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31 मार्च तक बिना बायोमैट्रिक बाधा के ऋण ले सकेंगे किसान; विभाग ने जारी किया आदेश

सार 

Jaipur : ‘मारवाड़ का मित्र’ की खबर के बाद जागा विभाग, जीआरए कमेटी की अनुशंसा पर जारी हुए नए आदेश। राजस्थान में बायोमैट्रिक सत्यापन (अंगूठे का निशान) विफल होने पर अब किसानों का सहकारी ऋण नहीं रुकेगा। CCB प्रबंध निदेशक इसे ‘स्किप’ कर सकेंगे, जिससे हजारों किसानों को 31 मार्च 2026 तक राहत मिलेगी।

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फोटो सोर्स: एआई जेनरेटेड। 

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 25 फरवरी | प्रदेश के उन हजारों किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर है जो तकनीकी कारणों से सहकारी ऋण प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना कर रहे थे। सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) कार्यालय के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग) ज्योति गुप्ता द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, अब बायोमैट्रिक सत्यापन (अंगूठे का निशान) सफल न होने की स्थिति में किसानों का ऋण नहीं रुकेगा। विभाग ने जीआरए कमेटी की अनुशंसा पर ऐसे प्रकरणों में बायोमैट्रिक अनिवार्यता को ‘स्किप’ करने यानी छोड़ने की अनुमति दे दी है। इसके तहत संबंधित केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक अपनी आईडी का उपयोग कर इस प्रक्रिया को ‘स्किप’ कर सकेंगे। इस महत्वपूर्ण निर्णय से वे किसान भी 31 मार्च 2026 तक बिना किसी बाधा के अपना फसली ऋण प्राप्त कर सकेंगे, जिनका फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो रहा था। इस नई व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पनप रहा असंतोष दूर होगा और ग्राम सेवा सहकारी समितियों में लंबित पड़े ऋण वितरण के मामलों का तेजी से निस्तारण हो सकेगा।

जीआरए सिस्टम की विफलता : खबर का असर

पूर्व में जीआरए (Grievance Redressal Authority) सिस्टम के प्रभावी ढंग से काम न करने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भारी असंतोष था। इसको लेकर मारवाड़ का मित्र द्वारा विशेष खबर का प्रकाशन किया गया था कि किस प्रकार बायोमैट्रिक मिलान न होने से हजारों किसान फसली ऋण योजना के लाभ से वंचित हो रहे थे। इसी समस्या की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अब बायोमैट्रिक सत्यापन को ‘स्किप’ करने का निर्णय लिया है, ताकि लंबित ऋण वितरण के मामलों का तेजी से निस्तारण हो सके।

परिचय : प्रकाश वैष्णव एक सहकारी चिंतक, विश्लेषक, स्तंभकार और पत्रकार हैं।
​पत्रकारिता अनुभव: वे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
​करियर की शुरुआत: उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत सबसे पहले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘जय सत्यपुर’ से की थी।
​अन्य सेवाएँ: इसके बाद उन्होंने ‘लोक सूचना’ एवं ‘क्षेत्र का साथी’ समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएँ दीं।
​वर्तमान दायित्व: वर्तमान में वे सहकारी आंदोलन को समर्पित प्रमुख हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र ‘मारवाड़ का मित्र’ और ‘MKM MEDIA’ समूह वेब पोर्टल के चीफ एडिटर के रूप में निरंतर संचालन कर रहे हैं।

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