूनियन द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें और विसंगतियों का निवारण:
- ब्याज अनुदान का सही अंतरण: समय पर ऋण चुकारा करने वाले किसानों से प्राप्त होने वाली 4 प्रतिशत ब्याज सहायता राशि में से 2 प्रतिशत राशि संबंधित पैक्स/लैम्पस के बचत खातों में समय पर जमा करवाई जाए।
- चक्रवृद्धि ब्याज पर रोक: वित्तीय वर्ष के अंत यानी 31 मार्च और 30 जून को समितियों के पक्ष में बकाया ब्याज को मूलधन में जोड़कर ‘ब्याज पर ब्याज’ वसूलने की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
- केआरपी पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि: पैक्स और लैम्पस स्तर पर KRP पोर्टल पर सभी सदस्यों के PRI एवं IS क्लेम तथा 04 प्रतिशत ब्याज अनुदान क्लेम समयबद्ध रूप से प्रस्तुत किए जाने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित हो।
सहकारी आंदोलन को बचाने की गुहार
पैक्स कर्मचारियों का तर्क है कि सिरोही सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा अपने पत्र क्रमांक 1397 (दिनांक 29.07.2026) के जरिए वहां के पैक्स/लैम्पस के लिए ये स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि समय पर वसूली होने पर समितियों से कोई अतिरिक्त ब्याज न लिया जाए। चूंकि जालोर जिले की समितियां भी इसी त्रिस्तरीय ढांचे के तहत कार्य कर रही हैं, इसलिए यहाँ भी इन विसंगतियों को दूर करना अति आवश्यक है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन बिंदुओं पर स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए, तो समितियों की वित्तीय हालत और अधिक बिगड़ सकती है


