सार
Jaipur : ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने लंबित मांगों और ‘कैडर कमेटी’ की रिपोर्ट न आने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया हैं

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 12 मार्च | राजस्थान में ग्रामीण इलाकों से संबंधित सहकारिता विभाग की योजनाएं एवं सेवाएं एक बार फिर बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी हैं। अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के रुख से नाराज प्रदेश के पैक्स कर्मचारियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। असल में, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, जयपुर के आह्वान पर प्रदेश की सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया गया है। इस बहिष्कार के चलते ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण योजनाएं ठप होने की कगार पर हैं, जिससे आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। संघर्ष समिति द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कर्मचारियों का यह आक्रोश अचानक नहीं फूटा है। इससे पहले 18 सितंबर 2025 को भी कार्य बहिष्कार की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। उस समय विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और ’कैडर कमेटी’ के गठन के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने बहिष्कार को स्थगित कर दिया था। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी जब कैडर कमेटी की रिपोर्ट और मांगों पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, तो कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया। इसी क्रम में 9 मार्च 2026 को जयपुर के नेहरू सहकार भवन पर हजारों कर्मचारियों ने विशाल प्रदर्शन कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। उसी दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार ही अंतिम विकल्प है।
कौन-सी सेवाएं होंगी सीधे तौर पर प्रभावित?
पैक्स कर्मचारियों के इस कार्य बहिष्कार से सहकारिता विभाग की पैक्स को डिजिटल बनाने वाली योजना सहित किसानों और गोपालकों से संबंधित योजनाओं पर सीधा प्रहार होगा। मुख्य रूप से पैक्स कंप्यूटराइजेशन, ब्याज मुक्त ऋण योजना, गोपाल किसान क्रेडिट कार्ड योजना, समर्थन मूल्य पर खरीद योजनाएं प्रभावित होंगी । संघर्ष समिति ने अपने कर्मचारियों को एकजुट रखते हुए प्रशासन को भी चेतावनी दी है। जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि बहिष्कार के दौरान किसी भी पैक्स कर्मचारी पर प्रशासन या विभाग के अधिकारियों द्वारा काम पर लौटने के लिए अनुचित दबाव बनाया जाता है या डराया-धमकाया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत राज्य स्तरीय संघर्ष समिति को दी जाए। समिति ऐसे मामलों में सामूहिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराएगी।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पैक्स नहीं करेगी खरीद
सबसे गंभीर पहलू न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद का बहिष्कार है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि जो पैक्स समितियां समर्थन मूल्य पर खरीद केंद्र के रूप में कार्य करती हैं, वे अब दलहन और तिलहन की खरीद प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगी। संघर्ष समिति ने अतिरिक्त रजिस्ट्रार और राजफेड के क्षेत्रीय अधिकारियों को लिखित में सूचित कर दिया है कि वे खरीद के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था कर लें। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि वे खरीद कार्य में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करेंगे। इसके साथ ही, समितियों के स्तर पर बकाया कमीशन का मुद्दा भी गरमा गया है। समिति ने मांग की है कि समर्थन मूल्य खरीद का पिछला बकाया कमीशन तुरंत जारी किया जाए, अन्यथा गतिरोध समाप्त नहीं होगा।
एक्सपर्ट व्यू
फिलहाल गेंद अब राजस्थान सरकार और सहकारिता विभाग के पाले में है। यदि जल्द ही मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बनी, तो मार्च और अप्रैल के पीक सीजन में किसानों को खाद, बीज और ऋण के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्राम सेवा सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, और इनका ठप होना पूरे प्रदेश के कृषि परिदृश्य को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।


