
जयपुर । डिजिटल डेस्क | 3 मार्च | प्रदेश में आगामी दो वर्षो में राजस्थान कृषि तकनीकी मिशन के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) एवं किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से 1500 कस्टम हायरिंग केंद्र और स्थापित करने है। जिससे कृषकों को महंगे कृषि यंत्र ट्रैक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, रीपर, सीड, ड्रिल आदि सहकारी समितियां (GSS) एवं किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से उपलब्ध करवाने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 900 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके क्रम में रजिस्ट्रार सहकारी समितियां जयपुर ने अलग-अलग आदेश जारी कर प्रदेश की 293 जीएसएस एवं केवीएसएस में कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। जिसमें, सर्वाधिक भीलवाड़ा में 34, जयपुर में 31, उदयपुर में 28 तो भरतपुर, बाड़मेर, गंगानगर में 17, चित्तौड़गढ में 16, वही, दौसा में 13, झुझुनूं में 12, बांरा में 11, राजसमंद में 10, जोधपुर व अलवर में 9, कोटा में 8, इसी प्रकार सिरोही, झालावाड़ में 7, प्रतापगढ़ में 6, सीकर, टोंक, पाली में 5, जैसलमेर, करौली बीकानेर में 4, नागौर, बांसवाड़ा, हनुमानगढ़ में 3, डूंगरपुर, जालोर में 2, अजमेर में 1 सहकारी समिति में कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है। हालांकि हाल ही में सहकारिता विभाग ने गत साल अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में स्वीकृत किए 726 कस्टम हायरिंग केंद्रों की प्रशासनिक स्वीकृति को निरस्त कर दिया है।


