“टाइम बाउन्ड प्रोग्राम” बनाने के बजाए सहकारिता विभाग करवा रहा जीएसएस में संविदा कार्मिक की नियुक्ति

सार

Jaipur : ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के रिक्त पदों पर भर्ती के मामले में सहकारिता विभाग का करवा रहा सेवा प्रदाता एंजेसी से संविदा कार्मिक की नियुक्ति, सहकारिता मंत्री ने रिक्त पदों पर भर्ती के लिए दिए थे टाइम बाउन्ड प्रोग्राम बनाने के निर्देश

विस्तार

जयपुर । डिजिटल डेस्क | 18 दिसम्बर | प्रदेश में 3000 से ज्यादा ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के पद रिक्त हैं, जिसे भरने की कवायद न तो सहकारिता विभाग कर रहा हैं और न ही राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड, जबकि राज्य में नई भाजपा सरकार बनने के साथ सहकारिता मंत्री का प्रभार संभालते समय गौतम कुमार दक ने समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों को ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के रिक्त पदों पर भर्ती के मामले में “टाइम बाउन्ड प्रोग्राम” बनाकर तीव्र गति से भर्ती करने का कहा था । वही इस भर्ती प्रक्रिया को ठंड के मौसम में शाल से ढ़कने के लिए सहकारिता विभाग के पंजीयक कार्यालय ने एक आदेश निकालकर सेवा प्रदाता एजेंसी के माध्यम से रिक्त पदों/अतिरिक्त चार्ज वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक पद पर संविदा कार्मिकों की नियुक्ति के निर्देश जारी किया हैं ।

जिससे यह लग रहा हैं कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक नियुक्ति के मामले में परिवारवाद के लिए एक बार पुनः द्वार खोल दिए गए है। इस दांवपेंच में निपूर्ण निर्वाचित संचालक बोर्ड ने अपनी ग्राम सेवा सहकारी समिति में अपने चहेतों को संविदा कार्मिक तक लगाकर वित्तदाता बैंक से अनुशंसा भी करवा दी है। हालांकि सहकारिता राज्य मंत्री का टाइम बाउन्ड प्रोग्राम इस आदेश के चलते खटाई में जाता नजर आ रहा हैं और राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड से ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के 3000 पदों पर भर्ती की घोषणा केवल कागजी कार्यवाही में सिमटती नजर आ रही है।

गौरतलब हैं कि प्रदेश में सहकारी साख सरंचना के त्रिस्तरीय ढांचे की सबसे छोटी एवं महत्वपूर्ण इकाई ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक एवं सहायक व्यवस्थापक पदों पर वर्ष 1987 में सीधी भर्ती हुई थी । 37 साल बीत जाने के बावजुद इन समितियों में सीधी भर्ती नहीं हो पाई है और वर्ष 2017 में चयन और भर्ती के लिए गठित सहकारी भर्ती बोर्ड भी सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय के मनमाने फरमाने के चलते पिछले आठ साल से ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक के रिक्त पदों पर भर्ती नहीं करवा पाया है।

एक बार हुई रिक्त पदों पर भर्ती की कवायद

राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड का गठन होने के पश्चात एक बार भर्ती की कवायद तत्कालीन सदस्य सचिव सोहनलाल लखानी ने की थी, उन्होने 19 जनवरी 2018 को एक आदेश जारी कर ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापकों के रिक्त पदों की अभ्यार्थना के संबंध में समस्त केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा था । लेकिन भर्ती बोर्ड द्वारा अभ्यार्थना मांगने के बावजूद सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय ने 1 अगस्त 2018 को केंद्रीय सहकारी बैंकों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग चयन कमेटी के माध्यम से व्यवस्थापक के नियमितिकरण का आदेश जारी कर, भर्ती की कवायद को पंगु बना दिया । उसके पश्चात सहकारी भर्ती बोर्ड ने व्यवस्थापकों के रिक्त पदों पर भर्ती के मामले में सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय के हस्तक्षेप के उपरांत किनारा कर दिया ।

25 फिसदी सहकारी समितियों असंतुलन में

अपेक्स बैंक से प्राप्त आंकड़ो के अनुसार प्रदेश की 2000 से ज्यादा ग्राम सेवा सहकारी समितियां असंतुलन में हैं, कई समितियों में अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले व्यवस्थापकों को भत्ता के नाम पर फुटी कौड़ी तक मिलना मुश्किल हो गया हैं, जबकि इनका भत्ता मात्र 3000 रुपए ही हैं, वही अब अतिरिक्त चार्ज वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संविदा कार्मिक की नियुक्ति होगी, जिससे संविदा कार्मिको वेतन-भत्ता देने का संकट ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सामने आकर खड़ा हो गया हैं, क्योकि संविदा कार्मिकों को वेतन का भुगतान असंतुलन के चलते नहीं होगा या फिर वेतन का भुगतान अगर हो भी गया, तो वेतन देने से यह समितियों असंतुलन की ओर बढ़ते हुए अवसायन की कगार पर पहुंच कर बंद हो जाएगी ।

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