सार
Rajasthan : कैडर अथॉरिटी गठन और वेतन विसंगतियों को लेकर ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों ने 27 फरवरी से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। विभाग की वादाखिलाफी से आक्रोशित कर्मचारी अब सीधे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं,

विस्तार
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 27 फरवरी | राजस्थान का सहकारिता विभाग इन दिनों एक अजीबोगरीब ’निद्रासन’ में है। एक तरफ राज्य की रीढ़ कहे जाने वाले ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारी अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ विभाग के आला अफसर फाइलों पर कुण्डली मारकर बैठे हैं। विभाग के एसी कमरों में बैठे हुक्मरानों को शायद यह मुगालता था कि आश्वासनों की चाशनी में डुबोकर कर्मचारियों की जायज मांगों को अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। लेकिन राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आज स्पष्ट कर दिया है कि अब समझौता नहीं, सीधा प्रहार होगा। आज प्रदेश की समस्त ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए सभी जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशकों और उप रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि विभाग की वादाखिलाफी के खिलाफ एक ’आरोप पत्र’ है। दरअसल, संघर्ष समिति द्वारा जारी पत्र विभाग की कार्यशैली पर करारा तमाचा है। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि कैडर अथॉरिटी के गठन को लेकर विभाग ने केवल ‘कागजी औपचारिकताएं’ पूरी की हैं। धरातल पर परिणाम ’शून्य’ है। विडंबना देखिए, जिस विभाग के कंधों पर किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जिम्मेदारी है, वही विभाग अपने ही जमीनी पैक्स कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाओं और स्पष्ट नियमों के लिए तरसा रहा है। संघर्ष समिति ने तंज कसते हुए कहा है कि विभाग की ‘प्रशासनिक शिथिलता’ और ‘वायदा खिलाफी’ ने कर्मचारियों के आक्रोश को उस मुकाम पर पहुँचा दिया है, जहाँ से अब पीछे मुड़ना संभव नहीं है।

अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू
संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि 27 फरवरी 2026 से प्रदेश में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू हो चुका है। इस बहिष्कार का सीधा असर उन योजनाओं पर पड़ेगा जिनका ढिंढोरा सरकार पीटने में व्यस्त है । इनमें जिस सहकार से समृद्धि का सपना पैक्स कंप्यूटराइजेशन के जरिए देखा जा रहा है, उसकी चाबी लेकर कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं। साथ ही, सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं अब जमीनी हकीकत नहीं, बल्कि सिर्फ विभाग की वेबसाइट पर ’अपडेट’ की बाट जोहेंगी। समिति ने साफ शब्दों में कहा है कि यह बहिष्कार तब तक जारी रहेगा जब तक सहकारिता मंत्री के हस्ताक्षर युक्त ’कैडर अथॉरिटी’ गठन का लिखित आदेश प्राप्त नहीं हो जाता।
समितियों की ’स्वायत्तता’ पर सीधा प्रहार
सहकारिता विभाग और पंजीक द्वारा जारी ’पैक्स व्यवस्थापकीय सेवानियम-2022’ को कर्मचारियों ने विसंगतिपूर्ण बताया है। समिति का आरोप है कि केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा जबरन नियम थोपे जा रहे हैं। अब कर्मचारियों ने अपनी ’स्वतंत्रता’ की घोषणा कर दी है। समितियों के संचालक बोर्ड अब खुद स्वतंत्र प्रस्ताव पारित कर कर्मचारी नियोजन, चिकित्सा लाभ और पेंशन जैसे निर्णय लेंगे। साथ ही, समितियों की अपनी ’आदर्श सेवानियम’ तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, केंद्रीय सहकारी बैंकों में जमा समितियों की करोड़ों रुपये की हिस्सा राशि को निकालकर भारतीय नियामक संस्थाओं के पास सावधि जमा के रूप में रखा जाएगा, ताकि समितियों को अधिक ब्याज मिल सके। यह विभाग की आर्थिक तानाशाही पर सबसे बड़ा प्रहार है।
एक्पर्ट व्यू
विभाग की ढुलमुल नीति के कारण सबसे ज्यादा नुकसान ’अन्नदाता’ यानी किसान का होने वाला है। यदि ऋण वितरण और वसूली रुकती है, तो इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा। संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि इसकी पूरी नैतिक और विधिक जिम्मेदारी शासन और सहकारिता विभाग की होगी। विभाग फिलहाल ‘धृतराष्ट्र’ बना बैठा है, लेकिन उसे समझना होगा कि ‘जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।’
सहकारिता विभाग के गलियारों में हलचल
कर्मचारियों के इस आक्रोश का असर अब सहकारिता विभाग के गलियारों में साफ दिखने लगा है। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा प्रदेशभर दिए गए ज्ञापन को जिला स्तरीय सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर पर भेज दिया है । इनमें उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां जालोर ने मूल रूप में ही ज्ञापन को उच्च स्तर पर भेज दिया है। जबकि प्रबंध निदेशक जालोर एवं सिरोही सीसीबी ने भी इस ज्ञापन को अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग), जयपुर को भेजकर विभाग को वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। हालांकि भीलवाड़ा सीसीबी प्रबंध निदेशक और संघर्ष समिति के सदस्यों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई है। सीसीबी प्रबंधन ने कर्मचारियों से 15 मार्च 2026 तक पैक्स कंप्यूटराइजेशन कार्य पूर्ण करने और किसानों के हित में कार्य बहिष्कार न करने का आग्रह किया है, क्योंकि ऋण वसूली न होने पर किसानों को ब्याज अनुदान का लाभ नहीं मिल पाएगा। इस स्थिती को देखकर लगता हैं कि जालोर से लेकर भीलवाड़ा तक अधिकारियों ने गेंद अब जयपुर स्थित मुख्यालय के पाले में डाल दी है।

“4 मार्च 2026 तक सरकार और विभाग ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इसके बाद होने वाले किसी भी प्रशासनिक गतिरोध और अन्नदाता (किसानों) को होने वाली असुविधा की पूर्ण नैतिक और विधिक जिम्मेदारी सहकारिता विभाग की होगी।”
-हनुमानसिंह राजावत, संयोजक संघर्ष समिति


