सार
Sirohi : जिले की 59 PACS-LAMPS में प्रोम खाद खरीद में अनियमितता का खुलासा हुआ है। उप रजिस्ट्रार की जांच में नियमों के विरुद्ध निजी कंपनियों से महंगी दरों पर खाद खरीदने और समितियों को आर्थिक नुकसान पहुँचाने की पुष्टि हुई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों पर अनुशासनात्मक एक्शन के निर्देश

विस्तार
सिरोही । डिजिटल डेस्क | 8 अप्रैल | राजस्थान के सिरोही जिले में ग्राम सेवा सहकारी समितियों (Pacs) द्वारा प्रोम (PROM) खाद की खरीद में हुए कथित अनियमितता का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल गया है। हाल ही में उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सिरोही जयदेव देवल ने राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 55 (5) के तहत सिरोही जिले की 59 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में गत पांच सालों के दौरान हुई प्रोम खाद की जांच का परिणाम जारी करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं । दरअसल, अक्टूबर 2024 में सिरोही जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में खाद खरीद के दौरान हुए भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सहकारिता विभाग ने एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया था । इस टीम में जालोर उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कार्यालय के निरीक्षक (कार्यकारी) श्रवण कुमार प्रजापत और विशेष लेखा परीक्षक कार्यालय के तीन निरीक्षक (ऑडिट) सुरेश कुमार सारस्वत, किशोर सिंह राजपुरोहित व हुकम सिंह शामिल थे ।
वही इस जांच का मुख्य बिन्दु वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच 59 ग्राम सेवा सहकारी समितियां द्वारा निजी कंपनियों से की गई प्रोम खाद की खरीद थी । हैरानी की बात यह है कि जांच दल (Investigation Team) ने अपनी रिपोर्ट में खाद खरीद की दरों में भारी अंतर होने के बावजूद इसे विशेष अंतर नहीं बताया । जब उप रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस पर स्पष्टीकरण मांगा, तो जांच अधिकारियों ने तर्क दिया कि निजी कंपनियों से खरीद के लिए कोई विभागीय गाइडलाइन्स (Guidelines) नहीं थी, इसलिए दरों में एकरूपता नहीं रही । हालांकि, उप रजिस्ट्रार ने इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने अपने आदेश में उल्लेख किया कि एक ही साल में, एक ही कंपनी (रत्नाकर) से अलग-अलग समितियों ने अलग-अलग दरों पर खाद खरीदी । न्यूनतम खरीद दर 800.75 रुपये और अधिकतम 960.75 रुपये प्रति बैग रही । हालांकि, उप रजिस्ट्रार ने अपने जांच परिणाम में जिक्र किया कि विभाग ने पहले ही 12 जुलाई 2016 और 6 अक्टूबर 2015 के परिपत्रों (Circulars) के माध्यम से निजी कंपनियों से खाद खरीदने पर रोक लगा रखी थी । उप रजिस्ट्रार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि जांच अधिकारियों ने जानबूझकर लापरवाही बरती और मिथ्या तथ्य (False Facts) पेश कर विभाग को भ्रमित करने का प्रयास किया ।
प्रमुख समितियों में अनियमितताओं के उदाहरण
जांच रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि किस प्रकार समितियों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया गया।
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चनार जीएसएस : इस समिति ने 892.50 रुपये की दर से 1250 बैग खाद खरीदा। न्यूनतम उपलब्ध दर (800.75 रुपये) की तुलना में प्रति बैग 91.75 रुपये अधिक दिए गए, जिससे समिति को 1,14,687.5 रुपये की सीधी हानि हुई । वहीं, इसे 950 रुपये में बेचने के कारण अधिकतम विक्रय दर के मुकाबले 1,87,500 रुपये की मार्जिन हानि भी दर्ज की गई ।
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बिकनवास जीएसएस : यहाँ 720 बैग खाद 892.50 रुपये की दर से खरीदा गया, जिससे 66,060 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया । विक्रय के समय इसे 1000 रुपये की दर पर बेचा गया, जिससे 72,000 रुपये की राशि कम प्राप्त हुई ।
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मावल लेम्पस : यहाँ 300 बैग की खरीद में 27,525 रुपये की अनियमितता पाई गई । 950 रुपये की विक्रय दर के कारण 45,000 रुपये की वसूली योग्य राशि मानी गई है ।
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पिण्डवाडा जीएसएस : इस समिति ने 860 बैग की खरीद पर 78,905 रुपये का अतिरिक्त भार समिति पर डाला । 1075 रुपये की दर पर बेचने के बावजूद इसे अधिकतम दर (1100 रुपये) से कम माना गया, जिससे 21,500 रुपये की हानि हुई ।
कठोर कार्रवाई: सप्लायर होंगे ब्लैकलिस्ट, अधिकारियों पर अनुशासनात्मक एक्शन
उप रजिस्ट्रार (DR) सिरोही ने इस पूरे मामले में तीन तरफा प्रहार किया है | उन्होने रत्नाकर फर्टिलाइजर, टेक्नोकिएशन इंडिया, चारभुजा एग्रो, सिक्को प्रोम सहित 8 कंपनियों को Blacklist करने के लिए विभाग को पत्राचार किया है, क्योंकि ये कंपनियां RAJFED से अनुमोदित नहीं थीं । साथ ही, लापरवाही और गलत रिपोर्ट देने के लिए चारों जांच अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए उनके नियंत्रण अधिकारियों से पत्राचार करने का जिक्र भी जांच परिणाम में किया गया है । इसके अलावा, दोषी व्यवस्थापकों के खिलाफ राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 57 के तहत प्रकरण दर्ज करन के निर्देश दिए गए है । साथ ही, सहकारिता विभाग के सर्कल निरीक्षक को जांच रिपोर्ट में वर्णित व्यवस्थापकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है ।


