सार
Jaipur : राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड (GCC) योजना में ऋण वितरण की प्रक्रिया फाइनेंशियल इंक्लूजन गेटवे (FIG) पोर्टल पर इन्टीग्रेशन का कार्य प्रक्रियाधीन, जिससे ऋण वितरण की प्रक्रिया 15 दिसंबर 2025 से पड़ी है ठप्प… अब तक महज 25 फीसदी लक्ष्य तक पहुंच पाया है ऋण वितरण का कार्य…

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 24 जनवरी | राजस्थान में ’गोपालकों’ के अच्छे दिन आए या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी में सहकारी बैंक जरूर ’पहलवान’ नजर आ रहे हैं। सरकार ने बड़े तामझाम के साथ 2,50,000 गोपालकों को कर्ज बांटने का लक्ष्य रखा था, लेकिन राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) की ताजा रिव्यू रिपोर्ट (15.01.2026) बता रही है कि सिस्टम की गाड़ी ’कछुआ चाल’ से भी पीछे चल रही है। योजना को शुरू हुए 2 साल बीत गया, लेकिन इस वित्तीय वर्ष की लक्ष्य प्राप्ति का मीटर 25.20 फीसदी पर आकर ऐसा अटका है जैसे बिना चारे की गाय खूंटे से बंधी हो। लक्ष्य था ढाई लाख का, और बैंक अब तक केवल 52,546 गोपालकों को इस योजना के तहत ऋण उपलब्ध करवा पाई हैं । बाकी के पौने दो लाख गोपालक शायद अभी भी बैंकों के बाहर ’पधारो म्हारे देश’ की धुन पर कागजों का मिलान कर रहे हैं। जबकि राज्य सरकार 11 फरवरी को अपना तीसरा बजट पेश करने जा रही है । गौरतलब हैं कि राज्य सरकार ने 2,50,000 गोपालकों को राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण बांटने का लक्ष्य भी गत बजट में रखा था ।
टारगेट ’हवा-हवाई’, उपलब्धि ’ज़मीन’ पर
गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत केंद्रीय सहकारी बैंक के मार्फत ग्राम सेवा सहकारी समितियों द्वारा 2,50,000 गोपालकों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । लेकिन राजस्थान राज्य सहकारी बैंक की 15 जनवरी 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट बता रही है कि अभी तक केवल 52,546 गोपालकों को ही पैक्स ऋण उपलब्ध करवा पाई है । जो लक्ष्य का महज 25.20 प्रतिशत ही है ।
चेतावनीः पुराना चुकाओगे, तभी नया पाओगे
रिपोर्ट के अंत में लिखा है कि ऐसे गोपालक जिन्होंने योजना के प्रारम्भ में ऋण लिया था, उनको सहकारी बैंक स्तर से वसूली करते हुए पुनः ऋण उपलब्ध करवाया जा सकता है। वर्तमान में अल्पकालीन अवधिपार ऋण होने की स्थिति में उसका चुकारा होने पर ही नवीन ऋण दिया जाएगा । जबकि रिपोर्ट के अनुसार गोपाल क्रेडिट कार्ड योजनान्तर्गत ऋण देने के लिए एफआईजी पोर्टल पर इन्टीग्रेशन का कार्य प्रक्रियाधीन है । जिससे 15 दिसंबर के बाद से ऋण वितरण की प्रक्रिया ठप्प पड़ी है । हालांकि गोपाल क्रेडिट कार्ड योजनान्तर्गत केवल ऋण स्वीकृत किए जा रहें है ।
सिरोही ’टॉप-पर’, जैसलमेर में ’मौन व्रत’
रिपोर्ट में सिरोही केंद्रीय सहकारी बैंक 77 प्रतिशत उपलब्धि के साथ अव्वल हैं। वहीं दूसरी ओर जैसलमेर का खाता ऐसा है जैसे वहां के गोपालकों ने कसम खा ली हो कि ‘‘कर्जा लेंगे नहीं और बैंक जाएंगे नहीं।‘‘ वहां उपलब्धि का आंकड़ा 0.00 प्रतिशत पर टस से मस नहीं हुआ है। शायद जैसलमेर की फाइलें अभी रेगिस्तान की किसी रेत के टीले के नीचे ठंडी हवा खा रही हैं। ऐसे ही हालत पाली सीसीबी में भी हैं । यहां पूरे जिले में केवल 9 लोगों को ऋण वितरित हुआ। ऐसा लगता है जैसे पैक्स व्यवस्थापक ने खुद घर जाकर उन 9 लोगों की मिन्नतें की होंगी कि “भाई, ले लो वरना रिपोर्ट खाली जाएगी।” अलवर और अजमेर की हालत भी ऐसी है कि वहां की बैंकों में ’गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना’ में आंवटित लक्ष्य की फाइलों पर कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा है ।


