सार
Jaipur : सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों के वेतन भुगतान, ‘कैडर अथॉरिटी’ गठन, नियमितीकरण और रिक्त पदों पर भर्ती व पदोन्नति की दोहराई मांग

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जयपुर । डिजिटल डेस्क | 2 अप्रैल | प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स-लैम्प्स) के कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की पुरजोर मांग सहकारी साख समितियां एम्पलाईज यूनियन राजस्थान के प्रान्तीय अध्यक्ष और सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने सहकारिता मंत्री और सहकारिता विभाग शासन सचिव एवं पंजीयक को पत्र लिखकर की है। सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश की अधिकांश समितियों में कार्यरत व्यवस्थापकों, सेल्समैनों और सहायक कर्मियों को नियमित वेतन तक नहीं मिल पा रहा है, जो कि एक गंभीर स्थिति है। उन्होंने मांग की है कि आर्थिक रूप से कमजोर समितियों को अनुदान देकर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए और कार्मिकों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र ’कैडर अथॉरिटी’ का जल्द से जल्द गठन किया जाए । सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा उठाते हुए सुझाव दिया कि स्क्रीनिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला कलेक्टर को पुनः स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए, ताकि विधिक बाधाएं दूर हो सकें । इसके साथ ही उन्होंने सहकारी बैंकों में बैंकिंग सहायक के रिक्त पदों पर पैक्स व्यवस्थापकों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षित भर्ती की विज्ञप्ति तुरंत जारी करने की मांग की है, जिससे बैंकों में स्टाफ की कमी दूर हो और अनुभवी लोग बैंकिंग व्यवस्था को मजबूती दे सकें ।
ऋण पर्यवेक्षकों के 381 रिक्त पदों पर भर्ती की मांग
ऋण पर्यवेक्षक के पदों पर भर्ती के संबंध में सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के केंद्रीय सहकारी बैंकों में लगभग 381 पद खाली पड़े हैं, जिससे फील्ड का काम और ऋण वसूली प्रभावित हो रही है । उन्होंने मांग की है कि अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर व्यवस्थापकों को इन पदों पर पदोन्नत किया जाए और आयु सीमा की बाध्यता को हटाया जाए । इसके अलावा, उन्होंने नवगठित सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए सरकारी सहायता प्रदान करने और राज्य सरकार की ओर से देय 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान राशि का समय पर भुगतान करने का आग्रह किया है । सहकार नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि इन मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो सहकारी साख ढांचे में कार्मिक असंतोष बढ़ सकता है ।


