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पैक्स कंप्यूटराइजेशन: सहकारिता की रीढ़ को डिजिटल धार, 18 केंद्रीय सहकारी बैंकों के 4,220 पैक्स कार्मिकों के प्रशिक्षण का रास्ता साफ

  • त्रिस्तरीय सहकारी ढांचे की सबसे छोटी इकाई पैक्स-लैम्पस के कार्मिकों के डिजिटल प्रशिक्षण की रूपरेखा जारी  

  • राष्ट्रीय स्तर पर पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना के तहत नाबार्ड द्वारा 44.85 लाख रुपए की राशि स्वीकृत  

  • व्यवस्थापक यूनियन के लंबे संघर्ष और प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, सहकारिता विभाग के स्तर पर जगी नई उम्मीदें  IMG 20260807 WA0002

जयपुर |प्रदेश ङेस्क 7 अगस्त |प्रदेश के सहकारी आंदोलन की त्रिस्तरीय ढांचागत व्यवस्था की सबसे मजबूत और बुनियादी इकाई—पैक्स (Primary Agricultural Credit Societies) एवं लैम्पस को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना’ के अंतर्गत अब जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले पैक्स-लैम्पस कार्मिकों और अधिकारियों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने के लिए आधिकारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा जारी कर दी गई है। इस पहल से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता, गतिशीलता और दक्षता के एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है राज्यभर में पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना के तहत पैक्स कार्मिकों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने की मांग को लेकर सहकारिता विभाग के स्तर पर व्यवस्थापक यूनियन का संघर्ष लंबा और निरंतर रहा है ! व्यवस्थापक यूनियन नेतृत्वकर्ता के मार्गदर्शन में पैक्स-लैम्पस कार्मिकों की इस गंभीर आवश्यकता और कार्यक्षेत्र की व्यावहारिक पीड़ा को लगातार उठाया गया। यूनियन के इसी संघर्ष का परिणाम है कि आज शासन-प्रशासन स्तर पर कार्मिकों के प्रशिक्षण की रूपरेखा को मूर्तरूप दिया गया है, जो पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना को धरातल पर सार्थक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

क्या है पैक्स कंप्यूटराइजेशन?

अतीत में पैक्स और लैम्पस का पूरा कामकाज मैन्युअली (पंजियों और बहियों के माध्यम से) संचालित होता था, जिससे किसानों को समय पर ऋण वितरण, खाद-बीज की उपलब्धता और अन्य सहकारिता सेवाओं में कई प्रकार की व्यावहारिक अड़चनों का सामना करना पड़ता था। समय के बदलाव के साथ सहकारिता के आधुनिकीकरण की मांग उठी और केंद्र सरकार ने देश की पैक्स इकाइयों के कंप्यूटरीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।वर्तमान कार्य-परिदृश्य में, पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना के माध्यम से राज्य की सभी पैक्स-लैम्पस शाखाओं को अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को मिलने वाले अल्पकालीन फसली ऋण, उर्वरक वितरण, और अन्य बैंकिंग सेवाओं का रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन हो रहा है।

प्रथम चरण में 4,220 कार्मिकों का होगा प्रशिक्षण, 44.85 लाख रुपए स्वीकृत

दि राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लि. (एपेक्स बैंक) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केंद्र प्रवर्तित पैक्स कंप्यूटराइजेशन परियोजना के अंतर्गत नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण का प्रथम चरण शुरू कर दिया गया है।  

  • ​स्वीकृत राशि: नाबार्ड द्वारा प्रथम चरण में प्रदेश के 18 केंद्रीय सहकारी बैंकों से संबद्ध 4,483 पैक्स के कुल 4,220 अधिकारियों/कार्मिकों के प्रशिक्षण हेतु ₹44,85,000/- (चवालीस लाख पचासी हजार रुपए) की राशि स्वीकृत की गई है।  
  • प्रमुख केंद्रीय सहकारी बैंक: इस प्रशिक्षण योजना में बाड़मेर, बांसवाड़ा, हनुमानगढ़, बीकानेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर, झालावाड़, कोटा, दौसा, सिरोही, गंगानगर, टोंक, जालोर, बारां, जोधपुर, नागौर और भरतपुर सहित राज्य के 18 केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल किए गए हैं।  
  • निर्धारित समयावधि: इन सभी बैंकों के अंतर्गत आने वाले पैक्स कार्मिकों का प्रशिक्षण तय तिथियों के अनुसार आयोजित किया जा रहा है, जिसकी अद्यतन सूचना शीर्ष बैंक के प्रशिक्षण संभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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वेंडर (Vendor) और तकनीकी पक्ष पर फोकस

योजना के वर्तमान क्रियान्वयन में हार्डवेयर संस्थापन, सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन, डेटा माइग्रेशन और तकनीकी वेंडर (Vendor) की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। पैक्स स्तर पर कंप्यूटरीकरण के दौरान वेंडर द्वारा प्रदान की जाने वाली तकनीकी सेवाओं, सॉफ्टवेयर के संचालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और त्रुटियों को दूर करने पर अब विशेष फोकस किया जा रहा है। जब तक पैक्स कार्मिक तकनीकी रूप से दक्ष नहीं होंगे, तब तक वेंडर द्वारा स्थापित प्रणालियों का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सकता। यही कारण है कि इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम में वेंडर द्वारा प्रदत्त सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग और डेटा एंट्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है।व्यवस्थापक यूनियन नेतृत्व सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने विश्वास जताया है कि इस डिजिटल प्रशिक्षण के बाद ग्रामीण आंचल के किसानों को पैक्स के माध्यम से बैंक जैसी आधुनिक डिजिटल बैंकिंग और सहकारिता सुविधाएं घर बैठे और पूरी पारदर्शिता के साथ मिल सकेंगी।

पैक्स (PACS) कंप्यूटराइजेशन योजना के तहत कार्मिकों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने की मांग को लेकर सहकारिता विभाग में हमारा संघर्ष लंबा रहा है। जमीनी स्तर के कार्मिकों की इस समस्या पर पैरवी के बाद तैयार की गई प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा सहकारिता जगत में एक सकारात्मक बदलाव और सार्थक पहल है।​इस महत्वपूर्ण मुद्दे को मुखरता से उठाने में ‘मारवाड़ का मित्र’ समाचार पत्र की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही है। इस अखबार ने निरंतर और निष्पक्ष कवरेज के माध्यम से इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से उठाया।

— सूरजभान सिंह आमेरा एवं हनुमानसिंह राजावत

                    (व्यवस्थापक यूनियन नेतृत्वकर्ता)

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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