सार
Rajasthan : सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अल्पकालीन फसली ऋण योजना के तहत 994.58 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान जारी किए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का आरोप है कि सरकार ऋण वितरण के बड़े लक्ष्य तो रखती है, लेकिन समय पर अनुदान न देकर सहकारी समितियों को कमजोर कर रही है।

विस्तार
जयपुर। डिजिटल डेस्क | 6 मार्च | प्रदेश में अल्पकालीन फसली ऋण (ST Laon) योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा देय 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान पेटे पिछले तीन वर्षों के दौरान 994.58 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। सहकारिता विभाग ने यह जानकारी 16वीं राजस्थान विधानसभा के पांचवें सत्र में विधायक ताराचंद जैन द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में साझा की है । दअरसल विधायक ने सरकार से पिछले तीन वर्षों में योजना के तहत जारी ब्याज अनुदान और लाभान्वित किसानों का जिलावार विवरण मांगा था। आज विधानसभा में विभाग द्वारा प्रस्तुत लिखित जवाब के अनुसार, वर्ष 2022-23 में 371.44 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 428.45 करोड़ रुपये और वर्ष 2024-25 में 194.69 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान दिया गया है। गौरतलब है कि विभाग ने अपने जवाब में वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को शामिल नहीं किया है, जबकि यह समय अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है। इस विसंगति से यह संकेत मिलता है कि संभवतः सरकार ने वर्ष 2025-26 के पेटे अभी तक ब्याज अनुदान की राशि जारी नहीं की है। वही सहकारी किसान कार्ड योजना के संबंध में पूछे गए सवाल पर सरकार ने बताया कि प्रदेश की सहकारी समितियों के माध्यम से लाखों किसानों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक किसानों को उनकी कृषि आवश्यकताओं के लिए ऋण और अन्य जरूरी सुविधाएं निरंतर उपलब्ध कराई गई हैं।
ब्याज अनुदान के रूप में 994 करोड़ का भुगतान
सहकारिता विभाग द्वारा प्रस्तुत जवाब के अनुसार, राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (RSCB) ने वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक की अवधि में केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) को कुल 994.58 करोड़ रुपये का भुगतान ब्याज अनुदान के रूप में किया है। वही, जिलेवार बात करें तो बाड़मेर (52.88 करोड़), जयपुर (61.98 करोड़), हनुमानगढ़ (52.20 करोड़) और श्रीगंगानगर (48.96 करोड़) जैसे जिलों में किसानों ने ऋण चुकाने में अधिक तत्परता दिखाई है, जिसके कारण इन जिलों को सर्वाधिक ब्याज अनुदान का लाभ मिला है।
सहकारी बैंकों को मिली 475.59 करोड़ की क्षतिपूर्ति राशि
विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय सहकारी बैंकों (CCBs) को 0.80 प्रतिशत की दर से कुल 475.59 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति ब्याज सहायता राशि जारी की गई है। इस सहायता के तहत वर्ष 2022-23 में 144.24 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 177.30 करोड़ रुपये और वर्ष 2024-25 में 154.05 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इस कुल राशि में से प्रमुख रूप से जयपुर जिले को 30.10 करोड़ रुपये, भीलवाड़ा जिले को 25.51 करोड़ रुपये और हनुमानगढ़ जिले को 25.06 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
ऋण बांटने का शोर, अनुदान में घोर कंजूसी
सहकारी आंदोलन के त्रि-स्तरीय ढांचे के विशेषज्ञों का कहना हैं कि विधानसभा में दिए गए सरकारी आंकड़े जहाँ अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार ने प्रदेश में 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण बांटने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तो तय कर दिया, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो ‘ईंधन’ यानी ब्याज अनुदान चाहिए था, उसे देने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। हालत यह है कि पिछले साल 25 हजार करोड़ का भारी-भरकम ऋण बांटने के बावजूद ब्याज अनुदान के नाम पर सहकारी समितियों के हाथ खाली रहे। इतना ही नहीं, वर्ष 2024-25 में 23 हजार करोड़ के ऋण वितरण के बदले ऊंट के मुंह में जीरे के समान महज 194 करोड़ रुपये का अनुदान देकर औपचारिकता पूरी कर ली गई। यह विडंबना ही है कि जो ग्राम सेवा सहकारी समितियां इस ब्याज अनुदान से मिलने वाली आय पर ही दम तोड़ रही हैं, सरकार उन्हीं की आर्थिक कमर तोड़ने में जुटी है। लक्ष्य का पहाड़ खड़ा करने वाली सरकार यह भूल गई कि बिना अनुदान के इन समितियों का ‘ऑक्सीजन’ बंद हो चुका है।


