पैक्स और केंद्रीय सहकारी बैंकों में ढांचागत, कार्मिक और वित्तीय प्रबंधन की सख्त आवश्यकता: आमेरा
किसान भवन में आयोजित बैठक में सहकारिता के वर्तमान-अतीत और कर्मचारियों की समस्याओं पर हुआ व्यापक मंथन
जोधपुर |जिला ङेस्क 27 जुलाई।ऑल राजस्थान कोआपरेटिव बैंक एम्प्लाइज यूनियन-ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव, सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन राजस्थान के अध्यक्ष और प्रख्यात सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा के रविवार को जोधपुर आगमन पर स्थानीय पैक्स और बैंक कर्मियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सहकार भारती की प्रांतीय बैठक में भाग लेने पहुंचे सहकार नेता की अगवानी के लिए शनिवार देर रात 11:30 बजे ही जोधपुर के पैक्स और सीसीबी साथी वंदे भारत ट्रेन पर पहुंच गए थे।रविवार शाम सहकार भारती की बैठक के समापन के पश्चात, किसान भवन में पैक्स और बैंक कर्मियों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सीसीबी बैंक संगठन की ओर से मनीष शर्मा व ओमप्रकाश विश्नोई तथा पैक्स संगठन की तरफ से जिला अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी, ओमप्रकाश और पैक्स चेयरमैन कानाराम परिहार ने साफा पहनाकर और माल्यार्पण कर सहकार नेता का जोरदार स्वागत किया।
सहकारिता के अतीत और वर्तमान पर गहन विचार-विमर्श
बैंक यूनियन के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई और पैक्स यूनियन के जिला अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी के नेतृत्व में हुई इस बैठक में सहकारिता आंदोलन के स्वर्णिम अतीत से लेकर वर्तमान दौर की चुनौतियों तक पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक को संबोधित करते हुए सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने प्रदेश की सहकारी पैक्स (PACS) और केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCB) की ढांचागत व संस्थागत स्थिति, कार्मिक हालात, वित्तीय तरलता और किसान हित पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा कि सहकारिता आंदोलन को जीवंत बनाए रखने के लिए अब राज्य स्तर पर एक मजबूत ढांचागत सुधार के रोड मैप की तत्काल आवश्यकता है।
बैठक में गूंजे कर्मचारियों के प्रमुख मुद्दे
सीसीबी एमडी से फोन पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान सहकार नेता आमेरा ने केंद्रीय सहकारी बैंक (सीसीबी) के प्रबंध निदेशक अनिल विश्नोई से दूरभाष पर वार्ता कर कार्मिकों की समस्याओं से अवगत कराया। आमेरा ने पैक्स और बैंक संस्थाओं की व्यवस्थागत स्थिति पर चिंता जताते हुए पैक्स व बैंक साथियों से संस्था के हित में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कर्मचारियों के अधिकारों के लिए कार्मिक संगठनों को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया।



