खुली ’कुंभकर्णी’ नींद : केंद्रीय सहकारी बैंकों की 200 करोड़ की राशि को लेकर फिर हुआ पत्राचार

सार 

Rajasthan : कर्ज माफी के विलंब भुगतान पर ब्याज देने की घोषणा के तहत 200 करोड़ की राशि एक साल पूर्व राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) के पीडी खाते हुई थी जमा, अब खुली ’कुंभकर्णी’ नींद, फिर पीडी खाते की राशि को लेकर हुआ पत्राचार

फोटो सोर्स : एआई जेनरेटेड। 

विस्तार 

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 29 जनवरी | प्रदेश में कर्ज माफी के विलंब भुगतान पर 8 प्रतिशत ब्याज देने की घोषणा के तहत एक साल पूर्व 200 करोड़ की राशि राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) के पर्सनल डिपॉजिट (पीडी) अकाउंट में सरकार ने जमा की थी । अब इस राशि को लेकर एक बार फिर पत्राचार का दौर शुरू हुआ है । दरअसल राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक (SLDB) को 95 लाख एवं 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) को 199 करोड़ 55 लाख की राशि का भुगतान करने के क्रम में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) प्रबंध निदेशक ने हाल ही में सहकारिता विभाग पंजीयक (Rcs) कार्यालय के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग) को एक पत्र भेजा हैं । जो ‘सहकार से समृद्धि’ लाने वाले सहकारिता विभाग में फाइलों की सुस्त चाल को उजागर करता हुआ नजर आ रहा है । हैरानी की बात यह है कि जिस 200 करोड़ की राशि को सहकारिता विभाग ने 21 मार्च 2025 को एक आदेश जारी कर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) के पीडी खाते में हस्तांतरित किया था । वह भारी-भरकम राशि पिछले करीब एक साल से राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के पीडी खाते में ’आराम’ फरमा रही थी। जबकि राज्य सरकार की कर्ज माफी के विलंब भुगतान पर ब्याज देने की घोषणा के तहत अब तक 765 करोड़ की भारी-भरकम राशि बकाया बताई जा रही है। इस राशि के प्रावधान के चलते प्रदेश के अधिकांश केंद्रीय सहकारी बैंक वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक हानि में चले गए हैं । अब 765 करोड़ की राशि के आवंटन को लेकर केंद्रीय सहकारी बैंकों के कर्मचारी 9 फरवरी को जयपुर में धरना प्रदर्शन करने की तैयारी में जुट गए हैं ।

एक्सपर्ट व्यू : संचित हानि में केंद्रीय सहकारी बैंक, फिर भी कार्यशैली में ’नवाबी’ ठाट

विडंबना देखिए कि राजस्थान के अधिकतर केंद्रीय सहकारी बैंक वर्तमान में संचित हानि और एनपीए की मार झेल रहे हैं। बैंक अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं, लेकिन जब सरकार से पैसा मिल जाता है, तो उसे जरूरतमंद तक पहुंचाने में साल भर लगा दिया जाता है। इस देरी की वजह से न केवल केंद्रीय सहकारी बैंकों की बैलेंस शीट बिगड़ती है, बल्कि पूरी सहकारी व्यवस्था की साख पर भी बट्टा लगता है। ताजा आदेश के मुताबिक, अब बाड़मेर को 21.26 करोड़ और जोधपुर को 13.46 करोड़ जैसे बड़े भुगतान होने हैं। अगर यही मुस्तैदी साल भर पहले दिखाई गई होती, तो शायद इन बैंकों की वित्तीय स्थिति आज कुछ और होती। पर साहब, यह सहकारी व्यवस्था है, यहाँ काम ’फुर्ती’ से नहीं, ’फुरसत’ से होता है!

सूची लंबी है

पीडी खाते में पड़ी 200 करोड़ की राशि की सूची लंबी है, अजमेर से लेकर उदयपुर तक और बाड़मेर से लेकर झालावाड़ तक। बाड़मेर के लिए 21.26 करोड़ और जोधपुर के लिए 13.46 करोड़ जैसी बड़ी राशियां अटकी हुई हैं। केंद्रीय सहकारी बैंकों को उम्मीद थी कि कर्जमाफी का ब्याज उन्हें राहत देगा, लेकिन यहाँ तो फाइल खुद कर्जदार नजर आती है वक्त की और लालफीताशाही की । डिजिटल इंडिया के दौर में जब पलक झपकते ही पैसा ट्रांसफर हो जाता है, वहाँ राजस्थान का सहकारिता विभाग एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक पैसा पहुँचाने में साल-दर-साल का समय ले रहा है। खैर, देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत भी यहाँ फीकी है, क्योंकि यहाँ तो ’देर’ ही सिस्टम की पहचान बन चुकी है। अब देखना यह है कि 19 जनवरी 2026 को निकला यह आदेश वास्तव में कब बैंकों के खातों में ’क्रेडिट’ का मैसेज बनकर टपकेगा, या फिर अगली किसी तारीख का इंतजार करेगा।

संगठन ने आंदोलन की रणनीति तैयार की

आगामी 11 फरवरी को पेश होने वाले राज्य बजट से पहले संगठन ने आंदोलन की रणनीति तैयार की है। इसके तहत आगामी 4 फरवरी को प्रदेश के सभी जिलों में स्थित सीसीबी के प्रधान कार्यालयों पर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके पश्चात, 9 फरवरी को राजधानी जयपुर में राज्य स्तरीय विशाल रैली और प्रदर्शन आयोजित होगा, जिसमें प्रदेश की केंद्रीय सहकारी बैंकों के कार्मिक शामिल होंगे।
-सूरजभानसिंह आमेरा सहकार नेता

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