सार
RBI रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में बढ़ती लागत के दबाव के बावजूद राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों ने जमा, ऋण और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ ग्रामीण ऋण व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर, अल्पकालिक ग्रामीण सहकारी बैंकिंग ढांचे के क्रमिक सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया
विस्तार
नई दिल्ली । डिजिटल डेस्क | 4 जनवरी | देश के 34 राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) ने वर्ष 2024-25 के दरमियान जमा और ऋण में स्थिर वृद्धि दर्ज की है । साथ ही इन सहकारी बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में निरंतर सुधार देखने को मिला है । हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ‘ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024-25’ रिपोर्ट जारी की गई है । जिसमें वर्ष 2025 के मार्च माह के अंत तक देश में 34 राज्य सहकारी बैंक (StCBs) 2146 शाखाओं के माध्यम से एवं 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को 13825 शाखाओं के माध्यम से कार्यरत बताया गया है । इसके अलावा ये सहकारी बैंक 1.07 लाख से अधिक प्राथमिक कृषि ऋणदात्री सहकारी समितियां अर्थात् Pacs के माध्यम से देश के 6.5 लाख से अधिक गावों में सेवाएं प्रदान कर रहें हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) की बैलेंश शीट (Balance sheet) 7.7 प्रतिशत बढ़कर 5.26 लाख करोड़ हो गई है । जबकि इस अवधि में जमा (Deposits) 6.8 प्रतिशत बढ़कर 2.74 लाख करोड़ रुपये एवं उधारी (Borrowings) 9.5 प्रतिशत बढ़कर 1.90 लाख करोड़ रुपये हो गई, जिसमें नाबार्ड से प्राप्त पुनर्वित्त का अहम योगदान रहा।
सकल एनपीए का अनुपात घटा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ‘ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024-25’ रिपोर्ट के अनुसार, सहकारी बैंकों की ऋण एवं अग्रिम 8.6 प्रतिशत बढ़कर 3.20 लाख करोड़ रुपये हो गए, जिनमें कृषि ऋणों की हिस्सेदारी 43.4 प्रतिशत रही। वही ऋण वृद्धि, जमा वृद्धि से अधिक रहने के कारण क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (Credit-deposit ratio) बढ़कर 116.7 प्रतिशत हो गया। परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार चौथे वर्ष सुधार दर्ज किया गया, जहां सकल एनपीए अनुपात घटकर 4.8 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए अनुपात 2.0 प्रतिशत पर स्थिर रहा। हालांकि बढ़ती परिचालन लागत के कारण लाभ में कुछ कमी आई, फिर भी 34 में से 32 राज्य सहकारी बैंक लाभ में रहे।
3.0 प्रतिशत पर आया शुद्ध एनपीए अनुपात
ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की बैलेंस शीट 8.1 प्रतिशत बढ़कर 8.28 लाख करोड़ रुपये हो गई। जमा 6.8 प्रतिशत बढ़कर 5.09 लाख करोड़ रुपये रही, जिसमें 40.5 प्रतिशत हिस्सा चालू और बचत (CASA) जमा का रहा। ऋण एवं अग्रिम 7.9 प्रतिशत बढ़कर 4.55 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि कुल ऋण में कृषि ऋणों की हिस्सेदारी 53.6 प्रतिशत रही। वर्ष के दौरान जिला सहकारी बैंकों का शुद्ध लाभ 12.1 प्रतिशत बढ़कर 2,124 करोड़ रुपये हो गया। परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार पांचवें वर्ष सुधार के साथ सकल एनपीए अनुपात घटकर 8.7 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात 3.0 प्रतिशत पर आ गया। पूंजी पर्याप्तता अनुपात लगभग 12 प्रतिशत पर स्थिर रहा।



