सार
Rajasthan : एक साथ 140 सवाल दर्ज होना यह दर्शाता है कि सहकारिता विभाग और सहकारी बैंकों में जमीनी स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं है। विधायकों के इन सवालों ने विभाग की पारदर्शिता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 7 फरवरी | राजस्थान विधानसभा के वर्तमान सत्र में सहकारिता विभाग और केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) की कार्यप्रणाली को लेकर भारी गहमागहमी रहने वाली है। विधायकों (MLA) ने सहकारिता विभाग से संबंधित कुल 140 तारांकित और अतारांकित प्रश्न दर्ज करवाए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से अपेक्स और केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) में प्रबंध निदेशकों (MDs) की पात्रता, फर्जी डिग्रियों के सहारे लिए गए आर्थिक लाभ और आर्थिक संकट के बावजूद बांटे गए एरियर जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। दरअसल पूर्व मंत्री और विधायक शांति धारीवाल ने बैंकों में एमडी की नियुक्तियों को लेकर तारांकित सवाल किया है। धारीवाल ने पूछा है कि अपेक्स और केंद्रीय सहकारी बैंकों में एमडी की नियुक्ति के लिए आरबीआई की ’फिट एंड प्रॉपर’ गाइडलाइन क्या है? कितने बैंकों में आरबीआई की बिना मंजूरी के एमडी लगाए गए हैं और कितने ऐसे हैं जो पात्रता पूरी नहीं करते? क्या सरकार इन अपात्र एमडी को हटाने का विचार रखती है? हालांकि विधायक शांति धारीवाल ने पिछली बार विधानसभा के चतुर्थ सत्र के दौरान भी यही सवाल पूछा था, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने फिर से सवाल लगाकर विभाग से जवाब मांगा है।
पूर्व सहकारिता मंत्री की विडंबनाः मांगनी पड़ी केवीएसएस की ऑडिट रिपोर्ट
इस सत्र की सबसे बड़ी सुर्खी डेगाना विधायक या यूं कहें पूर्व सहकारिता मंत्री अजय सिंह का प्रश्न बना है। यह मामला न केवल प्रशासनिक है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद कटाक्षपूर्ण है। अजय सिंह, जो स्वयं पिछली भाजपा सरकार में सहकारिता विभाग के मंत्री रह चुके हैं और विभाग की बारीकियों को समझते हैं, आज उन्हें अपनी ही विधानसभा डेगाना (नागौर) की क्रय-विक्रय सहकारी समिति (केवीएसएस) के आय-व्यय का विवरण प्राप्त करने के लिए विधानसभा में प्रश्न लगाना पड़ रहा है। अजय सिंह ने केवीएसएस में वर्ष 2021 से 2025 तक के खर्चों का हिसाब मांगकर यह संकेत दिया है कि सहकारी संस्थाओं के भीतर सूचनाओं की पारदर्शिता इस कदर खत्म हो चुकी है कि एक पूर्व मंत्री को भी ’मेज पर विवरण’ रखवाने की संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करना पड़ रहा है।
फर्जी डिग्री से वेतन वृद्धि का बड़ा खुलासा
सहकारी बैंकों में फर्जी डिग्रियों के सहारे पदोन्नति और वेतन वृद्धि लेने का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। विधायक कालीचरण सराफ और चेतन पटेल कोलाना ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। असल में विधायक कालीचरण सराफ ने सवाल उठाया कि अपेक्स बैंक में फर्जी डिग्री के आधार पर वेतन वृद्धि लेने वाले अधिकारियों की संख्या कितनी है और उनके खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई हुई? जबकि विधायक चेतन पटेल कोलाना ने विशेष रूप से MCA और MSc-IT की फर्जी डिग्रियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या वेतन वृद्धि देने से पहले डिग्रियों की जांच कराई गई थी? साथ ही, फर्जी डिग्री से अब तक कितनी राशि एरियर के रूप में डकारी गई, इसका विवरण भी सदन की मेज पर रखने की मांग की।
जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक की आर्थिक स्थिति और वेतन समझौता
विधायक श्रीमती गीता बरवड़ ने जोधपुर केंद्रीय सहकारी बैंक में वित्तीय कुप्रबंधन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया किः बैंक की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद कर्मचारियों को 15वें और 16वें वेतनमान के तहत करोड़ों रुपये का भुगतान और एरियर कैसे दे दिया गया? क्या सरकार इस भारी-भरकम भुगतान की जांच के लिए किसी विशेष समिति के गठन पर विचार कर रही है? उन्होंने अधिकारीवार वेतन और एरियर का पूरा ब्यौरा सदन के माध्यम से सहकारिता विभाग से मांगा है।
एक्सपर्ट व्यू : सबकी नजरें जवाब पर टिकी
वाह! राजस्थान की सहकारिता का क्या कहना? यहाँ ‘फिट एंड प्रॉपर’ के नाम पर ‘अनफिट’ का बोलबाला है। गजब की विडंबना है—पूर्व मंत्री को अपने ही घर (KVSS) का हिसाब माँगने के लिए विधानसभा का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। फर्जी डिग्रियों से ‘ज्ञान’ बढ़े न बढ़े, वेतन और एरियर जरूर बढ़ गया। बैंक भले ही कंगाल हों, पर अपात्रों के लिए खजाना हमेशा खुला है। इसे कहते हैं ‘सहकारिता’—मिल-जुलकर मलाई खाना! अब सबकी नजरें विभाग के जवाब पर टिकी हैं कि क्या वह इन कथित घोटालों और नियमों के उल्लंघन पर कोई सख्त कदम उठाएगा । सहकारिता विभाग के इन 140 सवालों ने विभाग के अधिकारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।


