सार
जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में इफको कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें ‘सहकार से समृद्धि’ और नैनो उर्वरक पर जोर दिया गया। वहीं, पैक्स संस्थाओं पर जबरन उत्पाद टैगिंग थोपने और आर्थिक नुकसान का गंभीर मुद्दा छाया हुआ है ।
विस्तार
जालोर, |जिला ङेस्क 7 अक्टूबर |केंद्रीय सहकारी बैंक, जालोर के सभागार में बुधवार को इफको (IFFCO) जालोर के तत्वावधान में सहकारी व्यवस्थापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जालोर, सायला और आहोर ब्लॉक की सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान इफको (IFFCO) के अधिकारियों ने ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत किए जा रहे नवाचारों और रबी (Rabi) सीजन की उर्वरक आपूर्ति पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम में इफको (IFFCO) नई दिल्ली के निदेशक रामनिवास गडवाल ने संस्था द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रकाश डाला। वहीं, इफको (IFFCO) के राज्य विपणन प्रबंधक (State Marketing Manager) (राजस्थान) पृथ्वीराज सियाग ने आगामी रबी (Rabi) सीजन के दौरान जिले में उर्वरक की सुचारू आपूर्ति व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके अलावा, इफको (IFFCO) जयपुर के डॉ. अजय प्रताप सिंह ने इफको (IFFCO) के विभिन्न नवीन उत्पादों और सहकारी समितियों के व्यवसाय वर्गीकरण (Business Classification) के लिए बनाई गई कार्य योजना (Action Plan) के बारे में जानकारी दी।बैंक के प्रबंध निदेशक (Managing Director) नारायणसिंह चारण ने इफको (IFFCO) द्वारा समितियों में लाए जा रहे नवाचारों, विशेषकर किसान फाइनेंस (Farmer Finance) के माध्यम से ऋण (Loan) और नैनो (Nano) उर्वरक के प्रयोग की उपयोगिता पर जोर दिया। इस अवसर पर बैंक के अधिकारियों और इफको (IFFCO) प्रतिनिधियों ने सहकारिता के सुदृढ़ीकरण और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का सफल संचालन क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Officer) श्रेयांश गुप्ता ने किया। इस दौरान उप रजिस्ट्रार सुनील वीरभान बैंक के अतिरिक्त अधिशाषी अधिकारी (Additional Executive Officer) सुभाष चंद्र, हिंगलाजदान, श्रीमती जमना मेघवाल, नरेंद्र कुमार, गेंनाराम सहित विभिन्न ब्लॉकों के निरीक्षक (Inspectors) और समितियों के व्यवस्थापक मौजूद रहे।
उर्वरक आपूर्ति और टैगिंग पर गंभीर मुद्दा छाया; सहकारी संस्थाओं पर जबरन उत्पाद थोपने का आरोप।
जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में आयोजित बैठक के दौरान एक ओर जहां इफको (IFFCO) के अधिकारी अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर जिले की सहकारी संस्थाओं पर जबरन उत्पाद टैगिंग (Tagging) थोपने का गंभीर मामला भी छाया हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले की करीब पचास प्रतिशत पैक्स (PACS – Primary Agricultural Credit Society) स्तर की सहकारी संस्थाएं इफको (IFFCO) के टैगिंग (Tagging) उत्पादों की आपूर्ति के चलते अपना रिजर्व कोष (Reserve Fund) तक खर्च कर चुकी हैं।इस संबंध में जब अंशधारकों (Shareholders) की ओर से खंडीय कार्यालय (Zonal Office), सहकारिता विभाग यानी अतिरिक्त रजिस्ट्रार (Additional Registrar) सहकारी समितियां खंड जोधपुर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई, तो खंडीय कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जिले की सहकारी संस्थाओं (PACS) को हुई आर्थिक हानि (Financial Loss) के उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।बैठक के दौरान जहां एक तरफ इफको (IFFCO) के अधिकारियों द्वारा नैनो (Nano) उर्वरक और अन्य योजनाओं पर बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे थे, वहीं स्थानीय स्तर पर पैक्स (PACS) संस्थाओं को हो रहे नुकसान और जबरन थोपी जा रही टैगिंग (Tagging) की प्रवृत्ति को लेकर सहकारिता विभाग के खंडीय कार्यालय, जोधपुर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय सहकारी संस्थाओं से जुड़े अंशधारकों (Shareholders) ने पिछले वर्षों में टैगिंग (Tagging) उत्पाद आपूर्ति के इस मामले में उच्च स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है, ताकि पैक्स (PACS) संस्थाओं को वित्तीय संकट (Financial Crisis) से बचाया जा सके।



