सार
Rajasthan : राजस्थान सरकार द्वारा ऋण माफी और ब्याज अनुदान की 1401.56 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान न करने के विरोध में सहकारी बैंक कर्मियों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 4 फरवरी 2026 को सभी जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) पर प्रदर्शन होगा, जिसके बाद 9 फरवरी को जयपुर में प्रदेश स्तरीय धरना दिया जाएगा।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क । राजस्थान, जहाँ कृषि और पशुपालन अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, वहां जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) किसानों की जीवनरेखा माने जाते हैं। लेकिन आज ये बैंक स्वयं ‘वेंटिलेटर’ पर हैं। राज्य सरकार द्वारा की गई ‘वादाखिलाफी’ और ऋण माफी के दावों के बीच फंसी 1401 करोड़ रुपये की बकाया राशि ने इन बैंकों के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। 4 फरवरी 2026 से प्रदेश के 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों के कर्मी धरना प्रदर्शन पर उतरने जा रहे हैं। यह सिर्फ एक वेतन वृद्धि या भत्तों की लड़ाई नहीं है, बल्कि उस सहकारी साख ढांचे को बचाने का संघर्ष है, जो पैक्स (Pacs) से लेकर अपेक्स (Apex) तक फैला हुआ है।
आंदोलन का आगाज
सहकारी बैंक कार्मिकों ने अब ‘आर-पार’ की जंग का मानस बना लिया है। ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लॉइज यूनियन और ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है।
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प्रथम चरण (4 फरवरी 2026): राज्य के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रधान कार्यालयों के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारी अपने कार्यस्थलों पर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे।
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द्वितीय चरण (9 फरवरी 2026): विरोध की गूँज राजधानी जयपुर तक पहुँचेगी। नेहरू सहकार भवन पर प्रदेश स्तरीय धरना दिया जाएगा।
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हड़ताल की चेतावनी: 9 फरवरी के प्रदर्शन के दौरान ही कर्मचारी नेता पूर्णकालिक हड़ताल (Strike) का निर्णय ले सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो प्रदेश में किसानों को मिलने वाला फसली ऋण और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।

सरकार की ओर बकाया 765 करोड़ रुपये
आंदोलन का मुख्य कारण सरकार द्वारा रोकी गई वह भारी-भरकम राशि है, जो तकनीकी रूप से बैंकों का पैसा है। जहां वर्ष 2018-19 में सरकार ने किसानों की ऋण माफी कर सहकारी बैंकों को विलंब भुगतान पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की घोषणा की थी। लोकलुभावन घोषणा तो कर दी गई, लेकिन बैंकों को इसका भुगतान समय पर नहीं किया गया। एक तरफ सरकार ने वचन दिया था कि जून 2019 तक समस्त राशि का भुगतान सहकारी बैंकों को कर दिया जाएगा । दूसरी तरफ आज लगभग 7 साल बीतने को हैं, लेकिन 765 करोड़ रुपये आज भी सरकारी फाइलों में दफन हैं।
ब्याज मुक्त योजना के 635 करोड़ बकाया
सरकार किसानों को लुभाने के लिए ‘ब्याज मुक्त ऋण’ की योजना चलाती है। नियम यह है कि किसान से ब्याज नहीं लिया जाएगा, बल्कि उस ब्याज की भरपाई सरकार ब्याज अनुदान के रूप में केंद्रीय सहकारी बैंक को करेगी। बैंकों ने तो किसानों को ब्याजमुक्त ऋण दे दिया, लेकिन सरकार ने अपने हिस्से का 635.98 करोड़ रुपये का अनुदान जारी नहीं किया। इस लेटलतीफी ने बैंकों के कैश-फ्लो को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
आर्थिक मंदी की चपेट में 11 जिला सहकारी बैंक
सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा (प्रदेश महासचिव, यूनियन-एसोसिएशन) के अनुसार, सरकार की इस उदासीनता का परिणाम बेहद डरावना है। राजस्थान के 29 में से 11 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) पूरी तरह घाटे में आ चुके हैं। जब बैंकों की वित्तीय स्थिति खराब होती है, तो उनका CRAR (Capital to Risk-weighted Assets Ratio) गिर जाता है। कई बैंकों का वित्तीय स्वास्थ्य इतना खराब हो चुका है कि नाबार्ड (NABARD) ने उन्हें ‘पुनर्वित्त’ (Refinance) देने से मना कर दिया है। जब बैंक को नाबार्ड से पैसा नहीं मिलेगा, तो बैंक आगे किसानों को फसली ऋण नहीं दे पाएंगे। इससे अल्पकालीन फसली चक्र ठप होने की कगार पर है। यदि 31 मार्च 2026 (वित्तीय वर्ष समाप्ति) तक यह राशि नहीं मिली, तो ऑडिट नियमों के अनुसार बैंकों को इस बकाया राशि का ‘प्रोविजनिंग’ करना होगा। इससे शेष 18 बैंक भी घाटे में चले जाएंगे।
संगठनात्मक नेतृत्व और सरकार को चेतावनी
“सरकार को बार-बार ज्ञापन दिए गए, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और सहकारिता मंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन परिणाम शून्य रहा। सरकार ने बैंकों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन जब बैंकों को जीवित रखने की बारी आई, तो सरकार ने आंखें मूंद लीं। यह वादाखिलाफी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
एक्सपर्ट व्यू : क्या जागेगी सरकार?
सहकारी बैंकों का यह संकट केवल वित्तीय नहीं, बल्कि नैतिक भी है। जिस ‘वादों’ के दम पर सरकारें बनती हैं, उसी ‘वादाखिलाफी के कारण’ के कारण आज अल्पावधि फसली सहकारी चक्र का ढांचा ढह रहा है। 4 फरवरी का आंदोलन राजस्थान की सरकार के लिए एक चेतावनी है। क्या सरकार 1401 करोड़ रुपये जारी कर इन बैंकों को संजीवनी देगी, या फिर प्रदेश की सहकारी साख व्यवस्था को इतिहास के पन्नों में दफन होने देगी?


