एफ.आई.जी. पोर्टल ने फिर लगाई डूबकी….?

डूंगरपुर जिले की आरा लैम्पस का दृश्य

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 27 दिसम्बर | प्रदेश में “सहकार से समृद्धि” के लिए कई प्रकार के दांवे किए जा रहें हैं, केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार सहकारिता के मामले में सक्रिय भूमिका अदा कर रही हैं, लेकिन राजस्थान का सहकारिता विभाग अपने पुराने ढर्रे में सुधार लाने के लिए तैयार ही नहीं हैं । इसी ही ढर्रे का सबसे बड़ा उदाहरण एफ.आई.जी. पोर्टल है। जो वर्तमान समय में फसली ऋण वितरण एवं वसूली की व्यवस्था का सत्यानाश करके बैठा हैं, यह पोर्टल पिछले 1 दिसंबर से निरंतर डुबकियाँ लगाकर किसानों को नचा रहा है। किसानों को कभी ठंड के मौसम में घंटो इंतजार तो कभी मावठ में भिगोया जा रहा है। किसान भी अपनी फसल की सुरक्षा लेने के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों से पहले ऋण लेने के लिए मजबूर हैं, क्योकि सहकारिता का एक नियम ऐसा भी हैं, जहां रबी सीजन में जिन किसानों को ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण प्राप्त हुआ, उन्ही किसानों का प्रीमियम ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर से फसल बीमा कंपनी को भिजवाया जाएगा, वही फसल बीमा करवाने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित है। लेकिन एफ.आई.जी. पोर्टल नहीं चलने की वजह से किसानों की ना तो समय पर पूरानी वसूली जमा हो पा रही हैं और ना ही किसानों को इस सीजन में ऋण मिल पा रहा है। सरकार के पास एफ.आई.जी. पोर्टल के अलावा अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का भी अभाव हैं।  किसानों को रबी सीजन में  12 हजार करोड़ ऋण वितरण करने का लक्ष्य कहां तक पहुंच पाएगा, यह तो राज्य स्तरीय समारोह में अग्रणी रहने वाले अधिकारी और अपेक्स बैंक ही बता पाएंगे………?

किस खता की सजा भुगत रहा ठंड के मौसम में सोसायटी के आगे एफआईजी पोर्टल चलने के इंतजार में किसान

जालोर जिले की भूति Pacs का दृश्य
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बालोतरा जिले की कुंडल Pacs का दृश्य
जालोर जिले की घाणा Pacs का दृश्य
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