Home राज्य राजस्थान सहकारिता विभाग में ‘हाइब्रिड’ तबादला नीति पर सवाल: बैकडेट के खेल से विभागीय साख पर लगा ग्रहण 

सहकारिता विभाग में ‘हाइब्रिड’ तबादला नीति पर सवाल: बैकडेट के खेल से विभागीय साख पर लगा ग्रहण 

सार 

Rajasthan तबादलों पर रोक के बावजूद ‘ऑफलाइन‘ व ‘बैकडेट‘ आदेशों ने विभागीय पारदर्शिता और शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे सहकारी आंदोलन की साख प्रभावित हो रही है।

विस्तार 

​जयपुर | ङिजीटल ङेस्क 13 जुलाई | राजस्थान सहकारिता विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर विवादों के घेरे में है। विभाग में तबादलों पर लगी प्रशासनिक रोक के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर जारी ‘ऑफलाइन” आदेश ने विभागीय शुचिता और पारदर्शिता पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं । विभाग की कार्यप्रणाली में विसंगतियों की पराकाष्ठा तब देखने को मिली, जब तबादलों पर रोक के बीच रविवार को एक ‘ऑफलाइन’ तबादला सूची जारी की गई। इस आदेश पर 10 जुलाई 2026 की तिथि अंकित है, जबकि इसे दो दिन बाद यानी रविवार को जारी किया गया। प्रदेश में विभागीय कामकाज की शुचिता बनाए रखने के लिए ‘राजकाज पोर्टल’ के माध्यम से ई-डाक (E-Dak) प्रणाली अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में ‘ऑफलाइन’ पद्धति का सहारा लेना प्रशासनिक नियमों का खुला उल्लंघन है। आदेश में यह निर्देश देना कि “कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात राजकाज पोर्टल पर सूचना भेजी जाए”, यह स्पष्ट करता है कि विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए डिजिटल व्यवस्था को महज एक औपचारिकता बना रहा है।

अव्यावहारिक निर्णय: प्रशासनिक दक्षता पर कुठाराघात

तबादला सूची में सहकारिता सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी (संयुक्त रजिस्ट्रार) का स्थानांतरण चर्चा का विषय बना हुआ है। जोधपुर संभाग में अतिरिक्त रजिस्ट्रार के रूप में इस अधिकारी का कार्यकाल सहकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जाना जाता है। जानकारों का कहना है कि जो अधिकारी पूरे संभाग की नीतियों का कुशल संचालन कर चुका है उसे अचानक जिला स्तरीय पद (उप रजिस्ट्रार) पर स्थानांतरित करना प्रशासनिक दक्षता को नजरअंदाज करना है। यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि सहकारिता आंदोलन की गतिशीलता पर भी विपरीत प्रभाव डालेगा।

नीतिगत शुचिता और गिरती साख: सुधार की तत्काल आवश्यकता

10 जुलाई 2026 के ‘ऑफलाइन’ तबादला आदेशों ने सहकारिता विभाग में बढ़ते बाहरी हस्तक्षेप और प्रशासनिक शुचिता के पतन को उजागर कर दिया है। विभाग द्वारा निर्धारित डिजिटल मानदंडों की खुलेआम अनदेखी और ‘बैकडेट’ में जारी इन आदेशों की कार्यप्रणाली ने न केवल विभागीय अनुशासन को तोड़ा है, बल्कि संपूर्ण सहकारी आंदोलन की प्रतिष्ठा को भी धूमिल किया है।यदि समय रहते इस स्वेच्छाचारिता और प्रशासनिक मर्यादाओं के गंभीर उल्लंघन पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो विभाग की साख को जो अपूरणीय क्षति होगी, उसकी भरपाई करना असंभव होगा। यह संदेहास्पद ‘हाइब्रिड’ तबादला प्रणाली न केवल प्रशासनिक दक्षता को कुचल रही है, बल्कि इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम पूरे सहकारी आंदोलन को भुगतने पड़ेंगे। विभाग को तत्काल प्रभाव से पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था बहाल कर अपनी गिरती साख को बचाना होगा।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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