सार
Rajasthan Assembly : सहकारिता मंत्री ने बताया कि किसानों को बायोमेट्रिक और आधार आधारित पारदर्शी प्रक्रिया से ऋण दिया जा रहा है। कामां में फर्जी ऋण वितरण के दोषियों पर कानूनी कार्रवाई जारी

विस्तार
जयपुर, 16 फरवरी। प्रदेश में को-ऑपरेटिव सोसायटीज के माध्यम से किसानों को पारदर्शी तथा सुरक्षित रूप से ऋण वितरित किया जा रहा है। सहकारिता मंत्री गोतम कुमार ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि किसानों को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के पश्चात ही ग्राम सेवा सहकारी समिति द्वारा ऋण राशि वितरित की जा रही है। ऋण स्वीकृति तथा खाते में राशि जमा होने की सूचना किसान को एसएमएस के माध्यम से मिल रही है। इस व्यवस्था से फर्जी ऋण वितरण की संभावनाओं पर भी अंकुश लगा है।
उन्होंने जानकारी दी कि सहकारी समिति से लोन लेने के लिए किसान को अपने क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समिति की सदस्यता ग्रहण कर समिति में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाने होते हैं। इसके बाद ऋण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ऋण आवेदन किया जाता है। संपूर्ण प्रक्रिया आधार आधारित अभिप्रमाणन के जरिए संपन्न होती है।
सहकारिता राज्यमंत्री श्री गोतम कुमार प्रश्नकाल के दौरान सदस्य श्री संदीप शर्मा द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि विगत सरकार के कार्यकाल में भरतपुर केंद्रीय सहकारी बैंक की कामां शाखा की सुनेहरा, सतवास और गांवड़ी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में किसानों के नाम से फर्जी ऋण वितरण की शिकायत मिली। इसकी जांच उपरांत 7 जुलाई 2025 को समिति के व्यवस्थापक, शाखा प्रबंधक को अनियमित ऋण वितरण में दोषी पाया गया। इस प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस प्रकरण में सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 57 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस थाना कामां में एफआईआर दर्ज
सहकारिता मंत्री ने बताया कि सुनहरा व सतवाड़ा ग्राम सेवा सहकारी समितियों में फर्जी वितरण व गबन के संबंध में तत्कालीन व्यवस्थापक, समिति संचालक मंडल एवं तत्कालिक बैंक शाखा प्रबंधक के विरुद्ध पुलिस थाना कामां में 14 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज करवाई गई है। साथ ही, दो अन्य समितियों गढ़ अजान तथा बमनवाड़ी में भी ऋण वितरण में अनियमितता पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। वर्तमान में इन प्रकरणों में अनुसंधान जारी है। इससे पहले विधायक श्री शर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सहकारिता राज्यमंत्री ने बताया कि विगत पांच वर्षों में कोटा सम्भाग की को-ऑपरेटिव सोसायटीज में किसानों के नाम से फर्जी ऋण लेने का कोई प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है।


