राज्य की 4017 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के पद रिक्त

सार 

Rajasthan Assembly : विधानसभा में सहकारिता विभाग ने प्रस्तुत किया जवाब : ग्राम सेवा सहकारी समितियां में व्यवस्थापकों के 4017 पद रिक्त, इन पदों पर भर्ती के लिए समितियों से मांगी जा चुकी अभ्यर्थना

File Photo – rajasthan assembly

विस्तार 

जयपुर। डिजिटल डेस्क | 24 दिसम्बर | राजस्थान में करीब 4017 ग्राम सेवा सहकारी समितियां (Pacs) में व्यवस्थापक के पद रिक्त पड़े है । इन पदों पर राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड (RCRB) से भर्ती करवाने के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के माध्यम से ग्राम सेवा सहकारी समितियां (Pacs) से रिक्त पदों की अभ्यर्थना मांगी गई है । दरअसल विधानसभा के चतृर्थ सत्र में बायतु विधायक हरीश चौधरी ने राजस्थान की ग्राम सेवा सहकारी समितियां (Pacs) में व्यवस्थापकों के रिक्त पदों को लेकर तारांकित प्रश्न किया । इसका सहकारिता विभाग द्वारा पांच दिन पूर्व जबाव प्रस्तुत किया गया है । जिसके अनुसार ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के रिक्त पदों की सूचना अपेक्स बैंक के माध्यम से केंद्रीय सहकारी बैंक से प्राप्त कर राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड के जरिए भर्ती करवाने की तैयारी हैं, इसके लिए समितियों की अभ्यर्थना हेतु केंद्रीय सहकारी बैंकों को लिखा जा चुका है । जबकि विभाग ने सदन में लिखित जवाब पेश कर बताया कि जिन सहकारी समितियों में नियमित व्यवस्थापक पदस्थापित नहीं है, उन समितियों में अतिरिक्त कार्यभार या कार्य का दायित्व समिति के अन्य कार्मिक को दिया जाता है ।

File Photo – Jaisawas Pacs (Jalore)

व्यवस्थापकों के 4017 पद रिक्त

विधायक के सवाल पर विभाग ने अपना लिखित प्रतिउत्तर दिया है कि अपेक्स बैंक के माध्यम से केन्द्रीय सहकारी बैंकों से प्राप्त सूचना अनुसार ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के 4017 पद रिक्त पड़े है। साथ ही, विभाग के मुताबिक पैक्स-लैम्पस कर्मचारियों की भर्ती, चयन प्रक्रिया एवं सेवानियम 2022 में व्यवस्थापकों की भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षा कराये जाने का प्रावधान है, यह भर्ती प्रक्रिया सहकारी समितियों से अभ्यर्थना प्राप्त होने पर सहकारी भर्ती बोर्ड के माध्यम से की जाएगी ।

स्क्रीनिंग पर न्यायालय की रोक

विधायक के सवाल पर विभाग ने स्पष्ट किया है व्यवस्थापक सेवानियम 2022 के तहत एक बारीय स्क्रीनिंग का प्रावधान है । जबकि, उच्च न्यायालय द्वारा दो प्रकरणों में स्क्रीनिंग पर रोक लगाई गई थी, इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता की राय भी ली गई । जिसके अनुसार, स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पर संपूर्ण राज्य में रोक लगाई है । इस कारण स्क्रीनिंग किया जाना संभव नहीं है ।

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