सार
Bundi : सहकारी बैंक कर्मचारी संघ (NOBO/NOBW) के अधिवेशन में 17वें वेतन समझौते को जल्द लागू करने और ऋण माफी की बकाया ब्याज राशि जारी करने की मांग उठी। मांगें न मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 6 अप्रैल | भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध अखिल राजस्थान सहकारी बैंक अधिकारी एसोसिएशन एवं राजस्थान सहकारी बैंक कर्मचारी संघ (NOBO/NOBW) का प्रांतीय अधिवेशन रविवार को बूंदी के रामगंजबालाजी परिसर में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में प्रदेश भर के पदाधिकारियों ने सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति और कर्मचारी हितों को लेकर हुंकार भरी । राजस्थान प्रदेश बैंक वर्कर्स आर्गेनाइजेशन के चेयरमैन अनिल माथुर ने अधिवेशन को संबोधित करते हुए संगठन की शक्ति पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्था के हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत संगठन अनिवार्य है। उन्होंने सदस्यों को सक्रिय होकर जिला यूनिट्स को मजबूत करने और वृहद स्तर पर सदस्यता अभियान चलाने का निर्देश दिया, ताकि वर्ष 2026 में ही 17वां वेतन समझौता सफलतापूर्वक संपादित कराया जा सके । वही संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रजत सिसोदिया ने सरकार का ध्यान वर्ष 2018 और 2019 की ऋण माफी योजनाओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बकाया ब्याज अनुदान की राशि जारी न करने से सहकारी बैंक वित्तीय हानि झेल रहे है । संगठन के पदाधिकारियों ने इस विषय पर शीघ्र ही राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया। साथ ही, अतिरिक्त महासचिव शिवराज मालव ने ’सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत बैंकों के सुदृढ़ीकरण हेतु विशेष प्रावधानों की मांग की । इस दौरान अशोक माहेश्वरी (संरक्षक), रामचरण वर्मा, रतिराम समदिया, राजेंद्र सिंह, शशिशेखर, रोहित दुबे, अनुराग शर्मा सहित बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़ और टोंक जिला इकाइयों के सैकड़ों पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।
आंदोलन की चेतावनी

संघ के प्रदेशाध्यक्ष रघुवीर प्रसाद शर्मा ने कड़े शब्दों में सरकार को चेताया कि यदि ब्याज अनुदान की राशि जल्द जारी नहीं की गई और कर्मचारी हितों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले प्रदेश व्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके अलावा, अधिवेशन में बारां इकाई के रामरूप मीणा को 17वें वेतन समझौते का ड्राफ्ट तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बैंक संचालक मंडल में कर्मचारी प्रतिनिधियों के निर्वाचन की आवश्यकता पर भी जोर दिया ।
17वां वेतन समझौताः असंगत शर्तें हटाने की मांग

अधिवेशन में सबसे प्रमुख मुद्दा कर्मचारियों का वेतन समझौता रहा। महासचिव कल्याण सिंह चौहान सहित कोटा, झालावाड़ और अन्य इकाइयों के पदाधिकारियों ने मांग की कि 17वां वेतन समझौता बिना किसी विलंब के लागू हो और समझौता ड्राफ्ट से असंगत शर्तों को तुरंत हटाया जाए। वेतन वृद्धि के लिए “लगातार 3 वर्षों तक लाभ में रहने“ की अनिवार्य बाध्यता को समाप्त किया जाए ।


