सार
Jaipur : 26 दिनों से जारी पैक्स और लैम्पस कर्मचारियों की बहिष्कार अब एक जटिल मोड़ पर है। जहां कर्मचारी सड़कों पर हैं, वहीं विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि मामला अब विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सूत्रों की मानें तो अब निगाहें केंद्र सरकार की नई एकीकृत नीति पर टिकी हैं।

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 24 मार्च | राजस्थान में पिछले 26 दिनों से पैक्स (PACS) और लैम्पस (LAMPS) कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। एक तरफ जहाँ कर्मचारी अपनी प्रमुख मांग ‘कैडर निर्धारण’ को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा अब उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है । कल अपेक्स बैंक में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश के अधिकांश जिलों से चुनिंदा प्रबुद्ध व्यवस्थापकों को चर्चा के लिए बुलाया। जबकि बैठक में संघर्ष समिति के पदाधिकारी एवं संयोजक एक भी शामिल नहीं थे । इस विशेष बैठक में कैडर गठन की संभावनाओं पर विस्तार से बात हुई। हालांकि, बैठक का निष्कर्ष आंदोलनकारी कर्मचारियों के लिए निराशाजनक रहा। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कैडर निर्धारण का मामला अब पूरी तरह राज्य सरकार स्तर का है। वर्तमान परिस्थितियों और तकनीकी पेचीदगियों के कारण सहकारिता विभाग अपने स्तर पर कैडर गठित नहीं कर सकता। बैठक के दौरान अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की कि भारत सरकार का सहकारिता मंत्रालय पैक्स कर्मचारियों के लिए एक विशेष और एकीकृत नीति ला रहा है। केंद्र सरकार पूरे देश में सहकारी ढाँचे में एकरूपता लाने के लिए नई गाइडलाइंस पर काम कर रही है। ऐसे में राज्य स्तर पर कोई भी बड़ा नीतिगत बदलाव करना फिलहाल संभव नहीं है।
आंदोलन और बढ़ता संकट
एक तरफ जहाँ राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के ‘सिपहसालार’ भीलवाड़ा में हुंकार भर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जयपुर के राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में विभाग ने एक ऐसी बिसात बिछाई जिसने पैक्स कर्मचारियों के होश उड़ा दिए हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग ने आंदोलन की धार कुंद करने के लिए ‘प्रबुद्ध’ व्यवस्थापकों और ऋण पर्यवेक्षकों की एक विशेष फौज बुलाई थी। इस ‘सीक्रेट’ बैठक के लिए बाकायदा सीसीबी (CCB) के प्रबंध निदेशकों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे हर जिले से चुन-चुनकर 4-4 अनुभवी खिलाड़ी (कार्मिक) राजस्थान राज्य सहकारी बैंक पहुँचाएं।
प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि एक नीतिगत बाधा
विभाग ने प्रबुद्ध व्यवस्थापकों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि एक नीतिगत बाधा है जिसका समाधान अब राज्य सरकार या केंद्र से ही संभव है। 26 दिनों से जारी इस गतिरोध का समाधान न होने से आगामी फसली सीजन में किसानों की मुश्किलें बढ़ना तय है।


