- पंचायत समिति में लाखों का फर्जीवाड़ा, सत्तासीन आखिर क्यों चुप, पिछले चार सालों से चलता रहा फर्जीवाड़ा का मायाजाल गरीबों के पैसो पर डाका
- पंचायत समिति मे स्वच्छ भारत मिशन के तहत घरों में शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना में भी धांधली होने की आशंका अपने करीबियों के खातों में राशि जमा करने की खबर सूत्रों के हवाले से
- लंबे समय से विकास अधिकारी का पद है खाली साचौर व चितलवाना पंचायत समिति में

जालौर । 9 दिसम्बर 2021 । डिजीटल डेस्क। जिले की पंचायत समिति सांचौर में ”तु डाल डाल में पात पात वाली” कहावत इन दिनों सिद्ध हो रही है सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटने की किसी को भनक तक नहीं लगी, तो भी कुछ नहीं । जी हां, पिछले करीब दस माह से सुर्खियों में चल रहा साचोर पंचायत समिति के महा नरेगा योजना में फर्जीवाड़े गबन के मामले की जांच के नाम पर जिला प्रशासन ने मामले की जांच को ठंडे बस्ते के हवाले करने की कवायद के चलते आमजन में सोचनीय पहलू बना हुआ है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद भी सबकी चुपी आखिर क्यों? हालांकि गत दिनों जिला परिषद की आम बैठक में जालौर-सिरोही सांसद श्री देवजी एम पटेल व सांचौर प्रधान कैलाश पुरोहित ने इस मामले को सदन में उठाते हुए जांच कर दोषी कर्मचारियों पर कार्यवाही करने की मांग करने के बावजुद मामला सिर्फ बैठको तक ही सिमित रहा है । करीब दस माह बीत जाने के बाद भी जांच के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में है पत्रकारों द्वारा पूछने पर जांच चल रही है रटारटाया जबाव देकर इति श्री की जा रहीं हैं । जानकार सूत्रों का कहना हैं कि इस पूरे प्रकरण की जांच हो गई है लेकिन इसका खुलासा उच्च अधिकारी नहीं कर रहे हैं आखिर किस का दबाव है? ज्ञात रहे कि पंचायत समिति में प्लेसमेंट एजेंसी के मार्फत संविदा पर लगे कार्मिको ने वर्ष 2016-17,18 में गरीब परिवार को रोजगार देने की महा नरेगा योजना में हजारो की तादाद में जाब कार्ड बना कर रोज़गार देने के लिए संचालित योजना का फायदा उठाते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर, सविदा कार्मिको ने अपने रिश्तेदारों – करीबियों के फर्जी तरीके से जॉब कार्ड तैयार कर बैंक खातों में लाखों रुपये डालने के फर्जीवाडे का खेल पिछले तीन से चार वर्षा से चलता रहा और पंचायत समिति के अधिकारी कर्मचारियों को कानो कान भनक तक नहीं लगी । लेकिन कहावत है ‘‘चोर के ढाई पैर’’ यह मामला फरवरी माह में पंचायत समिति के कर्मचारियों के सोशल मीडिया ग्रुप पर वायरल होने के उपरांत भी पंचायत समिति के अधिकारियो व कर्मचारियों ने मामला दबा कर रखने की कोशिश पुरजोर तरीके से करने के बावजुद भी समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद आनन-फानन में कार्यवाहक विकास अधिकारी तुलसाराम पुरोहित ने मार्च माह में सांचौर थाने में संविदा पर लगे कंप्यूटर ऑपरेटर सहित चार कार्मिकों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज करवाया था, जो जांच के नाम पर पिछले करीब दस माह से कछुआ चाल से फाईलो में दबा पड़ा है । बड़े मजे की बात तो यह है कि इतने वर्षों से गबन फर्जीवाड़ा चलता रहा लेकिन किसी अधिकारी कर्मचारी को इस बारे में भनक तक नहीं लगी आखिर क्यों ? किसके संरक्षण के सहारे पंचायत समिति में लंबे समय से विकास अधिकारी का पद भी खाली रहने और कार्यवाहक विकास अधिकारी के भरोसे लम्बे समय से चल रहीं पंचायत समिति अंतर्गत स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना में भी भारी भ्रष्टाचार धांधली होने की आशंका की जानकारी सुत्रो के हवाले से मिल रहीं हैं । क्योंकि इन दोनों योजना पर लगे संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटरों को मामला उजागर होने के बाद से हटाया दिया गया है। दस माह बीत जाने के बाद इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं होने से आमजन की निगाहें स्थानीय विधायक और श्रम मंत्री श्री सुखराम विश्नोई पर टिकी है। क्या माननीय मंत्री जी इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाएगे ।
हालांकि पंचायत समिति जांच कमेटी ने करीब 18 लाख का गबन फर्जीवाडे का मामला जांच में सामने लाया है अगर सबकी जांच की जाए तो यह मामला करोड़ तक पहुंच सकता है, आखिर इस मामले को दबाने में कौन लगा है? मारवाड़ का मित्र व स्थानीय समाचार पत्र जालोर टुडे ने जब पड़ताल की तो सामने आया की पंचायत समिति में विकास के नाम पर भारी धांधली हो रही है इसकी निष्पक्ष जांच की जाए तो कई भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं।


