Home जयपुर सहकारिता विभाग में बड़ी कार्रवाई: टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता भंडार के तत्कालीन महाप्रबंधक सेवा से बर्खास्त

सहकारिता विभाग में बड़ी कार्रवाई: टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता भंडार के तत्कालीन महाप्रबंधक सेवा से बर्खास्त

सार 

Jaipur : सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने टोंक सहकारी भंडार के तत्कालीन जीएम करुणेश कुमार सोनी को करीब 4.80 रुपये करोड़ के गबन और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों में सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

विस्तार 

जयपुर | डिजिटल डेस्क | 16 मई | सहकारिता विभाग द्वारा एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।  सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) डॉ. समित शर्मा ने एक निर्णय लेते हुए टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के तत्कालीन महाप्रबंधक (GM) करूणेश कुमार सोनी को सेवा से बर्खास्त (Dismissed) कर दिया है। विभागीय जांच में आरोपी अधिकारी के खिलाफ करोड़ों रुपये के गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अनधिकृत भुगतान करने तथा संस्थान को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाने जैसे बेहद गंभीर मामले पूरी तरह प्रमाणित पाए गए हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं सहकारिता मंत्री श्री गौतम कुमार दक की मंशा के अनुरूप सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है, जिसके तहत यह सख्त कदम उठाया गया है।

यह पूरा मामला वर्ष 2012-13 से 2015-16 के दौरान का है, जब टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार के वित्तीय लेन-देन में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आईं थीं। विस्तृत जांच में लगभग 4.80 करोड़ रुपये की अमानत राशि के गबन और उसके दुरुपयोग के आरोप सही पाए गए। इसके अलावा बैंक खातों से नकद राशि का कपटपूर्वक आहरण करने, अनधिकृत व्यक्तियों को भुगतान कर भंडार को गंभीर आर्थिक व शास्ति की हानि पहुंचाने के मामले भी सिद्ध हुए हैं। तत्कालीन महाप्रबंधक पर विभिन्न व्यक्तियों व संस्थाओं से अमानतें प्राप्त कर उन्हें भंडार की लेखा पुस्तिकाओं में दर्ज नहीं करने, राशि का षड़यंत्रपूर्वक अपहरण कर भंडार की साख को नुकसान पहुंचाने, कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने तथा राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने के आरोप भी प्रमाणित हुए। इन गंभीर वित्तीय अपराधों पर सख्त रूख अपनाते हुए राजस्थान सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन कन्ट्रोल एंड अपील) नियम 1958 के नियम 16 के तहत यह बर्खास्तगी की गई है।

यह प्रकरण पहली बार वर्ष 2015 में प्रकाश में आया था, जिसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच शुरू हुई और पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किए गए। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही के चारों प्रमुख आरोप प्रमाणित माने गए। पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का गहन परीक्षण, बैंक रिकॉर्ड का सत्यापन तथा संबंधित पक्षों की व्यक्तिगत सुनवाई की गई, जिससे संस्था को आर्थिक एवं प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हुए नुकसान की पुष्टि हुई।

विभाग की प्राथमिकता और भविष्य के लिए कड़ा संदेश

सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया है कि सहकारी संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सुशासन सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग द्वारा भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के सभी मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। सहकारी संस्थाएं आमजन और किसानों के विश्वास का एक महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन सचिव ने यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के गंभीर मामलों में कठोर कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। सहकारी संस्थाओं के भीतर वित्तीय अनुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से अब नियमित ऑडिट, गहन निरीक्षण एवं निगरानी तंत्र को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि पूरी सहकारिता व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हो सके।

प्रकाश वैष्णव 25 सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं । सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र जय सत्यपुर से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कर लोक सूचना एवं क्षेत्र का साथी समाचार पत्र में सेवा दी । उसके बाद पिछले कई सालों से मारवाड़ का मित्र हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र का संचालन निरंतर कर रहें हैं ।

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